Tuesday, June 1, 2010

संघर्ष, जो कभी खत्म नहीं होता, क्या आपने कभी संघर्ष किया .........>>> संजय कुमार

संघर्ष एक छोटा सा शब्द ! किन्तु इस छोटे से शब्द मैं इन्सान का पूरा जीवन निकल जाता है ! फिर भी यह शब्द या संघर्ष निरंतर चलता रहता है !और कभी ना खत्म होने बाला संघर्ष ! एक बहने बाली नदी के समान जिसे सिर्फ बहना आता है ! संघर्ष भी इन्सान के जीवन मैं कभी नहीं रुकता ! आज छोटा हो या बड़ा , अमीर हो या गरीब ! हिन्दू हो या मुस्लिम ! जीवन मैं संघर्ष किये बिना उसका कोई अस्तित्व नहीं होता ! होता है तो सिर्फ नाम का इन्सान ! क्योंकि कुछ पाना है तो संघर्ष करना ही पड़ेगा ! ठीक उसी प्रकार इन्सान जन्म से लेकर मृत्यु तक पल पल पर संघर्ष करता रहता है ! इन्सान का संघर्ष जन्म से शुरू होता है ! माफ़ कीजिये जन्म से पहले भी संघर्ष होता है ! आप सोच रहे होंगे की जन्म से पहले इन्सान कैसे संघर्ष करता है ! अरे भई मैं बात कर रहा हूँ उस बेटी की जो आज के इस युग मैं जहाँ कन्या भ्रूण हत्याएं अपने चरम पर हैं ! अब ऐसे मैं अजन्मी बालिका का संघर्ष होता है ! इस दुनिया मैं आने के लिए ! अगर इन्सान गरीब हो तो उस इन्सान का पूरा जीवन इस संघर्ष मैं गुजर जाता है की वह भी एक दिन बड़ा आदमी बनेगा ! और संघर्ष करते करते उसकी कई पीड़ियाँ बदल जाती हैं ! आज का इन्सान सब कुछ पाने को कर रहा संघर्ष ! आज का बेरोजगार युवा कर रहा संघर्ष बस एक छोटी सी नौकरी पाने को ! आज उपेक्षित माँ-बाप कर रहे संघर्ष सिर्फ अपना दर्जा पाने को ! भूँखा भी कर रहा संघर्ष अपनी भूंख मिटाने को ! इस देश मैं जब किसी बेगुनाह को इंसाफ नहीं मिलता तो उस बेगुनाह का सारा जीवन यूँ ही निकल जाता है ! संघर्ष करते हुए, इंसाफ पाने मैं ! जब तक इन्सान का जीवन है , तब तक इन्सान करता है सिर्फ संघर्ष ! वह भी कभी ना रुकने बाला ! और इस संघर्ष मैं इन्सान बन के रह जाता एक मशीनी मानव जो कभी रूकती नहीं !

आज संघर्ष कर रहा है हमारा देश ! ऐसे लोगों से अपने आप को बचाने का, देश के उन दुश्मनों से जो , पल पल पर इस देश को बेचने का काम कर रहे हैं ! देश संघर्ष कर रहा एकता , अखंडता , और भाईचारे को बचाने का ! जो पल पल पर हाँथ से यूँ फिसल रही जैसे फिसलती हाँथ से रेत ! आज देश कर रहा संघर्ष अपने ही भाइयों को अपनों का खून बहाने से रोकने का ! कर रहा संघर्ष दिन-प्रतिदिन, हिन्दू -मुस्लिम के बीच बढ़ती खाई को खत्म करने का !यह देश बस यूँ ही संघर्ष करता रहेगा अपने आप को बचाने का !

आज कर रही संघर्ष प्रकृति , अपना असली रूप बचाने को ! कर रही संघर्ष देश की गंगा-जमुना अपना मान बचाने को ! कर रह धर्म, संघर्ष अपनी धार्मिकता बचाने को ! अब कर रहा इन्सान संघर्ष, अपनी बची-कुची इंसानियत को बचाने का ! देखना है की देश का संघर्ष क्या कभी पूरा होगा ! या होगा इन्सान का संघर्ष मरते दम तक पूरा !

संघर्ष के बाद मिलने बाली सफलता का जो मजा आता है ! हर बो इन्सान जानता हैं , जिसने अपने जीवन मैं संघर्ष किया और आज अपना एक मुकाम बनाया !..........हम करते हैं, सलाम उस संघर्ष को .....................

धन्यवाद

5 comments:

  1. हाँ संजय जी.. कहना आसान है कि संघर्ष ही जीवन है.. पर हकीकत के धरातल पर संघर्ष करना आसान नहीं दिखता..

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  2. संघर्ष तो सतत प्रक्रिया है..अच्छा आलेख.

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  3. हम करते हैं, सलाम उस संघर्ष को .....................
    शायद संघर्ष का दूसरा नाम जीवन है

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