Saturday, December 6, 2014

बच्चे मन के सच्चे …… क्या हम भी हैं ? …………… >>> संजय कुमार

मन में बहुत गुस्सा आता है , आत्मग्लानि भी होती है , अपने हाँथों से सजा भी देना चाहते हैं, फिर भी हम कुछ नहीं कर पाते , मूक दर्शक बने खड़े रहते हैं , अंधों की तरह कुछ भी देख नहीं पाते , बहरों की तरह किसी के भी सिसकने , कराहने , दर्द और तकलीफ को सुन भी नहीं पाते। …… ? शायद ये दर्द हमारा नहीं है , शायद हमारे अपनों को चोट नहीं लगी है ! वो तो कोई और है गैर ,दूसरा , फिर चाहे कोई २ माह की मासूम बेटी ही क्यों ना हो , जिसे तंत्र - मंत्र के नाम पर ५० पचास  बार गर्म लोहे के सरिये से दागा  गया हो ,( घटना मध्य-प्रदेश के शिवपुरी जिले से है )  आखिर कौन है वो जो इस तरह की  हैवानियत पर उतर आया है  ? शायद हम इक्कीसवीं सदी के इंसान हैं ! अत्याचार तो सभी के ऊपर होता है , किन्तु हम उसका प्रतिरोध कर सकते हैं किन्तु बच्चे नहीं और वो भी २ माह या ५ साल का बच्चा ! घटना ऐसी है की आपकी रूह काँप जाए , हम अपने घरों में काम करते हुए जब माचिस की तीली या गर्म बर्तन से जल जाते हैं तो सीधा बर्नोल मांगते हैं और तरह तरह के उपयोग करते हैं जलन से बचने के लिए , फिर सोचिये ????? 

" बच्चे मन के सच्चे , सारे जग कीआँखों के तारे , ये वो नन्हे फूल हैं जो भगवान को लगते प्यारे " क्या इस तरह के गानों का आज कोई मूल्य है ? शायद मन को बहलाने के लिए काफी हैं ? बच्चे किसी के भी हों होते बहुत मासूम और बहुत ही प्यारे ,और हर कोई उन्हें बहुत प्यार भी करता है ! यहाँ तक की हम पशु -पक्षियों के बच्चों को भी उतना ही प्यार करते हैं जितना कि अपने बच्चों को , किन्तु आज जो कुछ बच्चों के साथ हो रहा है ,  आज जो उनकी स्थिति है उसे देखकर कभी-कभी इंसान होने की शर्मिंदगी भी अवश्य होती हैं ! हमारे सामने आज ऐसे एक नहीं हजारों उदहारण हैं जो इंसानियत और मानवता के लिए एक बदनुमा दाग हैं ! क्या हम इंसान ही हैं ? जो अपने बच्चों की खुशियों के लिए जीवनभर तकलीफें उठाते हैं , उन्हें एक अच्छी जिंदगी देने के लिए अब अपना सब कुछ दांव पर लगाने से भी कभी नहीं चूकते , तो दूसरी ओर कुछ लोग अपने ही बच्चों के साथ दिल को दहलाने वाली अमानवीय घटनाओं को क्यों अंजाम दे रहे हैं ! ऐसे कार्य जो जघन्य अपराध की श्रेणी में आते हैं , क्यों कर रहे हैं ? हमारे देश में कुछ अजन्मे बच्चों को " माँ " की कोख में ही मार डाला जाता है और इस तरह का कार्य पिता और परिवार के लोगों द्वारा ही किया जाता है ! कहीं दो साल की बच्ची के साथ बलात्कार और यौन शोषण जैसी इंसानियत और मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटनाएँ हो रही हैं ! कहीं पिता , परिवार और सगे रिश्तेदारों के द्वारा मासूम बच्चे -बच्चियों का यौन शोषण हो रहा है ! कहीं माता-पिता अपना पेट भरने के लिए अपने ही मासूम बच्चे का सौदा कर उन्हें बेच रहे हैं ! कहीं बच्चों को माता-पिता के गुस्से का शिकार होना पड़ता है , कहीं माँ तो कहीं पिता बच्चों को मारकर खुदख़ुशी कर लेता है , तो कहीं स्कूल में टीचर का दुर्व्यवहार बच्चों को सहना पड़ता है ! गरीबी से तंग आकर माता -पिता बच्चों के साथ अन्याय कर रहे हैं ! कहीं ट्रेन में कोई ६ महीने का बच्चा ( बेटी ) छोड़ जाता है , तो कोई नवजात को कचरे के ढेर पर फेंक जाता है ! आज बच्चे कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं ! चारों तरफ बच्चों का भक्षण करने वाले भेड़िये सिर उठाकर खुलेआम घूम रहे हैं ! " निठारी कांड "जैसी  कई घटनाएँ बच्चों पर हुए निर्मम अत्याचार की गवाह हैं ! बच्चों पर होने वाली इन घटनाओं , उन पर होने वाले अत्याचारों को देखकर लगता है जैसे मासूम बच्चे हम इंसानों की आँख की किरकिरी बन गए हैं ! वर्ना इतना तो शायद ही बच्चों ने कभी सहा हो जितना कि पिछले १५-२०  सालों में हुआ हो ! ऐसा नहीं है इस तरह की घटनाएँ भारत में ही हो रही हैं बल्कि बच्चों के साथ यौन शोषण जैसी घटनाएँ विदेशों में भी कई हुई हैं कई बड़ी हस्तियों के  नाम भी  " बाल यौन शोषण " से जुड़े रहे ! आज जो अत्याचार बच्चों के साथ हो रहे है उसे देखकर तो भगवान भी डरता होगा कि कहीं हमें इस दौर में बच्चे के रूप में जन्म ना लेना पड़ जाये ....... वर्ना पता नहीं इस रूप में हमें और क्या क्या देखना और सहना पड़ेगा !

 हमारा देश तरक्की कर रहा है ? देश में भ्रष्टाचार काम हो गया है ? बच्चों पर अत्याचार का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा है ! बच्चे तो मन के सच्चे होते हैं किन्तु हमारा सच ( इंसानियत ) कब जागेगा ?
 
धन्यवाद  
संजय कुमार 

Thursday, August 14, 2014

क्या आप भारतीय हैं ?? यदि हाँ , तो फिर कौन से ?…………>>> संजय कुमार

68 वें स्वतंत्रता दिवस पर मैं आप सभी साथियों एवं समस्त देशवासियों को " स्वतंत्रता दिवस " की ढेर सारी बधाइयाँ और शुभ-कामनाएं देता हूँ ! आइये हम सब अपने मन में उठने वाले सभी नकारात्मक विचारों से आजाद होकर इस पर्व को परिवार सहित हँसी ख़ुशी- ख़ुशी  मनाएं। 

क्या आप भारतीय हैं ? इस तरह का प्रश्न पूंछना शायद गलत है , किसी भी सच्चे देशभक्त की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है ! इस प्रश्न के लिए मैं  माफ़ी चाहता हूँ ! फिर भी आप कौन से भारतीय हैं इस बात पर जरा ध्यान दीजिये ! सर्वे और रिपोर्ट के आधार पर हम भारतियों की स्थिति।  

पहला भारतीय .............   आंकड़ों के अनुसार औसतन हर भारतीय कर्जदार है !
दूसरा भारतीय  .............. अभी सर्वे जारी है। 
तीसरा भारतीय ..........… हर तीसरा भारतीय गरीब है ! हर तीसरा भारतीय भ्रष्ट है ! देश की हर तीसरी शादी शुदा महिला बालिका बधु है ! (  मतलब उसका विवाह १८ बर्ष की उम्र के पहले हुआ ) 
पाँचवे से लेकर १०० वें भारतीय का सर्वे भी अभी जारी है ! 

इस तरह के सर्वे और रिपोर्ट कितनी सही और कितनी गलत है ये कहना मुश्किल है  फिर भी ये हमारे देश का दुर्भाग्य है कि , हमारे देश पर या देशवासियों पर विश्व बैंक का कर्जा  है तो दूसरी ओर काली कमाई का " स्विस बैंक " में जमा कालेधन में  पिछले बर्ष  ४०% का इजाफा होना ( पहले ७० लाख करोड़ और अब ८५ लाख करोड़ ) " गरीबों का पैसा अमीरों के बैंक में " ! चार बर्ष पूर्व एक सर्वे आया था जिसमें ये बताया गया था कि , भारत का हर तीसरा व्यक्ति भ्रष्ट है और भ्रष्ट देशों की सूची में भारत चार साल पहले विश्व में ८४ वें  नम्बर पर था , अब प्रश्न यह उठता है कि , क्या पिछले चार सालों में हम नंबर २ की पोजीशन पर आये या फिर तीन पर ही बरकरार हैं ? बहुत दिनों से बड़े घोटालों की ख़बरें आना बंद हो गई हैं ! शायद " अच्छे दिन " आ गए हैं या फिर मेंहगाई की मार ने हमारी सोचने समझने की शक्ति हमसे छीन ली है अभी २०१४ में सँयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के आधार पर एक नया सर्वे आया जिसमें ये बताया गया है कि , भारत का हर तीसरा व्यक्ति गरीब है , अभी दो दिन पूर्व एक और चौंकाने वाली रिपोर्ट में ये बताया गया है कि , करोड़पतियों  की सूचि में भारत अब विश्व में आठवें नंबर पर है , यानि १५००० करोड़पतियों ने भारत को टॉप १० की लिस्ट में पहुंचा दिया है , जिस  लिस्ट में चीन , जापान ,अमेरिका और  यूरोप जैसे विकसित विकासशील देश शामिल हैं ! ( अमीर लोगों का गरीब देश भारत ) 
इस तरह की रिपोर्ट पढ़कर ये सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि, हम भारतीय हैं ? पर कौन से .... पहले - दुसरे या तीसरे या फिर हमारा कोई नंबर ही नहीं है ! कोई भी भारतीय इस रिपोर्ट पर विश्वास नहीं कर  रहा है , और हर कोई यह कह रहा है, कि यह रिपोर्ट पूरी तरह गलत है, १२५ करोड़ की आवादी  वाला देश जहाँ चारों ओर  गरीबी और बेरोजगारी है , लोगों के पास ना तन ढंकने को कपडा है ना सिर पर छत है ! हजारों - लाखों भारतीय तो यह भी नहीं जानते कि , भ्रष्टाचार होता क्या है ? उस देश का हर तीसरा आदमी कैसे भ्रष्ट हो सकता है ! ऐसा लगता है कि , भारत को बदनाम करने के लिए पडोसी देश की ये कोई नई चाल है ! यह रिपोर्ट क्या आई  आम नागरिक अब एक-दुसरे को शक की द्रष्टि से देखने लगा है और मन ही मन यह अनुमान लगा रहा है कि, यह कौनसा  भारतीय है , लेकिन अनुमान लगाना इतना आसान नहीं हैं , क्योंकि इस देश में रहने वाला कोई भी भारतीय अपने आप यह कभी नहीं कहेगा की मैं किस नंबर का भारतीय हूँ ! वह तो सिर्फ इतना कहेगा की मैं तो सिर्फ भारतीय हूँ , ना पहला, दूसरा और ना तीसरा , उसकी यह बात सुनकर अच्छा भी लगा , क्योंकि हमारे देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो रहते यहाँ हैं , खाते- पीते यहाँ हैं जीवन यापन इस देश में करते हैं और जब राष्ट्र भक्ति की बात आती है तो गुणगान किसी और का ................ खैर जाने देते हैं इस बात को ... वर्ना  देश के कुछ गद्दार कहीं भड़क ना जाएँ ! ( सच बहुत कड़वा होता है )

प्रश्न ये है कि , क्या आप भारतीय हैं ?  और हम सभी का जबाब " हाँ " है  ! किन्तु ये भी सच है कि , हम सभी भारतीय होने से पहले कुछ और हो जाते हैं ! हम हिन्दू-मुस्लिम हो जाते हैं , हम सवर्ण - दलित हो जाते हैं , हम गरीब - अमीर हो जाते हैं , हम छोटे और बड़े हो जाते हैं .……  और फिर धीरे - धीरे हम भारतीयता को भूल जाते हैं ! हम सभी ने अपने आप को कई वर्गों में बाँट रखा है और इस वर्गीकरण से हम सच से कोसों दूर होते जा  रहे हैं ! भारतीय होने का अहसास हमें २६ जनवरी - १५ अगस्त को ही विशेष रूप से होता है ! विदेशियों द्वारा किये जाने वाले सर्वे से एक बात की ख़ुशी अवश्य होती है कि , वो हम भारतियों पर सर्वे करते हैं , ना की वर्गीकरण के साथ , इसलिए तीसरा भारतीय ( गरीब , भ्रष्ट , बालिका बधु ) कोई भी हो सकता है ! रिपोर्ट का हमारे धर्म-मजहब , हिन्दू-मुस्लिम , सवर्ण -दलित से कोई लेना देना नहीं है ! अब रिपोर्ट पर आते हैं तो  सवाल यह उठता है की, वह तीसरा आदमी कौन है ? जो इस सर्वे की रिपोर्ट में पकड़ में आया हैं और कैसे ? क्योंकि आज तक हम लोग चंद मुट्ठी भर लोगों को ही इस देश में भ्रष्ट मानकर चले आ रहे हैं ! देश के नेता , मंत्री -संत्री , साधू-सन्यासी , आला-अफसर , पुलिस , डॉक्टर , वकील , गुंडे-मवाली , और देश की बागडोर चलाने वालों  के चमचे , चेले-चपाटे और भी बहुत से लोग हैं जो देश में तीसरे भारतीय हैं ! अगर हर तीसरा भारतीय गरीब भी है तो एक गरीब आदमी भ्रष्ट कैसे हो सकता है ? आज का गरीब तो अपने हक़ की लड़ाई , लड़ते - लड़ते कई बार दम तक तोड़ देता है ! भ्रष्टाचार क्या और कैसे होता है ? बेईमानी क्या है ? ऐ  गरीब नहीं कर सकता , बल्कि बेईमानी और भ्रष्टाचार तो उसके साथ होता है ! अगर रिपोर्ट आई है तो कुछ ना कुछ तो सही होगा , लेकिन कैसे , अब तो हम सिर्फ अनुमान ही लगा सकते हैं कि, हम कौन से भारतीय है ? पहले , दुसरे या तीसरे , हम तो उस तीसरे भरतीय को खोज रहे हैं जो हमारे देश का नाम ख़राब कर रहा है ! अगर वह तीसरा भारतीय आपको कहीं मिल जाए तो आप जरूर बताइएगा  !
( एक सच  ) अंग्रेजों से आज़ादी हांसिल करने के लिए जिन लोगों ने लड़ाईयाँ लड़ी , वलिदान दिया वो सभी भारतीय थे और वो सभी पूर्ण भरतीयता के साथ लड़े .......... ना कि , किसी वर्गीकरण के साथ ……… यदि लड़े होते तो हम आज भी गुलाम होते ! तो फिर क्यों आज भारतीय होने  से ज्यादा दुसरे मुद्दों पर ज्यादा जोर है ?
  

मैं तो सिर्फ भारतीय हूँ और अपने भारतीय होने पर फक्र भी करता हूँ ! फिर भी मैं आपसे पूंछ रहा हूँ कि ,
क्या आप भारतीय हैं  ??  यदि हाँ ,  तो फिर कौन से ?………


एक बार फिर से मैं आप सभी को  " स्वतंत्रता दिवस " की ढेर सारी बधाइयाँ और शुभ-कामनाएं देता हूँ !
जय हिन्द …… वन्दे मातरम् ……… ……  इन्कलाब जिन्दाबाद …… जय हिन्द 

धन्यवाद 
संजय कुमार 

Tuesday, April 8, 2014

हंगामा खड़ा करना ही मेरा मकसद है ..............>>> संजय कुमार

आप सभी को " रामनवमी की हार्दिक बधाई और शुभ-कामनायें 

 " सिर्फ  हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद  नहीमेरी कोशिश है की ये  सूरत बदलनी चाहिए ,मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही , हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए " ! दुष्यंत कुमारजी की ये पंक्तियाँ जब भी सुनता हूँ तो एक जोश जैसे मेरे दिल में भर जाता है , हालांकि आज पूरा देश जोश और जज्बे से लबरेज है ! आज हमारे देश में चारों ओर शोर-गुल , भीड़-भाड़ , हंगामा , आरोप-प्रत्यारोप , रैलियां , रोड शो का माहौल है क्योंकि नई सरकार की लहर बहुत तेजी से चल रही है और शायद इसीलिए हमारे देश में चारों ओर हंगामे सा माहौल है ! आज मैं यहाँ फिर बात करूंगा अपने देश के कर्ता - धर्ता नेताओं और राजनीतिज्ञों की जो आज दिन-प्रतिदिन की सुर्ख़ियों में बने रहने के लिए हंगामे की राजनीति  कर रहे हैं ! ( शायद आज की राजनीती का पहला उसूल )  आखिर इस देश का नेता करता क्या है ?  हंगामा और सिर्फ हंगामा , विकास की बड़ी - बड़ी बातें , मेंहगाई पर अंकुश , नारी सुरक्षा , काला धन वापसी, और एक दुसरे पर घटिया - आपत्तिजनक बयान ..........शायद इसी को राजनीति कहते हैं ! जब तक नेता  चुनाव जीत नहीं जाते , सरकार बना नहीं लेते , सरकार में आने के बाद अपने फायदे के विधेयक पास नहीं करा लेते तब तक  यूँ ही हर दिन बात -बात पर और बिना बात पर हंगामा करते रहेंगे ! क्योंकि इस देश को तो नेता  ही चला रहे हैं और आने वाले हजारों साल तक  इस देश को चलाएंगे ! अगर मैं सच कहूं और देखा जाय तो  देश तो अपने आप ही चल रहा है ! भ्रष्ट नेताओं ने  तो इस देश की लुटिया पहले भी कई बार डुबोई है और आज भी पूरी कोशिश में सभी के सभी एक साथ लगे हुए हैं ! हम तो सिर्फ यही देख सकते हैं कि ये कोशिश कब रंग लाती है ( हालांकि अब डूबने को कुछ बचा नहीं ) हमारे देश के नेताओं का राजनीति में आने का उद्देश्य आज तक समझ नहीं आया !  देश के नेताओं का कहना तो ये है कि हमारा उद्देश्य देश को आगे बढ़ाने का है , हम देश को विकसित और विकासशील देशों की श्रेणी में प्रथम स्थान पर लाने के लिए हर संभव कोशिश करने के लिए प्रयासरत हैं ! सच पूंछा जाय तो इनका मुख्य उद्देश्य सिर्फ लड़ना है ! देश के नेता  कहीं भी कभी भी लड़ सकते हैं ! लड़ने में ये सभी पूर्ण रूप से पारंगत हैं ! " संसद भवन " सड़क " मंदिर " घर -बाहर " देश में विदेश में , शादी समारोह में , खेल के मैदान में , किसी की शहादत पर तो कभी नक्सलवाद पर , ये  बात बात पर लड़ते हैं , बिना किसी बात के भी लड़ते हैं ! सही बात पर भी लड़ते हैं , झूंठी बात पर भी लड़ते हैं ! पक्ष में होते हैं तो लड़ते हैं , विपक्ष में होते हैं तो लड़ते हैं !  सरकार में रहकर लड़ते हैं सरकार से बाहर होने पर लड़ते हैं ! बिना लड़े और  बिन बात का मुद्दा उठाये बिना देश के नेताओं का जैसे खाना कभी हजम ही नहीं होता ! इनके लड़ने से भले ही आम जनता का अहित होता हो , भले ही उनका नुक्सान होता हो , भले ही देश की अर्थव्यवस्था को नुक्सान होता हो , किन्तु इन सब के बीच फायदा सिर्फ नेताओं का ही होता है ! देश के नेता  हमेशा सिर्फ अपने भले की सोचते हैं तभी तो " लोकपाल " पर इतने दिनों से लड़ रहे हैं और पास भी नहीं कर रहे हैं ! सभी नेताओं ने मिलकर अपने फायदे के सभी विधेयक संसद से पास करवा रखे  हैं ! देश के नेता नहीं चाहते कि , मंहगाई खत्म हो, डीजल-पेट्रोल मूल्य वृधि कम हो , नहीं चाहते कि , " कालाधन " मामले पर कोई बात हो , इसे बापस लाया जाये ! इस देश से आतंकवाद खत्म हो , गरीबी खत्म हो , बेरोजगारी खत्म हो , भ्रष्टाचार - घूसखोरी , लूट-खसोट , दंगे-फसाद , धर्म-मजहब के नाम पर होने वाली लड़ाईयां बंद हों ! इस देश में किसान आत्महत्या करता है तो करे , मासूम बच्चे कुपोषण का शिकार होते हों तो हों , देश की युवा पीढ़ी नशे के दलदल में फंसती है तो फसे , इस देश में धर्म की आड़ में महिलाओं का दैहिक शोषण होता है तो हो , राह चलते नारी की इज्जत पर हमला होता है तो हो , भले ही अपने वादे पर कभी खरे ना उतरे हों , ये सारी बातें नेताओं के  लिए सिर्फ मुद्दे हैं , और ये वो मुद्दे हैं जो इन्हें ५ साल अपना काम ( लड़ाई ) करने के लिए पर्याप्त हैं ! नेता  हमेशा बही काम करते हैं जिसमे इनका फायदा ज्यादा से ज्यादा हो आखिर हम इस देश के पालनहार जो ठहरे ! नेता  भले ही किसी भी पार्टी में रहें इनका  उद्देश्य ( देशहित ) लक्ष्य को कभी भी पूरा ना करना है बल्कि लक्ष्य से भटकाना है !
अगर इस देश में राजनेता ना हों तो क्या होगा ? देश में फैला भ्रष्टाचार बंद हो जायेगा ! गरीबों को उनका हक मिल जायेगा ! देश से कुपोषण , भुखमरी , बेरोजगारी समाप्त हो जाएगी ! महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार बंद हो जायेंगे ! धर्म -मजहब के नाम पर भाइयों का आपस में लड़ना बंद हो जायेगा ! देश की अर्थव्यवस्था सुधरेगी , देश तरक्की , प्रगति की ओर अग्रसर होगा ! समाज , और देश में कानून का राज होगा ! देश से " अंधेर नगरी चौपट राजा " वाली कहावत दूर होगी ! किन्तु ये तभी संभव होगा जब इस देश से भ्रष्ट , घूसखोर , बेईमान राजनेता और उनकी पार्टियाँ इस देश से खत्म होंगी ! ये तभी संभव होगा जब सच्चे राजनेता और उनकी राजनीतिक पार्टियाँ देश , समाज , आम जनता का हित सोचने वाली बात पर द्रण संकल्पित हों ! जब तक अच्छे राजनेता इस देश में नहीं होंगे तब तक भ्रष्ट राजनेता यही चाहेंगे कि , राजनीति के नाम पर होने वाली प्रतिदिन की ये लड़ाईयां कभी भी बंद ना हों !

सच तो ये है कि, हंगामा खड़ा करना ही मकसद है इनका ............... आप क्या सोचते हैं ?

धन्यवाद  

Friday, February 14, 2014

" Happy Valentine Day " ........>>>>>>>>> Sanjay Kumar

ना मालूम था कि ,
प्रेम क्या होता है 
मिला तुमसे तो 
जाना कि 
प्रेम क्या होता है 
सिखलाया तुम्हीं ने 
कि , प्रेम क्या होता है 
सच तो ये है कि 
प्रेम तो दो दिलों के 
जुड़ने का नाम है !
तुम ही हो मेरी 
" प्रिये " 
मेरी वेलेनटाईन
और सदा रहोगी !

" Happy Valentine Day "

" Happy Valentine Day "

संजय कुमार 



Saturday, January 11, 2014

" युवा दिवस " पर आव्हान ( इस देश की तस्वीर अब बदल डालो ) ....…>>> संजय कुमार

सर्व-प्रथम मैं आप सभी लोगों को नव-बर्ष २०१४ की हार्दिक बधाई और शुभ-कामनायें  देता हूँ , और बधाई देता हूँ देश के सभी युवाओं को और उनसे आशा करता हूँ कि,  इस बर्ष आप अपनी उपस्थिति से इस देश की तस्वीर बदल देंगे ! 2014 का सूरज देश के लिए एक नया सवेरा लेकर आया है ! आज की युवा - पीढ़ी ने राजनीति के सभी आयाम बदल दिए , जो ना सोचा वो हो गया , सब कुछ " आप " युवाओं के जोश ने सम्भव कर दिखाया ! अब इस देश की उम्मीद पूरी तरह से आज की युवा पीढ़ी पर ही  है ! हम जानते हैं कि , हम युवाओं में है माद्दा इस देश की तस्वीर बदलने का ! आज " युवा दिवस " के मौके पर मैं फिर से एक बार देश के युवाओं एवं  अपने सभी युवा साथियों से गुजारिश करता हूँ की वो अब अपनी उपस्थिति से एक सभ्य और शिक्षित समाज का निर्माण करें जो इस देश को विकसित और विकासशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए ! आज हमारे देश के जो हालात हैं वो ठीक नहीं हैं , चारों ओर भ्रष्टाचार , घूसखोरी , बेईमानी , मेंहगाई जैसे राक्षस आज भी अपना सिर उठाकर बड़ी बेफिक्री से घूम  रहे हैं ! सन  २०१३  की शुरुआत " दामिनी " के साथ हुए अमानवीय अत्याचार के विरोध में एकजुट हुए देश के युवाओं से हुई थी ! वो हादसा हमारे  देश की सुस्त सुरक्षा व्यवस्था और इंसान के गिरते हुए स्तर का एक बहुत बड़ा उदाहरण था तो दूसरी ओर " दामिनी " को इन्साफ दिलाने के लिए एकजुटता का उदाहरण ! ये सब युवा ही थे जो इन्साफ दिलाने के लिए सरकार को मजबूर कर सके , अगर  सच कहूं तो सरकार की मजबूरी और मकसद हमेशा अपनी कुर्सी को बचाने का होता है और उसके लिए उन्हें सब कुछ मंजूर है !
हम बात करते हैं आज के युवाओं की जिनके आदर्श सचिन -राहुल , सलमान - शाहरुख़ , कैटरीना - करीना हैं और आज की नई कतार के हीरो-हीरोइन ! यह बात मैं इसलिए कह रहा हूँ कि , अभी एक सर्वे में ये खुलासा हुआ कि , बीते बर्ष सबसे ज्यादा " रणवीर कपूर - सनि लिओन " ( इंटरनेट ) को पसंद किया गया , ये  कलाकार आज युवाओं के आदर्श बन गए हैं ,ना की  स्वामी विवेकानंद और भगत सिंह ! सच तो ये है कि आज के युवाओं का कोई आदर्श ही नहीं है और ना ही कोई सिद्धांत , जैसे हर हफ्ते फिल्म के पोस्टर बदलते हैं ठीक वैसे ही उनके आदर्श और सिद्धांत भी दिन-प्रतिदिन बदल जाते हैं  ! संस्कार रहित , अपनी मस्ती में मस्त , घर-परिवार , समाज - देश दुनिया में हो रही गतिविधियों से कोसों दूर , भेड़चाल के शिकार , उत्तेजना से लबरेज , सब्र का अभाव , मरने - मारने को सदैव तत्पर , विदेशी कल्चर का तेजी से अनुशरण करने वाला ! अपने हांथों से अपने हजारों  बर्ष पुराने संस्कार और अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला और कोई नहीं आज का युवा ही है ! अब ऐसे युवाओं का सचेत होना जरुरी है , अन्यथा …....?   दूसरी ओर इस देश के कई युवा ऐसे भी हैं जो इस देश की तरक्की और विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं ! देखा जाय तो आज  देश में बढ़ते अपराधों में सबसे ज्यादा प्रतिशत युवाओं का ही है ! हमारे बीच क्लबों का बढ़ता हुआ चलन , ड्रग्स , शराब , लेट नाईट पार्टियाँ , जिस्मफरोशी इन सभी के पीछे कोई नहीं बल्कि आज का भटका हुआ युवा ही है ! ऐसा नहीं है की देश का सभी युवा वर्ग यही सब कर रहा है ! इस देश में ऐसे भी नौजवान हैं जो आज भी अपने देश पर मर मिटने को सदैव तत्पर रहते हैं , ऐसे भी युवा हैं जो समाज को सुधारने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं ! आज समाज और देश की दुश्मन ताकतों से हमारी रक्षा करने वाला कोई और नहीं आज का देशभक्त युवा ही है ! आज कई युवा भारत का नाम विश्व स्तर पर ऊंचा कर रहे हैं ! किन्तु ये संख्या ना के बराबर है ! शायद हम युवाओं में द्रण-निश्चय और सब्र की कमी है ! ऐसा क्यों है ......?  इसके पीछे आखिर क्या कारण है ? कौन है इसके लिए जिम्मेदार ? आज के युवाओं में संस्कारों का अभाव , पैसे कमाने की अंधी दौड़ या गलत तरीकों से ज्यादा कमाने की दौड़ , गलत सभ्यता और और असंस्कारों का हावी होना ! माता -पिता का अपने बच्चों के लिए समय का अभाव , देश में बढ़ती बेरोजगारी , मेंहगाई और भ्रष्टाचारी का अपनी चरम सीमा पर होना , सरकार का हर बात पर ढुल - मुल रवैया होना या फिर इंसान का अपने लिए स्वार्थी होना ! ऐसे अनेकों कारण है जो किसी भी युवा को अपने लक्ष्य से भटका सकता है ! फिर क्या किया जाये .......?

जिम्मेदारी हम युवाओं को ही लेनी पड़ेगी ! हम ही सब कुछ ठीक कर सकते हैं ! भ्रष्टाचार से पूर्ण और गन्दी राजनीति और राजनेताओं का त्याग ! सही गलत का फैंसला करने की समझ और हिम्मत से मुकाबला करने की क्षमता का होना ! देश को लूट रहे नेता , धर्म के नाम पर लूट रहे साधू-संत , भगवान का चोला पहनकर मासूम बच्चियों -महिलाओं के साथ घृणित कार्य करने वाले ढोंगी -पाखंडियों , ऊंचे पदों पर बैठे घूसखोर आला अफसरों और अधिकारिओं के खिलाफ एकजुट होकर सजा दिलाने का संकल्प लेना होगा ! अपने यार दोस्त - मित्र सहपाठियों को गलत कार्य करने  से रोकने के लिए प्रेरित करना होगा ! हमें सोचना होगा और कार्य करना होगा ! हम युवा ही इस देश की दशा और दिशा बदल सकते हैं ! युवा साथियों आगे बढ़ो और अपने घर -परिवार , समाज और देश के लिए कुछ करो ....... अपनी उपस्थिति अच्छे कामों में दर्ज कराएँ !

मैं अपने सभी युवा साथियों को युवा दिवस की बहुत बहुत बधाई ..... शुभकामनाएं देता हूँ !


" युवा दिवस १२ जनवरी २०१४ "  

धन्यवाद 

Tuesday, December 31, 2013

नव-बर्ष हम सभी के लिए शुभ-मंगलमय हो ( Happy New Year 2014 ) …… >>> संजय कुमार

सर्व-प्रथम सभी  साथियों को एवं परिवार के सभी सदस्यों को नवबर्ष 2014 की हार्दिक बधाई , ढेरों अनेकों शुभ-कामनाएं ! आने वाला बर्ष आप सभी के जीवन में नयी उमंग-तरंग और ढेर सारी खुशियाँ लेकर आये ! आप सभी परिवार सहित स्वस्थ्य रहें, मस्त रहें , एवं सफलता के सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंचे ! गुजरे साल के अच्छे और  खुशनुमा पलों को याद कर , बुरे वक़्त को भुलाकर , आने वाले नवबर्ष २०१४ का स्वागत करें  ! अच्छे पलों को याद करते हुए आगे बढ़ें जो हमें उत्साहित करते हैं और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं ! हमें अपनी पिछली गलतियों से सबक लेना होगा , अपनी भूलों को सुधारना होगा , अपने अनुभवों और ज्ञान को बांटना होगा , आने वाले बर्ष में सफलता अर्जित करने के लिए तत्पर रहना होगा , आदर्श स्थापित करना होंगे कदम - कदम पर चुनौतियाँ हमारा रास्ता रोकेंगी और हमें उनका सामना और समाधान बड़ी ही सूझ-बूझ और कड़े परिश्रम से करना  होगा ! हमें अपने आपको पूर्ण बनाने के लिए , व्यक्तित्व में निखार लाने के लिए हमें अपने जीवन में अपने कुछ सिद्धांत बनाने होंगे और उन पर सिद्धांतों का पालन करने के लिए पूर्ण  ईमानदारी के साथ द्रण रहना होगा ! आज हमारे देश में जो हालात हैं , हम जिस वातावरण में अपना जीवन-यापन कर रहे हैं वहां पर अब हमें ज्यादा सतर्क , सचेत और होशियार रहना होगा तभी हम सब सलामत और सुरक्षित हैं ! 


आप सभी परिवार सहित इस नव-बर्ष २०१४  का स्वागत कीजिये , 

एक बार फिर से आप सभी को नवबर्ष की ढेरों -अनेकों शुभ-कामनाएं 

धन्यवाद 

संजय कुमार & गार्गी चौरसिया 
देव & कुणाल  

Friday, November 15, 2013

हाँ ..हाँ ...हाँ मैं लवगुरु " अ धर्मात्मा " हूँ कोई शक ………( व्यंग्य ) ....... >>> संजय कुमार

अभी २  महीने पहले की ही बात है ! एक टीव्ही न्यूज चैनल  साउथ के किसी बाबा मतलब आज के आधुनिक संत की धोती फाड़ने में लगा हुआ था ! अब धोती तो फटनी ही थी क्योंकि उसमें आम जनता की मेहनत की कमाई का करोड़ों अरबों का माल जो छुपा रखा था और अब जो " बाबा " की धोती फटी तो अब रुकने का नाम ही नहीं ले रही है ! क्या करें ये तो इस देश का  दुर्भाग्य ही है जो इस  देश की जनता को हर किसी ने जी भरकर लूटा , चाहे फिर वो  सोनाधारी , भगवाधारी हो या कोई  सफेदपोश ,सब की यही कहानी ! आज देश के सभी साधू संतों को बड़ी ही घृणित द्रष्टि से देखा जा रहा है ! कुछ " बाबा " तो बहुत बुरी तरह डर गए हैं और कह रहे हैं ! आज जहाँ देखो , जिसे देखो हमारे  पीछे हाँथ धोकर नहीं बल्कि नहा -धोकर पीछे पड़ गए  है ! कहीं मेरे खिलाफ जुलुस निकाले जा रहे हैं तो कहीं मुर्दाबाद और हाय- हाय के नारे लगाये जा रहे हैं ! कोई मेरे खिलाफ " फाँसी "  की मांग कर रहा है तो कोई अन्य तरीकों से मुझे घेरने की हर तरफ से बदनाम करने की नाकाम कोशिश में लगा हुआ है ! आखिर कब तक हम जैसे " अ धर्मात्मा " लोगों को परेशान किया जाता रहेगा  ? आखिर हमारा कसूर क्या है ? आखिर हम भी इंसान है ( कामवासी  ) हमें भी खुली हवा में सांस लेने का अधिकार है ! आज पूरा देश हमें नफरत भरी निगाहों से देख रहा है क्यों ? इसलिए की हम सच को स्वीकार नहीं कर रहे हैं ! मैं आज इस देश की अवाम से एक बात खुलकर कहना चाहता हूँ कि , आप लोग हमें घ्रणा की द्रष्टि से ना देखें .... हम  अब रोज रोज की बातों और सबूतों को सुन-सुनकर तंग आ चुके हैं , इसलिए  मैं आज सब कुछ स्वीकार करने को तैयार हूँ ! हाँ ... मैं कोई साधू संत नहीं हूँ मैं तो वो हूँ जो धर्म के नाम पर आपको बेबकूफ बनाता रहा,  सच कहूं तो इस देश की जनता है ही बेबकूफ  और भोली जो सदा लुटने को तैयार रहती है , अगर मैंने लूट लिया तो क्या गलत किया ! आज  कलियुग  के  " राम " से तो यही " आशा " की जा सकती है ! आज कोई " नारायण " बनकर तो कोई " साईं " बनकर लूट रहा है ! आखिर इस देश के नेता भी तो अपने पूरे कुटुंब के साथ इस देश को लूट रहे हैं फिर मेरे ही पीछे ही क्यों सभी हाँथ धोकर पीछे पड़ गए ! मैं कोई पहला और आखरी तो नहीं हूँ जिसने ऐसा किया हो , पहले भी कई पकडे गए हैं और जो नहीं पकडे गए वो भी कभी ना कभी पकड़ में आ ही जायेंगे ! ये तो मेरे बुरे दिन थे जो इस उम्र में आकर ये सब देखना पड़ा  ! अब अगर पकड़ा भी गया तो क्या हुआ कम से कम मेरी उम्र का तो लिहाज करो , मेरे द्वारा दिए गये धर्म उपदेशों को तो याद करो ! अगर मेरे उपासक ऐसे ही मेरे खिलाफ झूँठे प्रमाण देते रहे तो मुझे मजबूरी बस सब कुछ स्वीकार करना होगा और ये बात स्वीकार करते हुए मेरे मन में किसी भी प्रकार की कोई आत्मग्लानि नहीं होगी और यही 100%  सत्य है जो आप सबके सामने आ रहा है ! आज मेरी मदद को कोई भी नहीं आ रहा है ! जो बड़ी - बड़ी हस्तियां कभी मेरे पैरों पड़ी रहती थीं वो भी सब मुझे भूल गए हैं ! अब समझ में आया कि , ये खादीधारी नेता किसी के नहीं होते , वर्ना किसी की मजाल थी जो मुझे कोई हाँथ भी लगा पाता ! सब कुछ चल रहा था ना अब तक !  
कल ही " बाबाजी " के एक खास ने मुझे ये  सारी बातें और कई रहस्यों से पर्दा उठाया और ये राज की बातें सुनाते वक़्त वह बहुत ही उदास था और  उसकी उदासी और पीड़ा को देखते हुए मुझे ऐसा लगा कि , मुझे इस दुखी " बाबा " की बात आप तक अवश्य पहुंचानी चाहिए ! ये बात वो भी आप लोगों तक पंहुचा सकता था किन्तु उसने मुझसे कहा  " शायद मेरी इस बात को आप लोग राजनीति का कोई नया पैंतरा ना समझें " इसलिए उसने ये बात मेरे समक्ष रखी ! आजकल हमारे देश में चारों तरफ जहाँ देखो वहां सिर्फ भ्रष्टाचार और घोटाले ही छाये हुए हैं ! सुबह सुबह जब अखबार खोलकर देखो तो एक नया घोटाला , टेलीविजन पर न्यूज़ में हर वक्त घोटाला और भ्रष्टाचार इसके अलावा इस देश में अब कुछ नहीं चलता ! किन्तु अब भ्रष्टाचार की बात कोई नहीं कर रहा है ! क्योंकि हमाम में तो सब नंगे होते हैं ! आजकल तो चारों ओर " बाबा " राहुल बाबा " भगवान का रिटायरमेंट ( सचिन ) बस यही छाया हुआ है ! आजकल जितना कुछ " बाबाओं " को सहना और सुनना पड़ रहा है शायद ही किसी और को इतना सहना और सुनना पड़ रहा हो ! आज हर जगह उनको बुरी नज़र से देखा जा रहा है ! कोई भी कभी भी उनसे कुछ भी पूंछने लगता है , सवालों की बौछार कर दी जाती है ! जब देखो तब उनको बिना बात के परेशान किया जाता है ! बाबा  थक गए हैं जबाब देते देते ! आज बाबाओं  की हालत देखकर मेरा मन भी दुखी हो जाता है ! जब मैं उनकी दुःख तकलीफ को देखता हूँ तो मुझे बहुत बुरा लगता है मुझसे रहा नहीं जाता ! क्यों उनके साथ ऐसा बुरा व्यव्हार हो रहा है ? जब मैंने एक और बाबा से उसके धंधे मतलब  " बाबागिरी " के बारे में  पूंछा तो उसने मुझे बताया ...... " अगर मैंने कुछ  गुनाह कर भी दिया तो वो मेरी " मजबूरी " थी क्योंकि मैं इस कलियुग का लवगुरु  मतलब धर्मगुरु हूँ , सच्चे और असली धर्मगुरु तो पुराणों में हुआ करते थे !.और यदि मैंने कोई गलती कर भी दी  है तो उसे जाने भी  दो , ऐसा किसने कह दिया कि आप हमें इंसान ही ना समझें !
मैं देश के सभी " बाबाओं " से आग्रह करूंगा कि , आपको अब किसी से कुछ छुपाने की या डरने की कोई जरुरत नहीं है सच को स्वीकार कर लो ! कहावत तो सुनी होगी " इश्क़ और मुश्क " छुपाये नहीं छुपते एक दिन बाहर आ ही जाते हैं ! इसलिए धर्म की आड़ लेकर धर्म और सच्चे " गुरुओं "  को बदनाम ना करो , पाप का घड़ा जब भरता है तो फूटता ही है ! कहावत भले ही कितनी पुरानी  हो पर १००% सच्ची है !

धन्यवाद