Monday, December 31, 2012

नवबर्ष हम सभी के लिए शुभ हो ......>>> संजय कुमार

सर्व-प्रथम मैं अपने सभी साथियों को  एवं परिवार के सभी सदस्यों को , इस देश की अवाम को नवबर्ष 2013 की हार्दिक बधाई , ढेरों अनेकों शुभ-कामनाएं देता हूँ ! बर्ष 2013 आप सभी के जीवन में नयी उमंग-तरंग और ढेर सारी खुशियाँ लेकर आये ! आप सभी परिवार सहित स्वस्थ्य रहें, मस्त रहें , एवं सफलता के सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंचे ! हमें बीते  साल के अच्छे और खुशनुमा पलों को याद कर और  बुरे पलों  को भुलाकर इस आने वाले नवबर्ष का स्वागत करना होगा ! हम  अपने बीते बर्ष के उन अच्छे पलों को याद करते हुए आगे बढ़ें जो हमें उत्साहित करते हैं और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं ! हमें अपनी पिछली गलतियों से सबक लेना होगा , अपनी भूलों को सुधारना होगा , अपने अनुभवों और ज्ञान को बांटना होगा , आने वाले बर्ष में सफलता अर्जित करने के लिए तत्पर रहना होगा , आदर्श स्थापित करना होंगे ......... कदम - कदम पर चुनौतियाँ हमारा रास्ता रोकेंगी और हमें उनका सामना और समाधान बड़ी ही सूझ-बूझ और कड़े परिश्रम से करना  होगा ! हमें अपने आपको पूर्ण बनाने के लिए , व्यक्तित्व में निखार लाने के लिए हमें अपने जीवन में अपने कुछ सिद्धांत बनाने होंगे और उन पर सिद्धांतों का पालन करने के लिए पूर्ण  ईमानदारी के साथ द्रण रहना होगा ! आज हमारे देश में जो हालात हैं , हम जिस वातावरण में अपना जीवन-यापन कर रहे हैं वहां पर अब हमें ज्यादा सतर्क , सचेत और होशियार रहना होगा तभी हम सब सलामत और सुरक्षित हैं ! 


आप सभी परिवार सहित इस नव-बर्ष २०१3 का स्वागत कीजिये , 

एक बार फिर से आप सभी को नवबर्ष की ढेरों -अनेकों शुभ-कामनाएं 

धन्यवाद 
संजय कुमार चौरसिया 
गार्गी चौरसिया 
देव & कुणाल  


Wednesday, December 26, 2012

करो होंसले बुलंद , आवाज बुलंद ........>>> गार्गी की कलम से

फूल बनने से पूर्व ही 
बिखर जातीं हैं कलियाँ ,
मिल जाते हैं रावण 
हर घर , हर गलियां
ना जाने कितनी लड़कियों को 
पलकों से ढँक आँखें ,
रोते देख लो ,
झेंपती, उस मासूम को 
माँ की गोद में लिपटी 
सिसकती देख लो !
झूठी इज्जत की चादर से 
घर को क्यों ढंकती हो ?
अन्यायी , निर्दयी समाज से 
क्यों डरती हो ?
विश्वास और सुरक्षा ही 
छीन ली गयी हो तब 
क्या खोने से डरती हो ?
करो संचय अपने में 
नयी शक्ति का ,
करो होंसले बुलंद , आवाज बुलंद 
करो विरोध इसका 
राम नहीं आयेंगे ,
है इन्तजार बेकार 
करना होगा तुम्हें ही 
रावण का संहार !
तब ही बच पाएंगी 
बगीचे की कलियाँ ,
बन पाएंगी सुगंध बिखेरती 
फूल , तारो ताजा 
करो होंसले बुलंद .............. करो होंसले बुलंद 

प्रिये पत्नी गार्गी की कलम से )

धन्यवाद 

Tuesday, December 18, 2012

खत्म होते घर - आँगन ..........>>> संजय कुमार

घर - आँगन , घर -परिवार , रिश्ते-नाते और हमारे संस्कार बदलते समय के साथ  धीरे - धीरे बदलते जा रहे हैं ! अब हमारे घर- परिवार में वो बात नहीं रही जो पहले कभी हुआ करती थी ! पहले हम घर-परिवार से जाने जाते थे और अब ....?  कहा जाता  हैं एकता में जो शक्ति है वो किसी अकेले इन्सान में नहीं होती और ये  बात बिलकुल सही है क्योंकि  हमने अपनी आँखों से एकता , एकजुटता की शक्ति को देखा है ! फिर चाहे वह युवा संगठन हो या फिर " अन्ना " का समर्थन करने वालों का संगठन, हम सब इसकी ताक़त को जानते हैं और हमारे देश की सरकार भी एकता की ताकत से भली-भांति परिचित है ! किन्तु मैं यहाँ बात कर रहा हूँ, अपने पारिवारिक संगठन की, या संयुक्त परिवार की जो अब नाम के बचे हैं ! एक समय था जब हम किसी के घर जाते थे , तो वहां पर हमारी मुलाकात एक ही परिवार के कई  सदस्यों से होती थी ! घर में मौजूद घर का सबसे मजबूत स्तम्भ जिस पर पूरा घर-परिवार टिका हुआ होता है  और वो हैं उस घर के बुजुर्ग दादाजी -दादीजी , अगर ये नहीं होते तो ऐसा लगता है जैसे हमें सही राह दिखाने वाला कोई  नहीं है ! दूसरा मजबूत स्तम्भ माता -पिता जो जीवनभर अपने बच्चों के साथ रहना चाहते हैं ,किन्तु अब ऐसा समय आ गया है कि , आज के बच्चे ही अपने माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहते ! माता -पिता उन्हें किसी बंदिश से कम नहीं लगते ! आज घर-घर में , हर घर में चार बर्तन खनकने की आवाजें तेज होती जा रही हैं ! हर इंसान के साथ माता-पिता का साथ  लम्बे समय तक होना अत्यंत जरुरी होता है ! जिन लोगों के लिए माता -पिता बोझ होते हैं उन्हें ये मालूम होना चाहिए  जिनके सिर पर माता-पिता का साया नहीं रहता वो बच्चे या तो बहुत अच्छे बनते हैं या फिर  ? .. वहीँ अन्य रिश्तों में  चाचा-चाची,भैया-भाभी ऐसे  कई रिश्ते एक ही परिवार में देखने को मिलते थे जिनसे कोई भी घर एक परिवार बनता है ! ऐसे परिवार में जाने से ,उनसे मुलाकात करके मन को एक अनूठी ख़ुशी मिलती है  और ऐसे परिवार से मिलता है घर का प्यार , अपनापन, मान-सम्मान , और सच्चे रिश्तों की महक ! किन्तु  जैसे जैसे समय तेजी से गुजर रहा है और जब से  इन्सान अपने आप से मतलब रखने लगा है, सिर्फ अपने बारे में सोचने लगा है , परिवार के अन्य सदस्यों की  परवाह नहीं उनके लिए मान- सम्मान नहीं तो ऐसी स्थिति में  शुरू हो जाता है  विघटन और वदलाव उस परिवार की एकता में  ! आज की भागमभाग में अगर इंसान के पास कुछ नहीं है तो वो है सब्र और संयम , जो किसी भी इंसान की सबसे बड़ी ताक़त होती है ! किन्तु आज हम देख रहे हैं कि , इंसान आज कितनी जल्दी अपना सब्र खो देता  है , जिस कारण से आये दिन घर परिवार में लड़ाई झगडे की स्थिति बन रही है और यही स्थिति आयेदिन होने वाले  झगड़ों के कारण इंसान अपनों से अपने परिवार से दूर होता जा रहा है या मजबूरी बश अपने ही घर परिवार के बीच दीवारें खींच रहा है ! जब किसी परिवार के बीच दीवारें खींचती है तो क्या स्थिति होती है  उस घर परिवार की ?  एक बड़ा सा घर बदल जाता है  चिड़ियों के छोटे-छोटे घोंसलों के जैसा , जिसे हम घर नहीं  पत्थर से निर्मित एक मकान कहते हैं ! आज इस  विघटन और वदलाव से हमारा कितना अहित हो रहा है  शायद हम  यह सब जानते है फिर भी   जानकार अनजान हैं ! हमें परिवारों में हुए विघटन और वदलाव का असर अब देखने को मिल रहा है !  अपने बच्चों में क्षीण होते संस्कार के रूप में , माता -पिता के खोते हुए सम्मान के रूप में , वदलती रिश्तों की परिभाषा और उनकी महक के रूप में , खत्म होती अपनों के प्रति अपनत्व की भावना के रूप में , पथभ्रष्ट होती युवा पीढ़ी के रूप में , और ये सब कुछ हुआ हमारे घर - परिवार के बंटने से उनके बीच मनमुटाव की दीवार से ! जब से इंसान ने अकेले रहना शुरू किया  है , सिर्फ अपने बारे में सोचा है  तब से वदल गयी हर  घर - परिवार की  कहानी ! आज घर - परिवार की बात करना बड़ी बेमानी सी लगती है ...... और ऐसा लगता है जैसे हमें अपना जीवन सिर्फ अपने लिए जीना है ...... किन्तु जब हम अपने भरे - पूरे परिवार के साथ बिताये लम्हों को याद करते हैं तो मन बड़ा ही दुखी होता है और महसूस होता है कि , जो मजा अपनों के साथ है वो अकेले में नहीं ....... किन्तु आज ये संभव भी तो नहीं है क्योंकि माता-पिता अपना घर नहीं छोड़ना चाहते और बच्चों को अपना भविष्य बनाने के लिए घर से बाहर निकलना ही होता है ....... क्या उचित है क्या अनुचित , क्या सही है क्या गलत ?  इस बात का जबाब शायद ही किसी के पास हो , सभी के पास अपने - अपने तर्क हैं जिन पर बहस करना बेकार है ! फिर भी एक कटु सत्य हमारे सामने हैं , और वो ये है की ....... हमारे घर-आँगन खत्म हो गए या फिर आज बदल रहे हैं  छोटी छोटी कोठरियों में 

गुजारिश  :-- कोशिश करें ना खत्म करें अपने घर - आँगन , ना निर्मित होने दें अपने घर - आँगन कोठरियों में  

धन्यवाद 

Saturday, December 8, 2012

हाँ .. हाँ ... हाँ .... मैं भ्रष्टाचारी हूँ ( व्यंग्य ) ........>>> संजय कुमार

जब देखो , जहाँ देखो , जिसे देखो आज  मेरे पीछे हाँथ धोकर नहीं बल्कि नहा -धोकर पीछे पड़ा है ! कहीं मेरे खिलाफ जुलुस निकाले जाते हैं तो कहीं नारे लगाये जाते हैं ! कोई मेरे खिलाफ " लोकपाल " की मांग कर रहा है तो कोई अन्य तरीकों से मुझे घेरने की नाकाम कोशिश में लगा हुआ है ! आखिर कब तक हम जैसे लोगों को परेशान किया जाता रहेगा  ? आखिर हमारा कसूर क्या है ? आखिर हम भी इंसान है ( ऐसा हम सोचते हैं ) हमें भी खुली हवा में सांस लेने का अधिकार है ! आज पूरा देश हमें नफरत भरी निगाहों से देख रहा है ( सिर्फ दुखी,पीड़ित और मजबूर लोग ) क्यों ? इसलिए की हम सच को स्वीकार नहीं कर रहे हैं ! मैं आज इस देश की अवाम से एक बात खुलकर कहना चाहता हूँ कि , आप लोग मुझे घ्रणा की द्रष्टि से ना देखें ....... मैं अब रोज की बातों को सुन-सुनकर तंग आ चुका हूँ , इसलिए  मैं आज सब कुछ स्वीकार करने को तैयार हूँ ! हाँ .. हाँ ... हाँ .... मैं भ्रष्टाचारी हूँ और ये बात स्वीकार करते हुए मेरे मन में किसी भी प्रकार की कोई आत्मग्लानि नहीं है , और यही 100% सत्य है ! .....  ये सारी बातें कल ही मुझे एक भ्रष्टाचारी ने अपने मुखमंडल द्वारा सुनाई , और ये सारी बातें सुनाते वक़्त वह बहुत ही उदास था ! उसकी उदासी और पीड़ा को देखते हुए मुझे ऐसा लगा कि , मुझे इस दुखी भ्रष्टाचारी की बात आप तक अवश्य पहुंचानी चाहिए ..... ये बात वो भी आप लोगों तक पंहुचा सकता था किन्तु उसने मुझसे कहा " शायद मेरी इस बात को आप लोग राजनीति का कोई नया पैंतरा ना समझें " इसलिए उसने ये बात मेरे समक्ष रखी ! ......आजकल हमारे देश में चारों तरफ जहाँ देखो वहां सिर्फ भ्रष्टाचार और घोटाले ही छाये हुए हैं ! सुबह सुबह जब अखबार खोलकर देखो तो एक नया घोटाला , टेलीविजन पर न्यूज़ में हर वक्त घोटाला और भ्रष्टाचार इसके अलावा इस देश में अब कुछ नहीं चलता ! आजकल जितना कुछ भ्रष्टाचारियों को सहना और सुनना पड़ रहा है शायद ही किसी और को इतना सहना और सुनना पड़ रहा हो ! आज हर जगह उनको बुरी नज़र से देखा जा रहा है ! कोई भी कभी भी उनसे कुछ भी पूंछने लगता है , सवालों की बौछार कर दी जाती है ! जब देखो तब उनको बिना बात के परेशान किया जाता है ! भ्रष्टाचारी थक गए हैं जबाब देते देते ! आज भ्रष्टाचारियों की हालत देखकर मेरा मन भी दुखी हो जाता है ! जब मैं उनकी दुःख तकलीफ को देखता हूँ तो मुझे बहुत बुरा लगता है मुझसे रहा नहीं जाता ! क्यों उनके साथ ऐसा बुरा व्यव्हार हो रहा है ? जब मैंने एक भ्रष्टाचारी से पूंछा तो उसने मुझे बताया ...... " अगर मैंने भ्रष्टाचार किया तो कौन सा गुनाह या अपराध कर दिया , और यदि गुनाह कर भी दिया तो वो मेरी " मजबूरी " थी ......... और पूरी दुनिया में लोग मजबूरी में कुछ ना कुछ गलत करते ही है,  और यदि मैंने भी कोई गलती कर भी दी  है तो उसे जाने भी  दो , ऐसा किसने कह दिया कि आप हमें इंसान ही ना समझें ! आप तो जानते हैं मैं बीबी , बच्चों वाला हूँ , मेरा परिवार काफी बड़ा है ... सभी की जिम्मेदारी भी मुझ पर ही है ...... मेंहगाई के इस दौर में  मेरी तनख्वाह इतनी नहीं है कि , जिससे मैं अपने परिवार के लिए कुछ कर सकूँ ...... देश में मंहगाई आज अपनी चरम सीमा को तोड़ रही है , ऐसे में हमारे घरों में चूल्हा तो जलता है पर उस पर पकाने को कुछ नहीं है ....... आप तो जानते हैं , हमारी सरकार के पास वादे तो है किन्तु रोटी नहीं है , जमीन है पर घर बनाने के लिए ईंट , पत्थर और सीमेंट नहीं ,और सच तो यही है कि , इंसान को जीने के लिए रोटी और रहने के लिए घर तो चाहिए ही ...... ईमानदारी से या फिर बेईमानी से ...... अब ऐसी स्थिति में , मैं क्या कर सकता हूँ ? बच्चों की अच्छी शिक्षा , बेटी का विवाह , बूढ़े माता-पिता को " चारधाम " की यात्रा , अपने लिए कार , पत्नी के लिए सोने का हार मैं कैसे दे सकता हूँ ?  इसलिए मैं बेईमानी करता हूँ , घूस लेता हूँ और भ्रष्टाचार फैलाता हूँ ! जब मैं ईमानदारी से काम करता हूँ तो हर जगह से ठुकराया जाता हूँ , बेईमानों के बीच में , मैं अकेला आखिर क्या कर सकता हूँ ? ईमानदार होने पर भी मुझे भ्रष्टाचारी ही समझा जाता है ! इसलिए मैंने अब ठान लिया है कि , जब मैं रिश्वत लेता हूँ, बेईमानी करता हूँ , और घोटाले भी करता ही हूँ तो ये स्वीकार कर लेने में आखिर बुराई ही क्या है की मैं  भ्रष्टाचारी हूँ  ? ........  बेईमानी एक रूपए की हो या एक लाख की , बेईमान तो कहलाऊंगा ही  फिर इस सच को स्वीकार करने में हर्ज ही क्या है ! वैसे भी बेईमान , भ्रष्टाचारी और घोटालेबाजों का आजतक इस देश में क्या हुआ है ? जैसे एक आम आदमी रहता है ठीक वैसे ही एक बेईमान .... किन्तु डरा हुआ कि कहीं कोई भ्रष्टाचारी न कह दे !

मैं देश के सभी भ्रष्टाचारियों से आग्रह करूंगा कि , आपको अब किसी से कुछ छुपाने की या डरने की कोई जरुरत नहीं है ! फक्र से कहों  .......... हाँ .. हाँ ... हाँ .... मैं भ्रष्टाचारी हूँ ...

धन्यवाद 

Saturday, December 1, 2012

मैं खुशियाँ खरीद लाया ......>>> संजय कुमार

जिस तरह " पैसे " पेड़ों पर नहीं उगते , ठीक उसी प्रकार खुशियाँ भी किसी पेड़ पर नहीं उगती और ना ही बाजार में मिलती हैं कि , जिन्हें बाजार से खरीदा जा सके ...... फिर सवाल उठता है कि , खुशियाँ कहाँ से मिलती हैं ? ऐसा क्या किया जाय जिससे खुशियाँ हांसिल की जा सकें ! हर इंसान के जीवन में  खुशियों का अपना अलग महत्व होता है ... कोई नौकरी पाकर खुश है तो कोई छोकरी , कोई नेता बनकर  खुश है तो कोई अभिनेता ,  कोई KBC में जाकर खुश है , तो कोई वहां से आकर , कोई व्यापार से खुश है तो कोई सरकार ( उत्तर प्रदेश ) बनाकर खुश है ! बच्चे कार्टून देखकर खुश हैं तो सरकार " कार्टूनिस्ट " को हवालात में बंद कर ! " कसाब " जैसे आतंकवादी को फांसी होने पर पूरा देश खुश है ( देश के गद्दार शायद दुखी हों ) !  खैर खुशियाँ तो अनेकों प्रकार की होती है ... सुख और दुःख हर इंसान के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है , किन्तु इस हिस्से में दुःख का पलड़ा हमेशा ज्यादा भारी होता है और थोड़ी सी ख़ुशी पाने के लिए इंसान अपना पूरा जीवन " जीवन की आपाधापी " में निकाल देता है ! ( सिर्फ देश के गरीब , बेरोजगार और आम नागरिकों के लिए जिनके लिए खुशियों के मायने सिर्फ पैसा है और वो पैसों को ही खुशियों का साधन मानते हैं ) हालांकि पैसा आज हर किसी की जरुरत है और  सभी को जरुरत से ज्यादा चाहिए भी ...... ( इंसान के पास कितना भी पैसा हो उसे उससे कहीं अधिक की ही चाहत होती है ) .. क्योंकि पैसा है तो सब कुछ है !  फिर भी इस बात को कुछ लोग पूरी तरह से  नकार देते हैं कि , पैसा ही सब कुछ नहीं होता ..... खुशियाँ पाने के लिए पैसे की जरुरत नहीं पड़ती ... उसके लिए हमें ये करना चाहिए , वो करना चाहिए,  तो फिर खुशियाँ अपने आप आपके पास खिंची चली आएँगी ! इसके लिए हमें तर्क दिए जाते हैं कि , ...... हमें संयुक्त परिवार में रहना चाहिए , हमें ज्यादा से ज्यादा वक़्त अपने परिवार के साथ विताना चाहिए , हमें अधिक की चाह ना रखते हुए थोड़े में संतोष करना चाहिए ! एक दुसरे के प्रति आदर , विश्वास होना चाहिए , हमें अपनी आवश्यकताएं कम करनी  चाहिए ...  हमें मशीनों की तरह काम नहीं करना चाहिए , पैसे की जगह इंसान को महत्व देना चाहिए ,.... इत्यादि ,! इन दिए हुए तर्कों को यदि हम अपने जीवन में अपनाते हैं तो शायद आप खुशियाँ हांसिल कर सकते हैं  ! किन्तु इन बातों को सोचने और करने के लिए " वक़्त " चाहिए जो आज किसी के पास नहीं है , क्योंकि हम सब पैसा कमाने में लगे हुए हैं , क्योंकि हम ये बात जानते हैं यदि पैसा नहीं कमाएंगे तो कुछ भी हांसिल नहीं कर सकते ! बिना पैसे हम अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे सकते उनको इंजिनियर , डॉक्टर , एक्टर , कलेक्टर नहीं बना सकते ! हम अपने बच्चों की शादी बड़ी ही धूम-धाम से नहीं कर सकते ! अच्छा जीवन-यापन करने के लिए एक अच्छा घर होना बहुत जरुरी है , एक कार , मोबाइल , कंप्यूटर आदि भी हो तो बहुत अच्छा है ! और इसके लिए सबसे ज्यादा पैसे की जरुरत होती है , यदि हम ये सब अपने परिवार को देते हैं तो शायद वो खुश होंगे ? जिस तरह  एक अंधे व्यक्ति के लिए आँखें मिलना उसके लिए सबसे बड़ी ख़ुशी होती है ठीक उसी प्रकार एक रोजमर्रा काम कर अपना जीवन- यापन करने वाले व्यक्ति के लिए पैसा ही उसकी सबसे बड़ी ख़ुशी होती है ! हम कितने भी तर्क दें किन्तु सत्य तो यही  है कि , इंसान का पूरा जीवन सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने पर ही केन्द्रित होता है क्योंकि हम जानते हैं आज बिना पैसे जीवन संभव नहीं है ! एक आम आदमी ( गरीब , प्रतिदिन मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का भरण - पोषण करने वाला ) जब अपने परिवार की छोटी - छोटी ख्वाहिशों को पूरी करता है और उस वक़्त जो ख़ुशी और सुकून उसे मिलता है तो वो उस पल को हर बार जीना चाहता है ! और ये ख़ुशी उसे तभी मिलती है जब उसके पास पैसा होता है ! 
परिवार को खुश देखकर वो अपने मन में सोचता है ........ मैं खुशियाँ खरीद लाया !

धन्यवाद   

Friday, November 23, 2012

अब मुझे भी डर लगने लगा है ! क्या आपको भी ? ........>>> संजय कुमार

क्या एक आम इंसान जीने के लिए साँस भी नहीं ले सकता ? क्या एक आम इंसान इस आजाद देश में आजादी के साथ विचरण भी नहीं कर सकता ? क्या एक आम इंसान अपनी भावनाएं भी व्यक्त नहीं कर सकता ? फिर क्या है अभिव्यक्ति की आज़ादी ? आज ऐसे सेकड़ों सवाल हमारे मन में दिन-प्रतिदिन उठते हैं और जिनका जबाब शायद ही किसी के पास हो , अगर किसी के पास जबाब होता भी है तो बही सब रटा - रटाया जबाब , आप आजाद देश के नागरिक हैं ! आपको अपनी बात कहने  , रखने का पूर्ण अधिकार है ! जो अधिकार एक अमीर के होते हैं बही अधिकार एक गरीब और एक आम आदमी के भी होते हैं ! हम सब एक है ! हम सभी धर्मों को एक सामान द्रष्टि से देखते हैं , इत्यादि ! ऐसा सुनने और कहने  में तो अच्छा तो लगता है किन्तु वास्तविकता इससे कहीं अलग - थलग होती है ! आज जो सुलूक एक आम आदमी के साथ हो रहा  है वो हम सब अच्छे से देख , सुन और सह रहे हैं ! कोई भ्रष्टाचार का घिनौना चेहरा उजागर करने के लिए कार्टून बना कर अपनी अभिव्यक्ति व्यक्त करता है तो उस पर " राष्ट्रद्रोह " का मुकदमा  ठोक दिया जाता है , संविधान का अपमान कहा जाता है ! सोशल साईट " फेसबुक " पर कोई अपनी बात कहता है और कोई दूसरा उसका समर्थन करता है तो ये कानून की नज़र में गुनाह हो जाता है और  बिना सोचे - समझे उस व्यक्ति को हवालात की हवा खिला दी जाती है ! जी ऐसा कुछ नहीं है , ऐसा जिन लोगों के साथ होता है वो होते हैं आम लोग , वो आम लोग जो ऊंचे और रसूखदार लोगों की नज़रों में सड़क पर रेंगने वाले किन्ही कीड़े - मकौड़े से कम नहीं होते ! अगर मैं गलत हूँ तो फिर आज तक कोई भी बड़े नेता को या फिर किसी रसूखदार को उसके गलत बयान या गलत हरकत के लिए हवालात के अन्दर क्यों नहीं डाला गया ? क्या उन्होंने कभी कुछ गलत नहीं बोला या गलत नहीं किया ? आज हमारे देश में राजनेता और राजनीति किस दर्जे की हो गयी है ये बात तो आज बच्चा - बच्चा जानता है ! किस तरह इस देश के वरिष्ठ नेता और मंत्री अपने घटिया बयानों से इस देश में रहने वाले लोगों की  मान- मर्यादा और  संस्कारों को नुक्सान पहुंचाते है , फिर भी उनके साथ कोई बुरा सुलूक नहीं किया जाता , बल्कि यदि कोई आम आदमी ऐसा करदे तो समझ लीजिये उसने अपने जीवन का सबसे बड़ा गुनाह कर दिया हो जिसके लिए सारे कायदे- कानून हों और वो उन्ही पर लागू होने के लिए बने हों ! क्यों ऐसा कभी भी नेता , मंत्री या बड़े लोगों के साथ नहीं किया जाता ?  क्योंकि वो आम आदमी नहीं इस देश का भगवान है ? अगर एक आम आदमी की आजादी का यही मतलब है तो फिर मेरी नज़र में , अंग्रेजों से आजाद होने के लिए हजारों - लाखों लोगों द्वारा इस देश के लिए दी गयी कुर्बानियां बेकार है ! देश के हर व्यक्ति की आजादी के लिए लड़ाईयां लड़ी गयीं और जब देश आजाद हुआ तो हर हिनुस्तानी आजाद हुआ चाहे वो अमीर हो या गरीब , नेता हो या साहूकार , आजादी सभी के लिए है ! 
हम कुछ भी कहें हर हाल में मरना आम आदमी का ही है ! आज जिस तरह का माहौल हमारे आस-पास निर्मिंत है उसमें आपको " गांधीजी " के तीन बंदरों की तरह ही व्यवहार करना है ! ना आपको गलत के खिलाफ बोलना है , गलत होते हुए यदि देख रहे हो तो अपनी आँखे बंद कर लो , कभी भी अपने जमीर की आवाज को ना सुनें ! आज ऐसा हो रहा है ! आज एक आम इंसान इतना डरा हुआ है , उसे समझ नहीं आता कि , क्या सही है और क्या गलत ! हो सकता है मैं जिस बात को अपने मन की बात कह रहा हूँ , हो सकता है वो सरकार की नजर में गुनाह हो !
मैं भी एक आम आदमी हूँ और अब मुझे भी डर लगने लगा है ! क्या आपको भी ..?

धन्यवाद   

Thursday, November 15, 2012

वो शादी का घोड़ा है ... और ये गिरगिट .........>>> संजय कुमार

हमारे देश की विपक्षी पार्टी के जानेमाने , बड़बोले नेताजी ने अपने एक भाषण के दौरान केंद्र सरकार चलाने वाले युवराज को " शादी का अड़ियल घोड़ा " तक कह दिया , अब विवाद तो होना ही है ! अगर विवाद नहीं होगा तो फिर विपक्ष की ताक़त तो खत्म समझो ... खैर ये तो हमारे और देश के लिए अब  रोज की बात है ! एक दिन ऐसा आएगा जब कोई नेता किसी दुसरे नेता को सुअर और कुत्ता तक कह देगा .... अरे भई ये आज की गन्दी राजनीति जो है इसमें सब कुछ जायज है ! मैं कहता हूँ कि , सूअर तो ठीक  है लेकिन कुत्ता तो नहीं हो सकता , क्योंकि कुत्ता तो एक " वफादार " जानवर कहलाता है और  आज के भ्रष्ट नेता तो वफादार नहीं हो सकते ... अगर ऐसा हुआ तो ये कुत्ता बिरादरी उनकी वफ़ादारी का अपमान है और ये बात कुत्ते जरा भी बर्दाश्त नहीं करेंगे ! हम इंसानों की जानवरों से तुलना कोई आज की नयी बात तो है नहीं , ये तो हम जब से पैदा हुए तब से ही सुनते आ रहे हैं ...... मुझे भी कई बार जानवर , पक्षी और पता नहीं क्या - क्या  कहा गया या फिर उनसे तुलना की गयी , हो सकता है आपके साथ भी हुआ हो , अगर नहीं हुआ तो आप असली इंसान कहलाने का हक रखते हैं ! जब बच्चा पैदा होता है तब हम उसकी तुलना " चाँद " से करते हैं फिर भले ही चाँद पर सेंकड़ों दाग धब्बे हों ...... स्कूल में कई बार " मुर्गा " बनाया जाता है , पढ़ाई में कमजोर होने पर टीचर और माँ-बाप " गधा " कहते हैं ज्यादा देर रात तक पढ़ने पर " उल्लू " कहा जाता है ! ज्यादा खा - खाकर मोटा हो गया तो " हांथी " कहा जाता है ........ किसी के काम ना आ सका तो " धोबी का कुत्ता " ........ देश के नेताओं को " गिरगिट " कहा जाता है ......अरबों - खरबों का घोटाला कर अपने आप को पाक-साफ़ बताने वाले नेताओं को  कहा जाता है " सौ सौ चूहे खाके बिल्ली हज को चली " ........... किसी भी स्तर तक गिरने वाले को " सूअर " कहा जाता है ...... तेज दिमाग चलाने वाले को " लोमड़ी " कहा जाता है ! हुडदंग मचाने वाले को " बन्दर " अच्छा गाने वाले को " कोयल " बुरा गाने वाले को कौवा ........ चुस्त , फुर्तीले खिलाड़ियों की तुलना " चीते " से बहादुरों की तुलना " शेर " से की जाती है ! " माँ " की तुलना गौ-माता से की जाती है ...... कभी हम अपनी आस्तीनों में " सांप " पाला करते हैं तो कभी किसी स्त्री को " नागिन " कहते हैं ! आज एक आम आदमी दिन रात गधे-घोड़ों की तरह काम करता है तो कभी मशीन की तरह ! 
हमारे पास ऐसे हजारों उदाहरण हैं जहाँ इंसानों की तुलना जानवरों और पक्षियों से की जाती है ...... ये बात बिलकुल सही है क्योंकि सभी जानवरों , पशु-पक्षियों के गुण हमारे अन्दर विध्यमान हैं ! सच तो ये है कि , हमारे अन्दर का " इंसान " कुछ लोगों में पूरी तरह तो कुछ में आधा खत्म हो चुका  है ! हमारी प्रवत्ति तो जानवरों से भी वद्तर हो गयी है , जब हमारी तुलना जानवरों या अन्य से की जाती है तो ये हमारा अपमान नहीं जानवरों और पशु-पक्षियों का अपमान है ! पिछले कई बर्षों में हम इंसान से जानवर बन गए है , तभी तो आज चारों ओर इंसानियत और मानवता को शर्मसार करने वाले घ्रणित कार्य हो रहे हैं ! जानवरों में कई गुण ऐसे होते हैं जो इंसान के पास है ही नहीं .. और इंसान में इंसानों वाले गुणों का आभाव है !
अब चाहे कोई किसी को शादी का अड़ियल घोड़ा कहे या फिर धोबी का कुत्ता ........ हमें कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हम इंसान कम जानवरों की खूबियों से पूर्ण इंसान है !   आप क्या सोचते हैं .......? 

धन्यवाद 

Monday, November 12, 2012

दीपावली की हार्दिक शुभ-कामनाएं ........>>> संजय कुमार




आप सभी साथियों को , परिवार के सभी सदस्यों को पावन पर्व दीपावली की हार्दिक शुभ-कामनाएं ! यह पर्व आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लाये ! आप सभी , परिवार सहित हर्ष-उल्लास के साथ यह पर्व मनाएं ! यह पर्व आपके जीवन में प्रकाश लाये , आप सपरिवार सहित स्वस्थ्य रहें , मस्त रहें ! धन की देवी " माँ लक्ष्मी " आप पर सदा मेहरबान रहें ! देवी " माँ सरस्वती " की असीम कृपा आप पर बनी रहे ! " श्री गजानन " आपको बल बुद्धि प्रदान करें ! आपका अपने परिवार के साथ असीम प्रेम और स्नेह का भाव जीवन पर्यंत बना रहे !

दीपावली की बहुत बहुत  हार्दिक शुभ-कामनाएं ............

शुभ-कामनाओं सहित


संजय कुमार चौरसिया 
गार्गी चौरसिया 
देव चौरसिया 
कुणाल चौरसिया 

धन्यवाद 

Friday, November 9, 2012

कहीं दीप जले कहीं दिल ........>>> संजय कुमार

जहाँ सुख है वहां दुःख भी है , जहाँ हंसी है वहां गम भी है , गरीबी है तो अमीरी है , धूप है तो छाँव भी है आखिर ये सभी प्रकृति के नियम है , ये प्रकृति का एक ऐसा चक्र है जो समय के अनुसार बदलता रहता है ! ये बात अलग है कि , कुछ लोगों के जीवन में सुख का पलड़ा अधिक तो कुछ के जीवन में दुःख का पलड़ा अधिक होता है , सच तो ये है कि , ज्यादातर दुःख का ही पलड़ा भारी रहता है , क्योंकि .... छोड़ो जाने देते है , हम तो अपमे मुद्दे पर आते हैं ! हमारे आस-पास का माहौल अब पूरी तरह बदल गया है , आज हम अपने दुःख से ज्यादा कहीं पड़ौसी के सुखी होने से ज्यादा दुखी है , अगर हम ऐसा करते हैं तो हमारे लिए बहुत ही दुःख की बात है .. क्योंकि आज के समय में सुख हांसिल करना बहुत मुश्किल काम है , अच्छे-अच्छों का जीवन निकल जाता है एक पल के सुख के लिए ! हमारा गुस्सा तब जायज है जब कोई , हमें मिलने वाली खुशियों को हमसे छीनकर हमें दुःख देकर खुद खुशियों का हिस्सा बने ! मैं एक आम आदमी हूँ , एक आम  इन्सान हूँ ! आप भी मेरी तरह अपने आस-पास होने वाली कई घटनाओं से चिंतित और दुखी होंगे , क्योंकि उसका असर प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष रूप से हम सभी के ऊपर पड़ता है ! हम यहाँ बात देश के हालातों पर, सरकारी नीतियों पर कर रहे हैं , आँख होते हुए भी अंधों की तरह सब कुछ देखने के बारे में बात कर रहे हैं , निर्धन, गरीब, भूखों की, कुपोषण के शिकार मासूम बच्चों की बात कर रहे हैं , अपने हक के एक-एक पैसे के लिए भटकते जरुरतमंदों की , अपनों द्वारा ठुकराए बुजुर्गों की , दर दर की ठोकर खाते आत्महत्या के लिए प्रेरित कई किसानों की , मौज करते सरकारी बाबुओं और अधिकारीयों की , देश को लूटते भ्रष्ट और घोटालेबाज मंत्रियों की बात कर रहे हैं जो देश को अब खुलकर लूट रहे हैं ! आज देश की आम जनता त्राहि-त्राहि कर रही हैं और हमारी सरकार घोड़े बेचकर सो रही है माफ़ कीजिये सो नहीं रही बल्कि वो तो मृत है और मृत किसी काम का नहीं होता ! इस देश में कोई भूख और कुपोषण से मर रहा है तो कोई पानी के लिए एक-दूसरे की जान का दुश्मन बन जाता हैं , कोई नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है तो कोई न्याय पाने के लिए अपनी एड़ियां घिस रहा है , सच तो ये है की स्थिती जस की तस है ! एक आम आदमी सुबह से लेकर शाम तक कड़ी मेहनत करता है तब कहीं जाकर वह अपने और अपने परिवार के लिए इस भीषण मेंहगाई के दौर में सिर्फ भोजन की व्यवस्था कर पाता हैं शायद कुछ को ये भी नसीब नहीं है ! एक आम आदमी अपना पूरा जीवन रोटी, कपड़ा और मकान के चक्कर में निकाल देता है ! वहीँ हमारी सरकार की लापरवाही जगजाहिर है इसके एक नहीं हजारों उदाहरण हैं जिन पर हम भी एक बार नहीं हजारों बार चर्चा कर चुके हैं ! लापरवाही के कारण हजारों लाखों टन अनाज सड़ जाता है और बर्बाद हो जाता है ! यह सब देखकर एक आम आदमी का दिल बहुत रोता है ! एक भिखारी सुबह से लेकर शाम तक भीख मांगकर दो मुट्ठी अनाज की दरकार में पूरा जीवन यूँ ही निकाल देता हैं ! देश में हर साल हजारों मौतें सिर्फ भूंख के कारण होती हैं ! कई राज्यों में आज भी, पोषित भोजन ना मिल पाने के कारण कई मासूम कुपोषण का शिकार हो रहे हैं ! ( ताजा आंकड़ों के अनुसार पूरे विश्व में 10 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार हैं , और इसमें भारत की भी बड़ी भूमिका है )  इन सब पर हमारे सरकारी विभाग चैन से सो रहे हैं ! वहीँ देश की सरकार के झूठे वादे हमेशा की तरह कि, देश में सब कुछ ठीक हैं ! इस देश में करोड़ों परिवार ऐसे हैं जो एक एक रूपए इकठ्ठा करने में ही अपना पूरा जीवन निकाल देते हैं , सरकार उन पर टैक्स लगाकर सरकार का खजाना भारती हैं और बाद में वही खजाना सरकार की तिजोरियों से बाहर निकलकर देश से बाहर स्विस बैंकों में पहुँचता हैं ! देश में मंहगाई बढ़ गई  हैं जिससे आम जनता का जीना मुश्किल हो रहा हैं ! अरबों-खरबों का काला धन देश के बाहर पड़ा है और यहाँ आम जनता की जेब कट रही है ! 

गरीबों के राशन से अमीरों के गोदाम भरे पड़े हैं ...... 
सरकारी दुकानों पर आज भी बड़े - बड़े ताले पड़े हैं .....
सरकार के खजाने भी हैं भरे .......फिर भी    
गरीब वहीँ के वहीँ खड़े हैं ! 

इस दिवाली भी ऐसा होगा कि ,  कहीं  दीप जलेंगे तो , कहीं दिल 

धन्यवाद 

Thursday, November 1, 2012

एक मच्छर साला आदमी को ......? ? .........>>> संजय कुमार

एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है ......( क्या सोचकर बोला पता नहीं कैसे एक मच्छर  एक आदमी को ? ) अबे ओये मच्छर ...... मैं तुझे मच्छर की तरह मसल डालूँगा ..... तू मेरा क्या बिगाड़ लेगा बे मच्छर .! इस तरह के अनेकों  डायलाग हम अपनी फिल्मों में अक्सर सुनते रहते हैं , जहाँ फिल्म का विलेन हीरो को और हीरो विलेन को या उसके टुच्चे गुंडों को बोलता पाया जाता है ! इसका मतलब बिलकुल साफ़ है , हम अपने दुश्मन को अपने से कमजोर और लाचार समझ रहे हैं .... यानी हमारी नजर में एक मच्छर की कोई औकात नहीं है , वो हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता , हमें उससे डरने या घबराने की कोई जरुरत नहीं है , आखिर एक मच्छर ही तो है ..... बस यहीं हम भूल कर जाते है , विशालकाय हांथी को भी ये लगता है कि , अदनी सी रेंगने वाली चींटी उसका क्या बिगाड़ पायेगी ..... किन्तु जब ये चींटी हांथी की सूँड में घुस जाती है .. तब पता चलता है हांथी को कि, किसमें  कितना  दम है ! सच तो ये है कि , हमें कभी भी किसी को छोटा या कमजोर नहीं समझना चाहिए .... क्योंकि ? जिसे हम साधारण सा मच्छर समझ रहे हैं उसे हम दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी कहते हैं ! जो मलेरिया ,डेंगू  और टायफाईड  से दिन प्रतिदिन लोगों की जान ले रहा है और ना जाने दुनियाभर की कौन - कौन सी बीमारियाँ हमें आगे भी देता रहेगा !  हमारे देश के सरकारी अस्पतालों की हालत अगर आप देखेंगे तो मालूम चलेगा इसका आतंक ! इसके खिलाफ ना तो हम कुछ कर सकते हैं और सरकार से भी हम ज्यादा उम्मीद नहीं रखते क्योंकि सरकार तो अभी अपने आपको ही बचाने की जद्दोजहद में लगी हुई है ! भारत और अमेरिका की लिस्ट में जो आतंकवादी है उन्होंने तो आजतक सिर्फ बेक़सूर लोगों को ही मारा है किन्तु ये जब भी हमला करता है तो बड़ी ही ईमानदारी और समझदारी से करता है क्योंकि ये भ्रष्ट नहीं है और ना ही देश का गद्दार है क्योंकि ये किसी को भी नहीं छोड़ता ( आतंकवादियों के हमले में आज तक कोई भी बड़ी हस्ती नहीं मारी गयी ) इसके लिए सभी एक समान हैं !  छोटा - बड़ा , अमीर - गरीब , हिन्दू-मुस्लिम , ईमानदार - भ्रष्टाचारी , नेता - अभिनेता ( यशराज चौपड़ा जी को शायद इसी ने डसा था जिससे  उन्हें डेंगू हुआ था ) किसी को भी नहीं  छोड़ता आज तक हजारों लाखों बेक़सूर इंसानों को
निगल चुका है ! यह हमारा पारंपरिक आतंकवादी है और इसे हमें " ओसामा बिन लादेन " और अन्य खतरनाक आतंकवादियों से भी ज्यादा खतरनाक मानना चाहिए हमारी गलतियों से ही , आज
ये  खतरनाक रूप ले चुका है ! यह आपको हर जगह मिलेगा या यूँ भी कह सकते हैं कि , हिन्दुस्तान 
 के हर घर में मिलेगा घर के अन्दर बाहरआपके चारों ओर आप इसे कभी भी देख सकते हैं !सर्दी -गर्मी 
-बरसात हर मौसम में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करने वाला जीव हैं यह यह अकेला ही खतरनाक है  
यह झुण्ड में भी हमला करता है और कई इंसानों पर एक साथ यह अपने समस्त कुटुंब के साथ जैसे
नरमांदा एवं बच्चे सब मिलकर हमला करते हैं ! हम सब नित नए नए हथकंडे अपनाते हैं इसे खत्म 
करने के लिए फिर भी इंसान के वश के बाहर है इसे खत्म करना क्योंकि यह कभी - कभी नहीं
बल्कि प्रतिदिन हमला करता है एक बार नहीं कई बार करता है ! आप इससे कितना भी बचने की कोशिश
करें जीवन में एक ना एक बार या फिर कई बार आप इसका शिकार अवश्य हुए होंगे यदि नहीं तो आगे
हो सकते हैं ( सावधानी और सुरक्षा ही बचाव है ) और ये बात मैं पूरे विश्वास और यकीन के साथ कह
 सकता हूँ ! ये हम सब का रक्त पिपाशु है , इसके हथियार हैं इनके धारदार और नुकीले " डंक " जो एक 
बार  इंसान के शरीर में चुभा दें बस , फिर इंसान के साथ क्या -क्या होता है ये बात हम सब अच्छे से 
जानते हैं ! मच्छर महाराज " से सबसे ज्यादा पीड़ित निचले तबके के गरीब और मजबूर लोग ही होते
हैं ,क्योंकि इनके पास इस आतंकवादी से लड़ने के लिए कोई हथियार नहीं होता है ! हथियार है भी तो हर
कोई उनका उपयोग नहीं कर  पाता और जो उपयोग करते  भी हैं तब भी ये उन्हें नहीं छोड़ता , मतलब
साफ़ है हमें सचेत और सावधान रहना होगा ! ALL-OUT , MORTIN और " मच्छर भगाओ अगरबत्ती " 
इसके आगे सब कुछ बौना सा साबित होता है ! हमारे देश की सरकार और संगठन इस आतंकवादी को
एक बार जड़ से समाप्त करके बताये तब हम मान सकते हैं कि हमारी सरकार हर आतंकवादी का सफाया
कर सकती है ! वर्ना बड़े- बड़े वादे करने और उलूल - जुलूल बयानबाजी से कुछ नहीं होगा ! अन्दर की और
सच बात तो ये है कि , इसके खौफ से तो सरकार के आला अफसर तक डरे रहते हैं !


दोस्तों आप जरा बचके रहिये वर्ना ...... एक मच्छर साला आदमी को कहीं भी पहुंचा सकता है !

धन्यवाद  


Friday, October 26, 2012

बचपन और यादें ......... >>> गार्गी की कलम से

किसी आलौकिकता से 
कम नहीं होते 
बचपन छुटपन के दिन ,
बहुत ज्यादा तड़पा जाता है मुझे 
वर्तमान और बचपन की 
यादों का संगम 
" माँ " आपकी गोद सा सुकून 
ईश्वर की पूजा में भी नहीं है शायद 
अब जब भी आपकी याद आती है 
तो ईश्वर में आपका 
चेहरा , कर , कदम 
उकेरता है , ये मन
" भईया " अपने बड़े बेटे में 
आप दिखाई पड़ते हैं मुझे 
और छोटे में खुदकी सी 
नादानियाँ नजर आती हैं मुझे 
" माँ " आपका वो छोटा सा कमरा , जहाँ 
बरसात में हमें , गोद में लेकर 
बैठ जाया करती थी वहां 
आज उस कमरे के आगे 
सारा जहाँ छोटा नजर आता है मुझे !
मैं तो चाहती हूँ कि , 
बचपन भूल जाऊं तुझे 
पर हर वार तुझे भूलने में 
नाकाम हो जाती हूँ मैं !

( प्रिये पत्नी गार्गी की कलम से )

धन्यवाद 

Tuesday, October 23, 2012

विजयदशमी पर हम सभी को विजय चाहिए ... ( दशहरा पर्व ) ....... >>> संजय कुमार

आप सभी साथियों को विजयदशमी, दशहरा पर्व की हार्दिक शुभ-कामनाएं !
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जैसा की हम जानते हैं कि , विजयदशमी , दशहरा , रावण दहन पर्व हम विजय उत्सव के रूप में मनाते हैं ! असत्य पर सत्य की जीत , अधर्म पर धर्म की जीत, बुराई पर अच्छाई की जीत , नारी सम्मान की जीत , के रूप में कई बर्षों से मनाते आये हैं और आगे भी मनाते रहेंगे क्योंकि विजयदशमी का पर्व तो सिर्फ एक दिन मनाया जाता है ! क्या रावण का अंत करने के साथ ही झूंठ -बुराई , अधर्म और अत्याचार  का अंत हो गया ? क्या बुराई रुपी रावण ( पुतला ) का दहन करने से सब कुछ खत्म हो जायेगा ? जी नहीं कुछ भी खत्म नहीं होगा ! आज भी हमारे आस-पास सौ सिरों वाले अनेकों रावण उपस्थित है जो " रामायण " के रावण से कहीं अधिक ताकतवर और शक्तिशाली हैं ! रावण में शायद उतनी बुराइयाँ नहीं थीं जितनी कि आज के रावणों में है ! दशानन लंकेश तो अपनी शक्ति के मद में चूर था , उसे सच का ज्ञान था उसे पता था कि " श्रीराम " के हांथों उसका अंत होना है फिर भी उसने बुराई और अधर्म का सम्पूर्ण नाश करवाने के लिए ऐसा किया ! आज अगर हमें सही मायने में विजयदशमी का पर्व और उसकी उपयोगिता को समझना है तो हमें अपने आसपास व्याप्त झूंठ-फरेब , बुराई , असत्य , पाप-दुरचार, को मिटाना होगा ! हमें अपने आस-पास का माहौल अच्छा बनाने के लिए , अपनों की ख़ुशी के लिए , अपना जीवन सुखमय बिताने के लिए अपने अन्दर से अहम् , काम , क्रोध , लालच , मोह को पूरी तरह त्यागना होगा ! क्योंकि ये भी दशानन , रावण का ही एक रूप है ! जिस तरह प्रभु " श्रीराम " ने रावण का अंत कर इस दुनिया से असत्य , अधर्म और बुराई का अंत किया था ठीक उसी प्रकार अब हम सबको अपने जीवन में " राम " बनना होगा और इन समस्त बुराइयों का अंत करना होगा ! आज इस देश में ऐसे रावणों का बोलबाला है जिनके अंत के लिए कई राम प्रयासरत है किन्तु इनकी शक्ति देखकर तो ऐसा लगता है जैसे इन्होने " अमृतपान " किया हो , जैसे कभी इनका अंत ही नहीं होगा , हमें इन पर कभी विजय प्राप्त नहीं होगी ! ये आज रावण है जिसे हम " भ्रष्टाचार " के नाम से जानते हैं ! इस भ्रष्टाचार रुपी रावण से इसके अनेकों शीश उत्पन्न हुए है ....... गरीबी ,  बेरोजगारी , कुपोषण , घोटाले , बेईमानी , आतंकवाद , नक्सलवाद और सबसे बड़ा रावण मेंहगाई जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया ...... क्या इस विजयदशमी पर्व पर हमें इन रावणों पर विजय प्राप्त होगी ? यदि इनमें से हम किसी भी एक रावण पर विजय प्राप्त कर लें तभी कहलायेगा सही मायने में विजयदशमी , दशहरा पर्व !   
क्या आप रावण का दहन करने से पहले अपने अन्दर के रावण का दहन करेंगे ? क्या आप चहुँ ओर व्याप्त रावणों का अंत कर उन पर विजय प्राप्त करेंगे ?  यदि ऐसा करेंगे तो सच में आप कहलायेंगे विश्व विजेता 

आप  सभी को विजयदशमी की हार्दिक बधाइयाँ एवं ढेरों अनेकों शुभ-कामनाएं

जय श्रीराम ------ जय श्रीराम ----------- जय श्रीराम 



धन्यवाद

Saturday, October 20, 2012

सड़क छाप मंजनू ....... और .. और .. ...>>> संजय कुमार

हमारे यहाँ एक बहुत पुरानी कहावत है ..... " जो पकड़ा गया वो चोर है ....और जो ना पकड़ा वो .... पता नहीं .... शायद इसी तरह की कोई कहावत है ........ ये बात मैं इसलिए कह रहा हूँ कि , क्योंकि मैं यहाँ ऐसे प्रेमियों का जिक्र कर रहा हूँ ... जो लुक-छिप कर प्रेम करते है और इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि , कोई उन्हें ऐसा करते देख ना ले..... वर्ना ... वर्ना बहुत कुछ हो जाता है ...... जो नहीं पकड़े जाते या नहीं पकड़े गए वो प्रेमी और जो पकड़ा गया वो कहलाया मंजनू ..... अरे बही लैला का मंजनू ..... माफ़ कीजिये आजकल मंजनू - बंजनु  वाली बात कोई नहीं करता ... क्योनी आजकल प्रेम करने के तरीके जो  बदल गए हैं .. खैर हम मुद्दे की बात पर आते है ... आज का मुद्दा है हमारे देश के सड़क छाप मंजनू ..  
मंजनू , नाम सुनते ही किसी सड़क छाप आशिक का ख्याल हमारे मन  में आता है ! वह युवा (लड़का ) जो आपको सड़कों पर आवारागर्दी करते नजर आते हैं , बेलगाम , लापरवाह और माँ-बाप की बातों को अनसुना करने वाले अपनी मस्ती में मस्त लड़के ,  इन्ही में से ही ज्यादा संख्या में सड़क छाप मंजनू भी होते हैं ! हिन्दुस्तान में हजारों किस्से कहानियां भरे पड़े हैं  इन मजनुओं और इनकी प्रेम कहानी से उदहारण ... जैसे लैला-मंजनू , सोहनी-महिवाल , हीर-राँझा और भी बहुत हुए हैं , लेकिन हिंदुस्तान में तो यही ज्यादा  Famous हैं , और इन्ही को लेकर आज के कई युवाओं को ये मंजनू नाम दिया जाता  है ! ये मंजनू आपको हर देश में मिलेंगे , किन्तु भारत में इनकी संख्या लाखो-करोड़ों में है ! ये आपको कहीं भी , कभी भी  देखने को मिल जायेंगे , स्कूल, कॉलेज , पिकनिक स्थल , शादी-पार्टी , मेले , पार्क, ट्यूशन के अन्दर कोचिंग के बाहर, लगभग सभी जगह ! आजकल नवरात्र का त्यौहार चल रहा है तो इनकी संख्या वर्तमान में ज्यादा हो जाती है ! इस देश में कई स्पॉट तो ऐसे हैं जो  इन मंजनुओं के कारण ही प्रसिद्ध हैं ! लेकिन एक जगह और है जहाँ आजकल इनकी संख्या आम जगह से कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रही है , और वो जगह है " मंदिर " जी हाँ यह बात बिलकुल सही है , आज कल हमारे देश में " नवरात्री " गरबा "  का त्यौहार पूरे जोर-शोर से मनाया जा रहा है . और इन्ही मंदिरों की आड़ में आज इन मंजनुओं का प्रेम , परवान चढ़ रहा है ! क्योंकि ये तो वो  जगह है , जहाँ किसी के भी आने-जाने पर कभी कोई पावंदी और रोक-टोक नहीं होती ! मंदिरों पर जब ऐसे युवा  ( मंजनू- टाइप ) आते  है और सुबह - शाम  दोनों वक़्त आते हैं , तो  हमें लगता है कि , माता की भक्ति के लिए आया है , किन्तु आप अगर गौर से देखें तो आप महसूस करेंगे , की इनकी नजरें किसी ना किसी लैला की तलाश में होती हैं !  " काश यहाँ तो कोई हमें लाइन दे दे और हमारी भी फिल्मों के जैसे "लव-स्टोरी " बन जाये ( मन में इस तरह के ख्याल उमड़ना कोई नयी बात नहीं ... ये उम्र ही ऐसी है ) ! आजकल मंदिरों पर जरुरत से ज्यादा भीड़ होती है और इसी भीड़ में होते हैं मंजनू , पाकेटमार और भगवान् के सच्चे भक्त .... कुछ ऐसे भी युवा इन दिनों में  इन मंदिरों पर आते -जाते हैं , जिनका  ना तो ईश्वर भक्ति और मंदिरों से दूर दूर तक कोई लेना देना होता है ! कुछ ऐसे भी इन मंदिरों पर देखने को मिल जायेंगे जो शायद कहीं और मंजनू गिरी करने और अपनी प्रेमिकाओं से मिलने से घबराते हैं , किन्तु यहाँ पर बड़ी आसानी से मिल लेते हैं वो  भी बिना रोक-टोक और बिना किसी के शक किये हुए ! सभी मंजनुओं के लिए ये नवरात्र के नौ दिन बहुत मायने रखते हैं ! जितना इन्तजार इनको अपनी परीक्षाओं का नहीं रहता उससे कहीं ज्यादा इन्तजार इनको इन दिनों का रहता है ! ( विशेष शारदीय नवरात्र का )

मेरा ऐसा मानना है ... कुछ भी हो कम से कम हमारा आज का भटका हुआ युवा किसी बहाने से मंदिर तो जाता है ! भगवान् के सामने शीश तो झुकाता है ! वर्ना आज का युवा तो अपनी मस्ती में ही मस्त है ! आज का ज्यादातर युवा अपने आस-पास के माहौल और समाज की गतिविधियों से बहुत दूर हैं ! आज के युवा एक ऐसे दुनिया में जीते है जहाँ ना तो प्रेम - स्नेह, संस्कार और अपनेपन का कोई महत्त्व है क्योंकि आज देश में " रेव पार्टियाँ  " रेन डांस  " और " पव "कल्चर का चलन तेजी से बढ़ रहा है ! ऐसे  युवाओं ने ना तो अपने जीवन में कोई सिद्धांत बनाये हैं और ना ही कोई लक्ष्य ! बस चकाचौंध भरी दुनिया को ही अपना भविष्य समझ रहे हैं ! इस चकाचौंध भरी दुनिया में कई युवा अपना भविष्य भी बिगाड़ रहे हैं ! सिगरेट , शराब , शबाब , ड्रग्स और अन्य नशीली बस्तुएं आज इनके मुख्य शौक के रूप में हमारे सामने आ रहे हैं ! यह बात अब छोटे - छोटे गाँव , कस्बों , शहरों और महानगर में किसी संक्रामक बीमारी के जैसे फ़ैल रही है , या फ़ैल चुकी है ! 

हमें ध्यान देना होगा अपने बच्चों पर की आज वह क्या कर रहे हैं ? किस हालात में जी रहे हैं ? उन्हें क्या चाहिए ? और उन्हें हम क्या दे रहे हैं ? या उन्हें क्या मिल रहा है ? आज हम ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ सच्चा प्रेम कम ही देखने को मिलता है ! यदि आपके बच्चे किसी से सच्चा प्रेम करते हैं और यदि आपको लगता है कि , आपके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हांथों में है ! तो अंतिम निर्णय आपका होगा !

मेरी इस बात से कई सड़क छाप मंजनू मुझे गलियां भी देना चाह रहे होंगे , किन्तु में खुश हूँ , कि कभी हम भी उनकी तरह मदिरों पर किसी लैला की तलाश में गए थे ! वहां लैला तो नहीं मिली , परन्तु ईश्वर का आशीर्वाद जरूर मिला !

जय माता दी ............ जय माता दी .............जय माता दी ..........जय माता दी 

धन्यवाद
संजय कुमार

Tuesday, October 16, 2012

कलियुग के नौ राक्षसों का अंत होना ही चाहिए ....... " जय माता दी " ....>>> संजय कुमार

सभी साथियों को परिवार सहित नवरात्र पर्व की बहुत बहुत शुभ-कामनाएं
हिन्दू पंचांग के आश्विन माह की नवरात्रि शारदीय नवरात्रि कहलाती है। विज्ञान की दृष्टि से शारदीय नवरात्र में शरद ऋतु में दिन छोटे होने लगते हैं और रात्रि बड़ी। वहीं चैत्र नवरात्र में दिन बड़े होने लगते हैं और रात्रि घटती है, ऋतुओं के परिवर्तन काल का असर मानव जीवन पर न पड़े, इसीलिए साधना के बहाने हमारे ऋषि-मुनियों ने इन नौ दिनों में उपवास का विधान किया।संभवत: इसीलिए कि ऋतु के बदलाव के इस काल में मनुष्य खान-पान के संयम और श्रेष्ठ आध्यात्मिक चिंतन कर स्वयं को भीतर से सबल बना सके, ताकि मौसम के बदलाव का असर हम पर न पड़े। इसीलिए इसे शक्ति की आराधना का पर्व भी कहा गया। यही कारण है कि भिन्न स्वरूपों में इसी अवधि में जगत जननी की आराधना-उपासना की जाती है।नवरात्रि पर्व के समय प्राकृतिक सौंदर्य भी बढ़ जाता है। ऐसा लगता है जैसे ईश्वर का साक्षात् रूप यही है। प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ वातावरण सुखद होता है। आश्विन मास में मौसम में न अधिक ठंड रहती है न अधिक गर्मी। प्रकृति का यह रूप सभी के मन को उत्साहित कर देता है । जिससे नवरात्रि का समय शक्ति साधकों के लिए अनुकूल हो जाता है। तब नियमपूर्वक साधना व अनुष्ठान करते हैं, व्रत-उपवास, हवन और नियम-संयम से उनकी शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक शक्ति जागती है, जो उनको ऊर्जावान बनाती है।इस काल में लौकिक उत्सव के साथ ही प्राकृतिक रूप से ऋतु परिवर्तन होता है। शरद ऋतु की शुरुआत होती है, बारिश का मौसम बिदा होने लगता है। इस कारण बना सुखद वातावरण यह संदेश देता है कि जीवन के संघर्ष और बीते समय की असफलताओं को पीछें छोड़ मानसिक रूप से सशक्त एवं ऊर्जावान बनकर नई आशा और उम्मीदों के साथ आगे बढ़े।

इस देश के सबसे बड़े नौ राक्षस 

इस बार नवरात्री पर माता रानी से विनती है कि , जिस तरह आपने अनेकों दुष्ट राक्षसों का अंत कर आपने हम मानवों की रक्षा की थी ठीक उसी प्रकार आज के अनेक दानवों , राक्षसों से हमारी रक्षा करें जिनके प्रतिदिन के प्रहार से मानवजाति आज पीड़ित है ! नवरात्र के नौ दिनों में मातारानी इस देश से नौ राक्षसों का अंत कर इस देश की आम जनता का भला कर उनकी सम्रद्धि का मार्ग प्रशस्त करें ! पाप - अत्याचार - बुराई ( ये राक्षस आज घर घर में पाए जाते हैं ) , गरीबी ( आज का सबसे बड़ा अभिशाप ) , बेरोजगारी ( गरीबी की सबसे बड़ी बजह ), मेंहगाई  ( आज की मेंहगाई ने अच्छे अच्छों को गरीबों की श्रेणी में ला दिया ) , बेईमानी ( देश में इतने बेईमान हैं कि ईमानदारों को ढूँढना पड़ता है  ) , हिंसा  ( जब से हमारे अन्दर का सब्र खत्म हुआ तब से  ये राक्षस पैदा हुआ ) , घोटाले  ( अब तो ऐसा लगता है कि , इंसान का जीवन तो सिर्फ और सिर्फ घोटाले करने के लिए ही हुआ है ) , आतंकवाद  ( ये राक्षस सिर्फ बेक़सूर और मासूम लोगों की जान लेता है ) , नक्सलवाद ( शायद अपने लोगों के  द्वारा  ही फैलाया गया या बनाया गया राक्षस है जो अब अपनों को ही मार रहा है ) अंत में नौंवा और सबसे बड़ा राक्षस अगर हम इसे पहला और इन सभी का मूल कारण कहें तो गलत नहीं होगा ! क्योंकि आज देश में चारों ओर फैली अराजकता का कारण यही है जिसे हम " भ्रष्टाचार " के नाम से जानते हैं ! आज के इस राक्षस को हम  " रक्तबीज " नाम के राक्षस की तरह ही देखते हैं .. जिस प्रकार रक्तबीज के ऊपर प्रहार करने  पर उसके रक्त की बूँदें जहाँ - जहाँ जिस जगह गिरती थीं वहां उतने ही रक्तबीज और पैदा हो जाते थे ! ठीक बैसे ही ये भ्रष्टाचार नाम का राक्षस जहाँ - जहाँ जाता है वहां उससे कहीं और अधिक भ्रष्टाचारी पैदा हो जाते हैं ! इस  राक्षस नंबर एक ने  आज  पूरे देश को तबाह और बर्बाद कर दिया है यदि इसका अंत हो गया तो ये मान लीजिये सब अपने आप खत्म हो जायेगा ! अब जल्द से जल्द इस राक्षस का अंत होना चाहिए .........


जय मातादी ............. जय मातादी ...................... जय मातादी

धन्यवाद