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Monday, January 7, 2013

ओरी हवा ........>>> गार्गी की कलम से

ओरी हवा 
तेरा मेरा नाता 
बहुत गहरा है 
तू दिखती नहीं , तो क्या 
महसूस तो होती है 
कभी पुरवाई 
कभी बसंत 
कभी लू बन जाती है 
और बारिस को भी तो 
तू ही लाती है 
तु मौसम के अनुरूप ढल जाती है 
और मैं रिश्तों के अनुरूप ,
तुझे क्या लगता है 
क्या तू ही अद्रश्य है 
मैं भी अद्रश्य हो जाती हूँ 
उनकी आँखों से 
जिनका मैं अंश हूँ 
विवाह के बाद !
महीनों साल गुजरते जाते 
फिर भी मेरे प्रति 
उनके दिल से " प्रेम की अनुभूति "
मिटती नहीं !
और ना ही मेरे दिल से 
पर 
मुझे ढलना होता है 
नए नए रिश्तों में 
जिम्मेदारियों में 
मेरा भी ठिकाना नहीं है 
तुम्हारी तरहा !
वक़्त और हालत 
मेरा स्वभाव 
बदल देते हैं 
जैसे मौसम 
तुम्हारा बदल देते हैं !

( प्रिये पत्नी गार्गी की कलम से )

धन्यवाद 

Saturday, December 8, 2012

हाँ .. हाँ ... हाँ .... मैं भ्रष्टाचारी हूँ ( व्यंग्य ) ........>>> संजय कुमार

जब देखो , जहाँ देखो , जिसे देखो आज  मेरे पीछे हाँथ धोकर नहीं बल्कि नहा -धोकर पीछे पड़ा है ! कहीं मेरे खिलाफ जुलुस निकाले जाते हैं तो कहीं नारे लगाये जाते हैं ! कोई मेरे खिलाफ " लोकपाल " की मांग कर रहा है तो कोई अन्य तरीकों से मुझे घेरने की नाकाम कोशिश में लगा हुआ है ! आखिर कब तक हम जैसे लोगों को परेशान किया जाता रहेगा  ? आखिर हमारा कसूर क्या है ? आखिर हम भी इंसान है ( ऐसा हम सोचते हैं ) हमें भी खुली हवा में सांस लेने का अधिकार है ! आज पूरा देश हमें नफरत भरी निगाहों से देख रहा है ( सिर्फ दुखी,पीड़ित और मजबूर लोग ) क्यों ? इसलिए की हम सच को स्वीकार नहीं कर रहे हैं ! मैं आज इस देश की अवाम से एक बात खुलकर कहना चाहता हूँ कि , आप लोग मुझे घ्रणा की द्रष्टि से ना देखें ....... मैं अब रोज की बातों को सुन-सुनकर तंग आ चुका हूँ , इसलिए  मैं आज सब कुछ स्वीकार करने को तैयार हूँ ! हाँ .. हाँ ... हाँ .... मैं भ्रष्टाचारी हूँ और ये बात स्वीकार करते हुए मेरे मन में किसी भी प्रकार की कोई आत्मग्लानि नहीं है , और यही 100% सत्य है ! .....  ये सारी बातें कल ही मुझे एक भ्रष्टाचारी ने अपने मुखमंडल द्वारा सुनाई , और ये सारी बातें सुनाते वक़्त वह बहुत ही उदास था ! उसकी उदासी और पीड़ा को देखते हुए मुझे ऐसा लगा कि , मुझे इस दुखी भ्रष्टाचारी की बात आप तक अवश्य पहुंचानी चाहिए ..... ये बात वो भी आप लोगों तक पंहुचा सकता था किन्तु उसने मुझसे कहा " शायद मेरी इस बात को आप लोग राजनीति का कोई नया पैंतरा ना समझें " इसलिए उसने ये बात मेरे समक्ष रखी ! ......आजकल हमारे देश में चारों तरफ जहाँ देखो वहां सिर्फ भ्रष्टाचार और घोटाले ही छाये हुए हैं ! सुबह सुबह जब अखबार खोलकर देखो तो एक नया घोटाला , टेलीविजन पर न्यूज़ में हर वक्त घोटाला और भ्रष्टाचार इसके अलावा इस देश में अब कुछ नहीं चलता ! आजकल जितना कुछ भ्रष्टाचारियों को सहना और सुनना पड़ रहा है शायद ही किसी और को इतना सहना और सुनना पड़ रहा हो ! आज हर जगह उनको बुरी नज़र से देखा जा रहा है ! कोई भी कभी भी उनसे कुछ भी पूंछने लगता है , सवालों की बौछार कर दी जाती है ! जब देखो तब उनको बिना बात के परेशान किया जाता है ! भ्रष्टाचारी थक गए हैं जबाब देते देते ! आज भ्रष्टाचारियों की हालत देखकर मेरा मन भी दुखी हो जाता है ! जब मैं उनकी दुःख तकलीफ को देखता हूँ तो मुझे बहुत बुरा लगता है मुझसे रहा नहीं जाता ! क्यों उनके साथ ऐसा बुरा व्यव्हार हो रहा है ? जब मैंने एक भ्रष्टाचारी से पूंछा तो उसने मुझे बताया ...... " अगर मैंने भ्रष्टाचार किया तो कौन सा गुनाह या अपराध कर दिया , और यदि गुनाह कर भी दिया तो वो मेरी " मजबूरी " थी ......... और पूरी दुनिया में लोग मजबूरी में कुछ ना कुछ गलत करते ही है,  और यदि मैंने भी कोई गलती कर भी दी  है तो उसे जाने भी  दो , ऐसा किसने कह दिया कि आप हमें इंसान ही ना समझें ! आप तो जानते हैं मैं बीबी , बच्चों वाला हूँ , मेरा परिवार काफी बड़ा है ... सभी की जिम्मेदारी भी मुझ पर ही है ...... मेंहगाई के इस दौर में  मेरी तनख्वाह इतनी नहीं है कि , जिससे मैं अपने परिवार के लिए कुछ कर सकूँ ...... देश में मंहगाई आज अपनी चरम सीमा को तोड़ रही है , ऐसे में हमारे घरों में चूल्हा तो जलता है पर उस पर पकाने को कुछ नहीं है ....... आप तो जानते हैं , हमारी सरकार के पास वादे तो है किन्तु रोटी नहीं है , जमीन है पर घर बनाने के लिए ईंट , पत्थर और सीमेंट नहीं ,और सच तो यही है कि , इंसान को जीने के लिए रोटी और रहने के लिए घर तो चाहिए ही ...... ईमानदारी से या फिर बेईमानी से ...... अब ऐसी स्थिति में , मैं क्या कर सकता हूँ ? बच्चों की अच्छी शिक्षा , बेटी का विवाह , बूढ़े माता-पिता को " चारधाम " की यात्रा , अपने लिए कार , पत्नी के लिए सोने का हार मैं कैसे दे सकता हूँ ?  इसलिए मैं बेईमानी करता हूँ , घूस लेता हूँ और भ्रष्टाचार फैलाता हूँ ! जब मैं ईमानदारी से काम करता हूँ तो हर जगह से ठुकराया जाता हूँ , बेईमानों के बीच में , मैं अकेला आखिर क्या कर सकता हूँ ? ईमानदार होने पर भी मुझे भ्रष्टाचारी ही समझा जाता है ! इसलिए मैंने अब ठान लिया है कि , जब मैं रिश्वत लेता हूँ, बेईमानी करता हूँ , और घोटाले भी करता ही हूँ तो ये स्वीकार कर लेने में आखिर बुराई ही क्या है की मैं  भ्रष्टाचारी हूँ  ? ........  बेईमानी एक रूपए की हो या एक लाख की , बेईमान तो कहलाऊंगा ही  फिर इस सच को स्वीकार करने में हर्ज ही क्या है ! वैसे भी बेईमान , भ्रष्टाचारी और घोटालेबाजों का आजतक इस देश में क्या हुआ है ? जैसे एक आम आदमी रहता है ठीक वैसे ही एक बेईमान .... किन्तु डरा हुआ कि कहीं कोई भ्रष्टाचारी न कह दे !

मैं देश के सभी भ्रष्टाचारियों से आग्रह करूंगा कि , आपको अब किसी से कुछ छुपाने की या डरने की कोई जरुरत नहीं है ! फक्र से कहों  .......... हाँ .. हाँ ... हाँ .... मैं भ्रष्टाचारी हूँ ...

धन्यवाद 

Friday, October 26, 2012

बचपन और यादें ......... >>> गार्गी की कलम से

किसी आलौकिकता से 
कम नहीं होते 
बचपन छुटपन के दिन ,
बहुत ज्यादा तड़पा जाता है मुझे 
वर्तमान और बचपन की 
यादों का संगम 
" माँ " आपकी गोद सा सुकून 
ईश्वर की पूजा में भी नहीं है शायद 
अब जब भी आपकी याद आती है 
तो ईश्वर में आपका 
चेहरा , कर , कदम 
उकेरता है , ये मन
" भईया " अपने बड़े बेटे में 
आप दिखाई पड़ते हैं मुझे 
और छोटे में खुदकी सी 
नादानियाँ नजर आती हैं मुझे 
" माँ " आपका वो छोटा सा कमरा , जहाँ 
बरसात में हमें , गोद में लेकर 
बैठ जाया करती थी वहां 
आज उस कमरे के आगे 
सारा जहाँ छोटा नजर आता है मुझे !
मैं तो चाहती हूँ कि , 
बचपन भूल जाऊं तुझे 
पर हर वार तुझे भूलने में 
नाकाम हो जाती हूँ मैं !

( प्रिये पत्नी गार्गी की कलम से )

धन्यवाद 

Tuesday, May 10, 2011

आज मैं भी बिकने को तैयार हूँ ! क्या है कोई खरीदार ? ....... >>> संजय कुमार

वैसे तो इस संसार में सब कुछ बिकाऊ है ! आज चारों तरफ खरीद - बिक्री का धंधा जोरों पर है ! इस देश में आज सब कुछ बिक रहा है ! कहीं इंसान बिक रहे हैं तो कहीं जानवर बिक रहे हैं ! कहीं ईमान बिक रहा है तो कहीं न्याय बिका रहा है ! करोड़ों में खिलाड़ी बिक रहे हैं तो कोई खेलों के नाम पर देश का मान - सम्मान बेच रहा है ! कहीं नेता बिक रहे हैं तो कहीं पार्टियाँ बिक रही हैं ! खरीद-बिक्री के इस धंधे में कई लोग ऐशोआराम की जिन्दगी जी रहे हैं ! दुखी है तो " आम आदमी " उसके पास पैसा नहीं है ! जब देखा कि इस देश में सब कुछ बिक रहा है तो सोचा चलो आज अपने आप को भी इस बाजार में बेचकर देखें शायद कोई खरीदार मिल जाए ! देखें कि आज हमारी क्या औकात है ? आज हमारा क्या वजूद है ? क्या हमारी भी कोई कीमत है ? क्या हम भी करोड़ों में बिक सकते हैं ? मैं इस देश का एक " आम आदमी " हूँ ! वो आम आदमी जो आज हर तरफ से निराश और परेशान है ! एक - एक पैसे को मोहताज है ! खुशियाँ क्या होती हैं ? सुख क्या होता है ? जिसकी चाहत में अपना पूरा जीवन घुट-घुट कर और अपने मन की इक्षाएं मारते हुए अपना जीवन व्यतीत कर रहा है ! इस उम्मीद पर की कभी तो वो दिन आएगा जब उसके मन की मुरादें पूरी होंगी ! क्योंकि आज इंसान की सभी मनोकामनाएं सिर्फ पैसा ही पूरी कर सकता है ! क्योंकि आज पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है खुशियाँ भी ! ( आज का भगवान सिर्फ पैसा है ) सब कुछ पाने के लिए पैसा चाहिए और पैसा सुबह से शाम तक मजदूरी कर तो नहीं कमाया जा सकता या फिर इतनी आमदनी नहीं होती की अपनी खुशियों को हासिल कर सकें ! इंसान सुख और खुशियाँ पाने के लिए और अपनों को सुख देने के लिए कुछ भी कर सकता है ! यहाँ तक की अपने आपको बेच भी सकता है ! ऐसा वो इसलिए कर सकता है क्योंकि आज ऐसी - ऐसी चीजें बिक रहीं हैं वो भी करोड़ों और अरबों रूपए में जिन्हें देख " आम आदमी " यह कहने और करने पर मजबूर हो जाता है ! आज एक आम आदमी क्यों अपने आपको बेचने तक को तैयार हो गया है उसके पीछे भी वजह है ! हमारे देश में एक से बढकर एक साहूकार और अरबपति है जिन्होंने आम जनता का मेहनत पैसा अपनी तिजोरियों में बंद कर रखा है ! हमारे देश में या इस विश्व में जीवित चीजों से ज्यादा निर्जीव चीजों की बहुत अहमियत है ! तभी तो कोई भी निर्जीव बस्तु दो पांच हजार की नहीं बल्कि लाखों और करोड़ों में खरीद लेते हैं ! आखिर अमीरों के शौक हैं पैसा पानी की तरह बहाना , यह भी एक शौक है ! जैसे उनके जीवन में पैसे का तो कोई मूल्य ही नहीं हैं ! पर गरीब का क्या उसके जीवन में तो पैसा ही सब कुछ मायने रखता है ! कभी " किंगफिशर माल्या " " टीपू सुलतान " की तलवार करोड़ों में खरीद लेते हैं तो कभी " शराब " की दो बोतलें करोड़ों में , कहते हैं " शराब " जितनी पुरानी नशा उतना अच्छा ! कभी कोई " गांधीजी " के चश्मे और टोपी की बोली करोड़ों में लगाता है ! और भी कई ख़बरें ऐसी होती हैं जिन्हें सुन आम आदमी तो यही कहता है की कोई मुझे भी करोड़ों में खरीद ले , तो शायद मेरा और मेरे परिवार का जीवन सुधर जाए ! इंसानों से ज्यादा खरीद -फरोख्त तो आज विदेशों में हो रही है ! ये ख़बरें भी " आम आदमी " को हताश और निराश करती हैं ! अभी कुछ दिनों पहले विदेश में एक बुजुर्ग महिला ने अपनी करोड़ों की संपत्ति अपने " कुत्तों " के नाम कर दी थी ! इस खबर पर भी मैंने कई लोगों को यह कहते हुए सुना " काश हम कुत्ते होते " अभी चाइना में एक अरबपति ने एक कुत्ते को अपने शौक के लिए मात्र ६-७ करोड़ में खरीद लिया ! 6-7 करोड़ किसी के लिए मात्र होते हैं तो किसी के लिए उसकी सात पुश्तों को बदलने के लिए काफी हैं ! लन्दन में कुछ दिनों पहले एक महिला ने अपनी " कुतिया " का सिर्फ मन रखने और खुश करने के लिए उसका " स्वयंवर " रचाया और उस पर लाखों रूपए खर्च कर डाले ! अब " कुतिया " का भी " स्वयंवर " होने लगा है ! हमारे देश में आज भी यहाँ ऐसे लाखों परिवार हैं जिनके पास पैसा ना होने की बजह से उनके परिवारों की कुंवारी बेटियों की उम्र ३०-से ३५ पार कर चुकी है ! कई लड़कियों ने तो पैसे के अभाव में शादी तक नहीं की , ऐसी स्थिती में बेचारे " माँ-बाप " अपने आप को बेचने तक को तैयार हो जाते हैं ! ऐसा नहीं है की आज तक इस देश में इंसानों की खरीद-बिक्री ना हुई हो , खरीद -बिक्री तो हुई है ! इस देश में " इंसान के लालच ने मजबूरी को खरीद लिया " तभी तो गरीबी में मजबूर होकर अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए कई लड़कियां अपने शरीर का सौदा कर अपने आप को बेच देती हैं ! इंसान, लालच में आकर अपने ईमान का सौदा कर, अपने आपको बेईमानों के हांथों बेच देता हैं ! देश में होने वाली आतंकवादी घटनाओं में जिन युवाओं का इस्तेमाल किया जाता है वो भी कहीं ना कहीं अपने आपको बेचकर अपने घर-परिवार को खुशियाँ देने के लिए अपना सौदा देश के दुश्मनों से करते हैं और हथियार उठा लेते हैं ! आज का भटका हुआ बेरोजगार युवा मतलब परस्त और धर्म परस्त राजनीति के हांथों बिक जाता है ! आज मैं देश का " आम आदमी " अपने आपको बेचने के लिए इस खरीद -फरोख्त के बाजार में लेकर आया हूँ ! अपनों को खुशियाँ देने के लिए !

क्या है कोई जो मुझे खरीद सके ?

धन्यवाद