Saturday, December 8, 2012

हाँ .. हाँ ... हाँ .... मैं भ्रष्टाचारी हूँ ( व्यंग्य ) ........>>> संजय कुमार

जब देखो , जहाँ देखो , जिसे देखो आज  मेरे पीछे हाँथ धोकर नहीं बल्कि नहा -धोकर पीछे पड़ा है ! कहीं मेरे खिलाफ जुलुस निकाले जाते हैं तो कहीं नारे लगाये जाते हैं ! कोई मेरे खिलाफ " लोकपाल " की मांग कर रहा है तो कोई अन्य तरीकों से मुझे घेरने की नाकाम कोशिश में लगा हुआ है ! आखिर कब तक हम जैसे लोगों को परेशान किया जाता रहेगा  ? आखिर हमारा कसूर क्या है ? आखिर हम भी इंसान है ( ऐसा हम सोचते हैं ) हमें भी खुली हवा में सांस लेने का अधिकार है ! आज पूरा देश हमें नफरत भरी निगाहों से देख रहा है ( सिर्फ दुखी,पीड़ित और मजबूर लोग ) क्यों ? इसलिए की हम सच को स्वीकार नहीं कर रहे हैं ! मैं आज इस देश की अवाम से एक बात खुलकर कहना चाहता हूँ कि , आप लोग मुझे घ्रणा की द्रष्टि से ना देखें ....... मैं अब रोज की बातों को सुन-सुनकर तंग आ चुका हूँ , इसलिए  मैं आज सब कुछ स्वीकार करने को तैयार हूँ ! हाँ .. हाँ ... हाँ .... मैं भ्रष्टाचारी हूँ और ये बात स्वीकार करते हुए मेरे मन में किसी भी प्रकार की कोई आत्मग्लानि नहीं है , और यही 100% सत्य है ! .....  ये सारी बातें कल ही मुझे एक भ्रष्टाचारी ने अपने मुखमंडल द्वारा सुनाई , और ये सारी बातें सुनाते वक़्त वह बहुत ही उदास था ! उसकी उदासी और पीड़ा को देखते हुए मुझे ऐसा लगा कि , मुझे इस दुखी भ्रष्टाचारी की बात आप तक अवश्य पहुंचानी चाहिए ..... ये बात वो भी आप लोगों तक पंहुचा सकता था किन्तु उसने मुझसे कहा " शायद मेरी इस बात को आप लोग राजनीति का कोई नया पैंतरा ना समझें " इसलिए उसने ये बात मेरे समक्ष रखी ! ......आजकल हमारे देश में चारों तरफ जहाँ देखो वहां सिर्फ भ्रष्टाचार और घोटाले ही छाये हुए हैं ! सुबह सुबह जब अखबार खोलकर देखो तो एक नया घोटाला , टेलीविजन पर न्यूज़ में हर वक्त घोटाला और भ्रष्टाचार इसके अलावा इस देश में अब कुछ नहीं चलता ! आजकल जितना कुछ भ्रष्टाचारियों को सहना और सुनना पड़ रहा है शायद ही किसी और को इतना सहना और सुनना पड़ रहा हो ! आज हर जगह उनको बुरी नज़र से देखा जा रहा है ! कोई भी कभी भी उनसे कुछ भी पूंछने लगता है , सवालों की बौछार कर दी जाती है ! जब देखो तब उनको बिना बात के परेशान किया जाता है ! भ्रष्टाचारी थक गए हैं जबाब देते देते ! आज भ्रष्टाचारियों की हालत देखकर मेरा मन भी दुखी हो जाता है ! जब मैं उनकी दुःख तकलीफ को देखता हूँ तो मुझे बहुत बुरा लगता है मुझसे रहा नहीं जाता ! क्यों उनके साथ ऐसा बुरा व्यव्हार हो रहा है ? जब मैंने एक भ्रष्टाचारी से पूंछा तो उसने मुझे बताया ...... " अगर मैंने भ्रष्टाचार किया तो कौन सा गुनाह या अपराध कर दिया , और यदि गुनाह कर भी दिया तो वो मेरी " मजबूरी " थी ......... और पूरी दुनिया में लोग मजबूरी में कुछ ना कुछ गलत करते ही है,  और यदि मैंने भी कोई गलती कर भी दी  है तो उसे जाने भी  दो , ऐसा किसने कह दिया कि आप हमें इंसान ही ना समझें ! आप तो जानते हैं मैं बीबी , बच्चों वाला हूँ , मेरा परिवार काफी बड़ा है ... सभी की जिम्मेदारी भी मुझ पर ही है ...... मेंहगाई के इस दौर में  मेरी तनख्वाह इतनी नहीं है कि , जिससे मैं अपने परिवार के लिए कुछ कर सकूँ ...... देश में मंहगाई आज अपनी चरम सीमा को तोड़ रही है , ऐसे में हमारे घरों में चूल्हा तो जलता है पर उस पर पकाने को कुछ नहीं है ....... आप तो जानते हैं , हमारी सरकार के पास वादे तो है किन्तु रोटी नहीं है , जमीन है पर घर बनाने के लिए ईंट , पत्थर और सीमेंट नहीं ,और सच तो यही है कि , इंसान को जीने के लिए रोटी और रहने के लिए घर तो चाहिए ही ...... ईमानदारी से या फिर बेईमानी से ...... अब ऐसी स्थिति में , मैं क्या कर सकता हूँ ? बच्चों की अच्छी शिक्षा , बेटी का विवाह , बूढ़े माता-पिता को " चारधाम " की यात्रा , अपने लिए कार , पत्नी के लिए सोने का हार मैं कैसे दे सकता हूँ ?  इसलिए मैं बेईमानी करता हूँ , घूस लेता हूँ और भ्रष्टाचार फैलाता हूँ ! जब मैं ईमानदारी से काम करता हूँ तो हर जगह से ठुकराया जाता हूँ , बेईमानों के बीच में , मैं अकेला आखिर क्या कर सकता हूँ ? ईमानदार होने पर भी मुझे भ्रष्टाचारी ही समझा जाता है ! इसलिए मैंने अब ठान लिया है कि , जब मैं रिश्वत लेता हूँ, बेईमानी करता हूँ , और घोटाले भी करता ही हूँ तो ये स्वीकार कर लेने में आखिर बुराई ही क्या है की मैं  भ्रष्टाचारी हूँ  ? ........  बेईमानी एक रूपए की हो या एक लाख की , बेईमान तो कहलाऊंगा ही  फिर इस सच को स्वीकार करने में हर्ज ही क्या है ! वैसे भी बेईमान , भ्रष्टाचारी और घोटालेबाजों का आजतक इस देश में क्या हुआ है ? जैसे एक आम आदमी रहता है ठीक वैसे ही एक बेईमान .... किन्तु डरा हुआ कि कहीं कोई भ्रष्टाचारी न कह दे !

मैं देश के सभी भ्रष्टाचारियों से आग्रह करूंगा कि , आपको अब किसी से कुछ छुपाने की या डरने की कोई जरुरत नहीं है ! फक्र से कहों  .......... हाँ .. हाँ ... हाँ .... मैं भ्रष्टाचारी हूँ ...

धन्यवाद 

8 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (09-12-2012) के चर्चा मंच-१०८८ (आइए कुछ बातें करें!) पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

    ReplyDelete
  2. गर्व का विषय होता जा रहा है यह।

    ReplyDelete
  3. बहुत ही प्रभावी प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

    ReplyDelete
  4. ये तो समाजसेवक हैं।

    ReplyDelete
  5. मैं भ्रष्टाचारी हूँ ...satya hai ji

    ReplyDelete