Tuesday, June 8, 2010

इसमें विश्वाश है, इसमें कुछ खास है.....>>>> संजय कुमार

आज सुबह एक विज्ञापन जब टेलीविजन पर देखा तो हम उस विज्ञापन को देखकर यह समझ नहीं पाए की विज्ञापन इस तरह क्यों दिखाया जा रहा है , आखिर इस विज्ञापन का क्या मतलब है ! और आखिर यह विज्ञापन का हम क्या अर्थ निकालें ! विज्ञापन था किसी सीमेंट कंपनी का ! '' लाल रंग की बिकनी पहने एक मॉडल समुद्र की लहरों के बीच से निकलती हुई आती है " और फिर विज्ञापन आता हैं ! "इसमें विश्वाश है.... इसमें कुछ खास है , जेपी सीमेंट ......... जब इस तरह का विज्ञापन देखा तो बहुत सोचा की इस विज्ञापन मैं इस मॉडल को इस तरह दिखाने का क्या मतलब ! क्या इस मॉडल को देखकर आप अपने घर के लिए सीमेंट खरीदेंगे ! या इस मॉडल को देखकर आप अपना दिल बहलाएँगे ! इस तरह का यह कोई अकेला विज्ञापन नहीं है ! आज टेलीविजन पर दिखाए जाने बाले अधिकांश्ता विज्ञापनों मैं इसी तरह नारी का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है ! क्या आज हर दूकान का सामान बेचने के लिए यूँ नारी का उपयोग सही है ! आज मर्दों का तेल हो या मर्दों का साबुन , या सेविंग क्रीम या मोटरसाइकिल या अन्य उत्पाद जो ज्यादातर पुरुष ही इस्तेमाल करते हैं ! इन सभी को बेचने की जिम्मेदारी आज इन महिलाओं के कन्धों पर डाल दी गयी है ! अगर नारी यह विज्ञापन बंद करदें तो पता नहीं सारी कंपनी बंद हो जायेंगी या हिंदुस्तान मैं उत्पाद बिकना बंद हो जायेंगे ! क्यों आज गली गली हर नुक्कड़ पर नारी की नुमाइश इस तरह की जा रही है ! यह सब देखकर आज नारी भी कहीं ना कहीं बहुत दुखी है ! जो उसका इस्तेमाल इस तरह किया जा रहा है ! क्यों कोई महिला संगठन आगे नहीं आता इस तरह नारी के विक्रय पर रोक लगाने के लिए !क्या आज का महिला संगठन भी कहीं आधुनिक दुनिया की चकाचौंध मैं खो गया है ! या फिर नारी को यह सब अच्छा लगता है , या आज की नारी जो इस तरह की चकाचौंध बाली दुनिया मैं कार्यरत है ,वह सिर्फ पैसा चाहती है ! आप उसे सिर्फ पैसा दो तो फिर बो चाहे जिस विज्ञापन मैं आये ! या जहाँ चाहे वहां अपने आप की नुमाइश करती फिरे ! अगर यही सच है तो हम सब को आज की नारी की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं हैं ! वह अपना अच्छा बुरा जानती हैं !

हिंदुस्तान मैं जहाँ नारी को देवी का दर्जा दिया जाता है ! वहीँ आज हिन्दुस्तान मैं हर जगह नारी का उपयोग किया जा रहा है क्यों ! कौन हैं इसका जिम्मेदार नारी स्वयं या इनका इस्तेमाल करने बाले ! क्योंकि आज हर जगह एक बात सुनने को मिलती है !" जो दिखता है सो बिकता है " क्या वाकई मैं आज जो दिख रहा है , बही बिक रहा है ! तो फिर हर जगह नारी को ही क्यों दिखाया जा रहा है ! ये तो शायद हर किसी की चाहत नहीं है की हर जगह नारी की ही नुमाइश की जाए ! क्या ये पुरुष को अपनी और आकर्षित करने का तरीका है ! अगर पुरुष उत्पादों का विज्ञापन महिला नहीं करेगी तो क्या पुरुष , उस उत्पाद का उपयोग बंद कर देंगे ............ सोचिये जरूर सोचिये ..........इस बात पर ................

अगर इस बात मैं किसी नारी का अपमान है ...... तो मैं क्षमा प्रार्थी हूँ .......... मुझे माफ़ करें

धन्यवाद

10 comments:

  1. जहां बाजारवाह हावी है वहां नारी को देवी जैसा दर्जा देने की बात का अब क्या मतलब। सामान को बेचना है अब यदि सामान किसी महिला द्वारा सफलतापूर्वक बेचा जा रहा है तो फिर वही नए व्यापारिक जमाने के लिए खास है। समाज की परवाह किसे है।

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  2. sahab hamari maansikta aisi hai to wo bechenge bhi aise hi...wahi dikhayenge jo ham dekhna chahte hain.....:(

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  3. वाकई मैं आज जो दिख रहा है , बही बिक रहा है

    satya hai...bilkul satya hai......

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  4. ... व्यवसायीकरण ... प्रतिस्पर्धा ..!!!

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  5. आपने उस विज्ञापन पर नज़र नहीं दौडाई जहाँ एक लड़की बस में सफ़र करते समय अपने बगल वाले लड़के से टिकती है, पैर से पैर लड़ाती है तभी पास में खड़े लड़के के पास BSNL की 3G सर्विस देख कर पास बैठे लड़के पर छेड़खानी का धोशारोपन कर उसे उठाकर मोबाईल वाले लड़के को बगल में बिठा लेती है.
    और भी बहुत से विज्ञापन हैं जो महिलाओं की छवि को निखार (निखार!!!!) रहे हैं और महिलाएं निखरने की जगह पर मुखर रही हैं............
    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

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  6. http://khuranarkk.jagranjunction.com/2010/06/07/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%8B/
    उक्त लिंक पर एक और नमूना देखो नारी कि फजीहत का !!!

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  7. आपकी चिन्ता वाजिब है.....बाजारवाद ने नारी को पूरी तरह से उपभोग की वस्तु बना दिया है। बाजार भी समाज की नसों के अनुसार ही चलता है। वह जानता है कि नारी-शरीर के प्रति समाज के अधिकांश प्रतिशत में एक कामुक आकर्षण विद्यमान है, बस उसे ही भुना रहा है...

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  8. हम सर पटकने के अलावा करें क्या????

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  9. sahi hai,vigyapan ki duniya bahut hi azib hai.ittafaq hi hai ame add ko dekhkar mere man mai bhi yahi pratikriya ai thi
    bahut khub
    vandana

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