Tuesday, March 13, 2012

नजर नजर की बात है ......>>> संजय कुमार

उनसे रिश्ता है कोई गहरा
पर क्या समझ नहीं आता है
पर उनकी एक नजर से
बड़ा सुकून मिल जाता है !
यूँ तो उस रिश्ते का कोई नाम नहीं होता है
पर बेनाम कहना भी अपमान हो जाता है !
स्वार्थ नहीं है उसमें कोई
बस नजर की बात है !
जो महसूस करता है
बस वही जानता है !
जिंदगी की थकान
उसी नजर का जादू मिटाता है
उस नजर के आगे
सारा जहान छोटा नजर आता है !
जैसे वो नजर
सदियों से है हमारी
और सदियों तक रहेगी
वो नजर
न कहने की बात है
न छुपाने की बात है
बस इस नजर की इतनी सी पहचान है
कि,
नजर नजर की बात है !

( प्रिये पत्नी गार्गी की कलम से )

धन्यवाद


12 comments:

  1. संजय जी
    नमस्कार !
    न कहने की बात है
    न छुपाने की बात है
    बस इस नजर की इतनी सी पहचान है
    कि,
    .......नजर नजर की बात है !
    गार्गी जी के कलम से निकली प्रशंसनीय रचना
    सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई आप दोनों को

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  2. gargijee ne bahut achcha likha hai.....

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  3. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  4. जिंदगी की थकान
    उसी नजर का जादू मिटाता है
    उस नजर के आगे
    सारा जहान छोटा नजर आता है !
    Behad sundar!

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  5. बेहतरीन और गहन अभिव्यक्ति...

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  6. नजरों पर नजर डालने के लिए बहुत सुन्दर लेख |

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  7. हूँ....गार्गी जी को एक ब्लॉग क्यों नहीं बना देते ...?
    उनका प्रेम और भी कई रूप में देखने को मिले हमें .....

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  8. bahut sunder likhti hai aapki patni.....gargiji ko badhai...

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  9. सुंदर भाव संयोजन बेहतरीन अभिव्यक्ति बधाई...

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  10. नजर की ही तो बात है ...सुन्दर है

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  11. बहुत अच्छी प्रस्तुति!

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