Saturday, March 10, 2012

वादे तो सब करते हैं, किन्तु.....>>> संजय कुमार

आपने राजेश खन्ना पर फिल्माया गया ये  गीत जरूर सुना होगा जो फिल्म " दुश्मन " का है ! " झूंठा है तेरा वादा , वादा तेरा वादा , वादे पे तेरे मारा गया बंदा मैं सीधा-साधा  " इस गीत में हीरो अपनी महबूबा को उसका वादा याद दिलाता है  जो शायद वह भूल गयी हो , खैर जाने देते हैं , ये तो फ़िल्मी वादे हैं , इनका क्या ! यहाँ ना तो किसी ने मुझसे कोई वादा किया है , और ना ही कोई वादा तोड़ा है ! क्योंकि मैं कोई प्रेमी नहीं हूँ  और ना यहाँ लैला-मंजनू , सोहनी-महिवाल , हीर-राँझा की बात हो रही है क्योंकि ये तो वो  लोग थे  जिन्होंने एक-दूसरे को किये वादे को पूरा किया , चाहे फिर एक साथ अपनी जान देने का  वादा ही क्यों ना हो ! वादा तो प्रभु श्रीराम ने किया था अपने पिता दशरथ से जो उन्होंने पूरा किया ! वादा तो राजा हरिशचंद्र ने भी पूरा किया था , जिसके लिए उन्होंने अपना सब कुछ ऋषि विश्वामित्र को सौंप दिया था और वादे के लिए स्वयं और पत्नी बच्चे तक  को बेच दिया था ! खैर ये  तो हमारा महान इतिहास है ! जहाँ " प्राण जाय , पर वचन ना जाय " जैसे वादे किये जाते थे और उन्हें पूरे भी किये जाते थे  ! किन्तु आज  तो घोर कलियुग है और आज तो वादा निभाने वाली कोई कहावत ही नहीं है ! आज तो सिर्फ झूंठ, धोखा, फरेब, और वादाखिलाफी जैसे शब्द सुनाई देते हैं !हम बात करते हैं आज की , आज के नेताओं  की , या यूँ भी कह  सकते हैं , कलियुग के महान नेताओं  की , क्योंकि नेतागिरी का पहला उसूल , पहली सीढ़ी वादा करना ही है ! आज के नेता  अपने पूरे जीवन में एक-दो नहीं सेंकडों - हजारों वादे करते हैं !  देश से, देश की जनता से , अपनों से, अपने आप से , अपने कर्म के प्रति ईमानदार होने का , अपने फर्ज को पूरा करने के लिए वादा तो करते हैं , किन्तु वादा पूरा नहीं कर पाते ! आज तक नेताओं द्वारा  किये हुए  वादों पर वो  कितना खरा उतरे हैं ये बात हम सब बहुत अच्छे से जानते हैं ! उनका  लक्ष्य वादों को  पूरा करना नहीं है बल्कि लक्ष्य है अपनी तिजोरियों को भरना है ! आज के भ्रष्ट नेता जब  स्वयं के प्रति ईमानदार नहीं है , तो वो  नेता अपने द्वारा किये गए वादे  कभी भी पूरा नहीं कर सकते  ! आज जिसे देखो अपना किया वादा अपने द्वारा ही तोड़ रहा है ! देश के ऊंचे पदों पर बैठे  अधिकारी , डॉक्टर , पुलिस सभी अपना वादा भूल गए ! जो वादा उन्होंने आम जनता के साथ आम जनता की  भलाई के लिए किया था ! ऐसी कसमें खायीं ऐसे- ऐसे वादे किये कि , हर हाल में हम आम जनता का भला करेंगे ! अपने फर्ज के साथ कभी धोखा या बेईमानी नहीं करेंगे ! आज तक यह अपने वादे को कभी भी पूरा नहीं कर पाए ! गांधी जयंती पर हम सब वादा तो करते हैं   कि , हम अहिंसा का मार्ग अपनाएंगे , सदा सत्य बोलेंगे , चोरी नहीं करेंगे , और भी बहुत कुछ , किन्तु यह सिर्फ वादा है , एक मामूली सी बात , कह दिया और बस खत्म ! और अगले ही दिन हम सब अपने वादे से ऐसे मुकर जाते हैं ! जैसे हमने कभी कोई वादा किया ही नहीं था  और लग जाते बही बेइमानी करने ,  भ्रष्टाचार फ़ैलाने जो वर्षों से करते आये ! शिक्षक दिवस पर शिक्षक यह वादा तो करता है कि , वह अपने फर्ज को पूरी ईमानदारी के साथ निभाएगा , ( शिक्षा का व्यवसाय नहीं करेगा ) किन्तु  जैसे ही यह दिन निकलता है , शिक्षक भी भूल जाता है अपना किया हुआ वादा ! परिणाम हमारे सामने हैं ,  देश में कितने ही बच्चे आज शिक्षा से महरूम हैं ! अगर शिक्षक अपना किया वादा पूरा करें तो इस देश का भविष्य सुधर सकता है ! ( सरकार योजनायें और पैसा दे सकती हैं , पढ़ाना शिक्षक को ही होता है )  इस देश का हर नागरिक बड़े - बड़े वादे तो करता है किन्तु उन पर कभी भी अमल नहीं करता ! देश की  आन- बान -शान ,  राष्ट्र के प्रति ईमानदार और राष्ट्र के हित का वादा तो हम लोग करते  हैं , किन्तु  शायद ही उसे कोई पूरा करता हो ! क्योंकि राष्ट्र हित की बात करने वालों का आजकल इस देश में अकाल है !  जो इन्सान हमेशा अपने वादे पर खरा उतरता हैं उसे ही  हमें इस " देश का सर्वोच्य नागरिक " का खिताब देना चाहिए ! मुझे नहीं लगता कि , आज देश में एक भी ऐसा इन्सान है जो अपने द्वारा किये हर वादे पर खरा उतरा हो ! वैसे तो आज इन्सान , इन्सान ही नहीं रहा , इन्सान आज जितना मतलबी और स्वार्थी हो गया है , उसे  देखकर सुनकर यही लगता है ! " झूंठा है तेरा वादा "


धन्यवाद


6 comments:

  1. SAHI KAHA HAIN AAPNE KI VADA TO TUTH HI JATA HAIN.PHIR BHI YADI HUM APNE KIYE VADE NIBHA SAKE TO ACHA HOGA.

    ReplyDelete
  2. बहुत सत्य कथन,आज का इन्सान बचन बद्ध नहीं रहा |कहा जाता हें कि सच्चे का बोल बाला झूटे का मूह कला पर आज कल झूटे का ही बोल बाला हें चाहे बह प्रेमी हो या कोई नेता अभिनेता |लेकिन यह सत्य हें की झूट की बुनियाद मजबूत और उम्र लम्बी नहीं होती| और सत्य की" विजय" का इतिहाश गवाह हें |

    ReplyDelete
  3. वादा तेरा वादा...वादा तेरा वादा....
    आपने नेताओं के वादों पर जिस विश्लेषणात्मक ढंग से तथ्य प्रस्तुत किए हैं वह प्रशंसनीय है.
    लेख बहुत अच्छा है।

    मेरे विचार से हम मतदाताओं की भी गलती है जो नेताओं के वादों पर हर बार विश्वास करते हैं.

    ReplyDelete
  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
  5. वादे पर दुनिया कायम है, दुनिया चलाने के लिये वादा तो निभाना पड़ेगा।

    ReplyDelete
  6. वादे निभाए जाने की उम्मीद भी एक सहारा होती है , उससे क्यूँ चुका जाए !
    अच्छा लिखा है !

    ReplyDelete