Thursday, May 17, 2012

जब हम ही कार्टून हैं तो फिर .......>>>> संजय कुमार

सर्वप्रथम मैं आप सभी से माफ़ी चाहता हूँ ! मैं किसी को कार्टून नहीं कह रहा हूँ ! मैं तो सिर्फ उन लोगों को कार्टून कह रहा हूँ जिनकी हरकतें कार्टून के जैसी हैं ! सच कहूँ तो आज देश में स्थिती बहुत खराब है , किसी का कार्टून बनाना किसी को कार्टून कहना अपराध है ! अभी कुछ दिनों पहले हमारी " बंगाल एक्सप्रेस "  का कार्टून किसी ने बना दिया था , बेचारे बनाने वाले की क्या हालत हुई , पूरे देश ने देखी ! कुछ दिनों से " संसद " में हंगामा हो रहा है " बाबा साहब " के कार्टून को लेकर , जब कार्टून को लेकर इतना बबाल होता है तो फिर लोग कार्टून बनाते क्यों हैं ! कभी हमारे देवी-देवताओं के कार्टून बनाये जाते हैं तो कभी राष्टवीरों के ! " फेसबुक " के कार्टून बड़े ही खतरनाक होते हैं फेसबुक वाले किसी को नहीं छोड़ते ! हम और आप तो रोज अपने घरों में कार्टून बनते हैं ! मेरे घर पर मेरे दौनों बेटे मेरे पूरे परिवार को कार्टून कहते हैं,  तब तो हम बुरा नहीं मानते फिर यहाँ क्यों ? आप सोच रहे होंगे कैसे ? अरे भई सीधी सी बात है ....... जब बच्चे टेलीविजन देख रहे होते हैं और हम टेलीविजन बंद कर देते हैं तो बच्चे रोने लगते हैं और कहते हैं !  " पापा कार्टून .... पापा कार्टून "  अगर मम्मी बंद कर दें तो ...." मम्मी कार्टून .... मम्मी कार्टून ",  परिवार का कोई भी सदस्य हो तो वो कार्टून ही कहलायेगा ! मैं तो कहता हूँ , सच तो ये है हमने ही अपने बच्चों को कई बार कार्टून बनाया है ! कैसे ........... जब आप अपने छोटे बच्चों के साथ किसी के घर जाते हैं तो वहां क्या होता है ? हम अपने बच्चों से कहते हैं ........... बेटा नोज किधर है , तो बच्चा तुरंत अपनी नाक पकड़ लेता है , आईज कहाँ हैं ? इयर कहाँ है ? वगैरह ... वगैरह ....... अरे ऐसा होता है ! कहीं आप भी अपने बच्चों को किसी के सामने कार्टून बना के तो पेश नहीं करते .... यदि करते हैं तो प्लीज ना करें वो बच्चे हैं ! अरे आपकी प्रेमिका - पत्नि भी तो आपको कई बार कार्टून कहती है ! " एकदम कार्टून लग रहे हो " तो क्या कोई बबाल होता है , नहीं होता है ! इस देश का कडवा सच तो ये है यहाँ जीते जागते इंसान की कोई वेल्यु नहीं है और हम कार्टून को मुद्दा बना रहे हैं ! अरे जिनके कार्टून ( बाबा साहब ) पर इतनी बहस हो रही है कभी उनके द्वारा लिखे " संविधान " का किसी ने पालन किया , नहीं किया ? गरीब अपने हक के लिए कार्टून बना दर - दर ठोकर खाते घूम रहा है उसकी परवाह किसी को नहीं !  हम सब तो सरकार की नजर में वो कार्टून हैं जो हमेशा उनको सरकार चलाने में दिक्कत पैदा करते हैं ! कभी मंहगाई का रोना ,तो कभी भ्रष्टाचार का रोना रोते रहते हैं ! आज आम आदमी की जो हालत है उसे खुद समझ नहीं आता कि , हम इंसान हैं या कार्टून ?
आपको क्या लगता है ?

धन्यवाद 

13 comments:

  1. विवाद के लिये क्या विषयों की कमी थी कि एक और ठेल दिया।

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  2. कुछ तो लोग कहेगें, लोगो का काम कहना, छोडो बेकार की बातों को, कहीं बीत न जाए रैना,.......

    MY RECENT POST,,,,काव्यान्जलि ...: बेटी,,,,,
    MY RECENT POST,,,,फुहार....: बदनसीबी,.....

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  3. बंगाल एक्सप्रेस " का कार्टून ,,?

    :))

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  4. बंगाल एक्सप्रेस " का कार्टून ,,?

    :))

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  5. kartoon banne,banane ki parmpara bahut purani hai, hame is per bebajah bahas nahi karni chahiye.

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  6. " पापा कार्टून .... पापा कार्टून
    " मम्मी कार्टून .... मम्मी कार्टून

    "अगर कार्टून का चलन बच्चों तक सीमित रहें तो अच्छा लगता हें पर किसी मान सम्मानिये व्यक्तियों का कार्टून बनाकर उनका अपमान करना कोई अच्छी परम्परा नहीं हें ना यह शोभा देती हें(क्या बह हसी के पात्र हें) | और यदि उनके विरोद में या पक्छ में या उनके बारे में कोई लिखना चाहता हें तो बह छाया प्रति लगाकर भी लिख सकता |" तो फिर ये झमेला क्यों ."......?

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  7. सम्मान्निये व्यक्तियो को कार्टूनों की श्रेणी मे नहीं लाना चाहिए, बहुत अच्छी पोस्ट !

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    लिंक आपका है यहीं, मगर आपको खोजना पड़ेगा!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  9. विषय को विषयान्तर करना कौन सा मुश्किल काम है

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  10. सुन्दर! पहली बार आया हूँ, अब आता रहूँगा।

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  11. आज आम आदमी की जो हालत है उसे खुद समझ नहीं आता कि , हम इंसान हैं या कार्टून ?
    आपको क्या लगता है ?

    बहुत ही सामयिक प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट अमीर खुसरो पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  12. कार्टून कार्टून कार्टून ......सुन्दर प्रस्तुति!

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