Monday, March 8, 2010

मुझसे वेहतर कोई नहीं..............संजय कुमार

इस दुनिया मैं , इस कायनात मैं मुझसे वेहतर कोई नहीं है, और ना होगा, क्योंकि मैं सारे बन्धनों से आजाद हूँ मुझे कोई भी किसी जाती- धर्म , रंग - रूप अदि मैं बाँध नहीं सकता, नहीं मानता मैं कोई मजहब, ना मैं हिन्दू और ना ही मुसल्मा, मैं हूँ सबका प्यारा, नहीं मुझसा कोई सानी इस जहाँ मैं .....................

मैं संगीत हूँ, संगीत, इन्द्रधनुष के सात रंग हैं जैसे, बैसे ही बना हूँ मैं सात सुरों से, मेरी सरगम पर दुनिया थिरके मैं वह हूँ जो वारिस करा सकता हूँ , पानी मैं आग लगा सकता हूँ , मेरे नाम के तो बनते आये ऊँचे -ऊँचे घराने मेरे तो हैं कई नाम, हर क्षेत्र मैं मुझे अलग -अलग नामों से जाना जाता है, पूरे विश्व मैं सबसे ज्यादा दीवाने मेरे ही हैं , चाहे वो किसी भी रूप मैं हों....... क्या है कोई मुझसे वेहतर

मैं कभी माँ की लोरी मैं तो कभी पिता की थपकी मैं, मैं ईश्वरके भजन मैं तो अल्लाह की अजान मैं, मैं रोतों को हंसाता हसतों को रुलाता मैं सबकी खुशियों मैं तो गम मैं भी रहता हूँ साथ, हर जगह है मेरी पहुँच , अपनों ने भी चाहा मुझे और दुश्मनोने भी, लैला का मजनू तो कही सोहनी का महिवाल....... मैं निर्जीव मैं डाल सकता हूँ जान
तो हुआ न मैं सबसे वेहतर ........ क्या है कोई मुझसे वेहतर

पर जैसे - जैसे वक़्त बीत रहा है, मेरी परिभाषा बदल रही हैं, मेरा अस्तित्व कहीं न कहीं आज की आधुनिकता मैं खोता जा रहा है, अब मुझमें बो दम नहीं रहा जो पहले हुआ करता था, पहले कभी मैं नौ रत्नों मैं गिना जाता था, अब बो बात नहीं हैं , अब मेरा निर्माण ठीक ढंग से नहीं हो रहा है, और अब मेरे चाहने वाले भी कम होते जा रहे हैं, अब उलटे सीधे तरीके से मेरा निर्माण कर सिर्फ पैसा बनाया जा रहा है, अब मेरी पुरानी ताक़त पुराना नाम लगभग मिटता सा जा रहा है, किर्पया मुझे बचाओ, मैं आपकी धरोहर हूँ , मुझे पहचानो, इसलिए मैं कहता हूँ की
मुझसे वेहतर कोई नहीं है ................मैं सदा अमर रहूँगा

सा रे गा माँ पा धा नी सा ...................

12 comments:

  1. sanjayji...bilkul sahi kaha aapne...sangeet ki koi seema nahi koi dharm koi jaati nahi...bahut khoob

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  2. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  3. बहुत खूब, लाजबाब !

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  4. abhi lab me hoon... padh kar comment karne raat me ata hoon :)

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  5. अच्छी प्रस्तुति!

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  6. कोई संदेह नहीं संगीत सभी दुनियावी इतर चीज़ों से परे एक अलैकिक अनुभूति है ! शायद ही कोई ऐसा होगा जो इससे प्रभावित ना होता हो !

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. बहुत ही सुन्दर,एकदम आज़ाद,अच्छी अभ्व्यक्ति ,
    विकास पाण्डेय
    www.विचारो का दर्पण.blogspot.com

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  9. Sanjay ji.. kahne me koi hichak nahin ki bahut tezi se aap behtar se nahtar lekan seekh rahe hain.. ab tak ka sabse sundar aalekh hai ye.. maza aa gaya.. :)
    aabhar
    Jai Hind...

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  10. dear dipakji aap jaise achhe lekhak
    ke saath mai aage aur achha kihne ki
    koshish karoonga

    aap ko dhanyabad

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