Thursday, August 4, 2011

गुजरा ज़माना .........>>>> संजय कुमार

मुददतों से उनकी सूरत नहीं देखी
एक बार देखी थी बस
वहीआँखों से ओझल नहीं होती
हाँ घुलते रहे शब्द , तुम्हारे महीनों
कानों में मेरे
पर अब वो कानों से बहजाने का
नाम नहीं लेते
हाल जो अपने दिल का तुमने
उतारा था दिल में मेरे
निशां अब वो मिटने का
नाम नहीं लेता
दर्द के कफ़न में कबसे
लिपटा है वो गुजरा जमाना
वक़्त उसको दाग देने का
नाम नहीं लेता !


( प्रिये पत्नि गार्गी की कलम से )
धन्यवाद




14 comments:

  1. शब्दों को चुन-चुन कर तराशा है आपने ...प्रशंसनीय रचना...संजय जी

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  2. बहुत ही अच्छी रचना।

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति , सुन्दर भावाभिव्यक्ति

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  4. बहुत सुन्दरता से आपने शब्दों को उतारा है .....आपका आभार

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  5. गार्गीजी को इतनी सुन्दर रचना के लिए ढेर सारी बधाई ...

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  6. उफ़ दिल के हाल को बहुत ही करीने से उतारा है लफ़्ज़ो मे।

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  7. बहुत अच्छी रचना...

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  8. kamaal ka likha hai...

    http://teri-galatfahmi.blogspot.com/

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  9. खूबसूरत अभिव्यक्ति....
    शुभकामनायें आपको !

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  10. एक बार देखी थी बस
    वहीआँखों से ओझल नहीं होती

    :))

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  11. बहुत ही प्यारी रचना ,,, शब्द बहुत कुछ कहते हुए से है ...
    आभार
    विजय

    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

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