Wednesday, November 24, 2010

देश की नयी महामारी ( हड़ताल और पुतले ) .... >>>> संजय कुमार

आजकल हमारे देश में एक चीज अब नियमित सी हो गयी है , और वो चीज है देश में हड़ताल और बात बात पर पुतलों का जलाना ! आज देश में जिसे देखो, जब देखो , मतलब और बिना मतलब के कभी भी कहीं भी हड़ताल कर देता है ! और ठप्प कर देता है , चलता फिरता सामान्य जनजीवन ! देश के किसी भी शहर के चौराहों पर रोज-रोज पुतलों का जलना अब आम बात हो गयी है ! भ्रष्टाचार के खिलाफ , मंहगाई के विरोध में , आतंकवाद का पुतला , कभी विरोधी पार्टी के नेताओं का , तो कभी धर्म को लेकर, आरक्षण का पुतला तो कभी RSS के " सुदर्शन " का ! अब देश में पुतलों का जलना और हड़ताल कोई नयी बात नहीं है ! देश में हड़ताल होना और पुतलों का जलाना अब एक नयी महामारी का रूप लेती जा रही है वह भी ऐसी की जिसको खत्म करने का कोई ओर- छोर दूर दूर तक नजर नहीं आता ! फिर चाहे इस रोज रोज की हड़ताल से देश की अर्थव्यवस्था रूकती हो तो रुक जाये, करोड़ों का नुकसान होता है तो हो जाये ! एक बीमार आदमी राश्ते में दम तोड़ता है तो तोड़ दे फर्क नहीं पड़ता, हड़तालियों का क्या जाता है ! छोटे छोटे मासूम बच्चे दूध की एक एक बूँद को तरस जाएँ तो क्या ! पर हड़ताल बालों पर ऐसा जूनून सवार होता है कि, उन्हें यह सब मंजूर है , उन्हें हर हाल में हड़ताल करना है , जैसे की ये हड़ताली, देश की काया ही पलट देंगे , सब कुछ ठीक कर देंगे एक ही दिन में , सब कुछ करेंगे किन्तु हड़ताल करना बंद नहीं करेंगे ! आज हड़ताल से लोगों का सिर्फ नुकसान हो रहा है और नुक्सान के अलावा कुछ नहीं ! क्या हम सब यह नहीं जानते कि , हड़ताल करने से आज तक कितनी समस्याए हल हुई हैं और कितनी समस्याएं पैदा हुई हैं ! क्या आज हर समस्या का हल सिर्फ हड़ताल है ? एक वक़्त था जब लोग अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए, अपनी बात सरकार के समक्ष रखने के लिए विरोध करते थे , पर उस समय विरोध होता था , किन्तु सही तरीके से और पूरी योजनाओं के साथ वह भी मान-मर्यादा और मानवता को ध्यान में रखते हुए , और तब होता था हड़ताल का सही असर जिससे सरकार की नींद उड़ जाया करती थी , पर अब नहीं , अब तो सरकार ही हड़ताल करवाती है , और पता नहीं क्या क्या ! आज देश में होने बाली हड़ताल है देश के नेताओं की एक सोची समझी चाल है जो अब आम जनता समझ चुकी है !
हड़तालियों ने जब चाहा हड़ताल कर दी , पर उसका असर किन किन लोगों पर पड़ेगा , और उसका परिणाम क्या होगा ? नहीं जानते या जानबूझकर अनजान बनते हैं , आज कल हर पार्टी अपना उल्लू सीधा करने के लिए जब चाहे देश में हड़ताल करबा देती है ! हड़ताल कराने बाले सिर्फ अपना फायदा सोचते हैं , और भूल जाते हैं उन लोगों की तकलीफ और दर्द जो इस आये दिन होने बाली हड़ताल से पीड़ित होते हैं ! इस रोज रोज की हड़ताल से सबसे ज्यादा तकलीफ उन गरीब , मजदूर , ठेला चलाने बाले , रिक्शा चलाने बाले और रोजनदारी पर लगे , लोगों को होती है जो प्रतिदिन कुआँ खोदकर पानी पीते हैं , अर्थात प्रतिदिन की आमदनी से अपना भरण-पोषण करते हैं ! यदि वह एक दिन काम ना करें तो उस दिन उनके घर में चूल्हा नहीं जलेगा और सोना पड़ेगा उनको, उनके परिवार को वह भी भूखा -प्यासा , इस हड़ताल का असर पड़ता हैं उन लोगों पर, जो दूर गाँव से शहरों में रोज आते हैं रोजी रोटी की तलाश में की उन्हें शहर में काम मिलेगा जिससे वह अपना गुजारा कैसे ना कैसे कर सकें , क्या गुजरती है उन पर यदि एक दिन हड़ताल हो जाये और उन्हें काम ना मिले ? क्या कभी सोचा है हड़तालियों ने ? कितना कोसते है इन हड़तालियों को, ऐसे पीड़ित लोग ! सिर्फ यह लोग नहीं हैं , और भी लम्बी फेहरिस्त है ऐसे लोगों की जो दुखी हैं , इस आये दिन होने बाली हड़ताल से , और उनके दिल से निकलती है सिर्फ एक ही बात !
सत्यानाश हो इन हड़ताल कराने बालों का ........................ आज रोज - रोज होने बाली हड़ताल ने रूप ले लिया है एक महामारी का , जो धीरे धीरे हमारे देश और समाज में फ़ैल रही है ! क्या इस महामारी का कोई इलाज है आपके पास ?

धन्यवाद

7 comments:

  1. विपक्ष सरकार नही चलने दे रहा लोग देश नही चलने दे रहे-- अब तो राम ही राखा है इस देश का।

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  2. sachmuch haratal our putle jalana mahamari hai...iske bhi teeke khoje jaane chaahiye.

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  3. ... gambheer samasyaa ... upaay ... !!!

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  4. sir mere samjh me to ab hadtaal bahut kam hote hai, agar aap aaj se 20 saal pahle ka ithaas dekhe to odhyogik aur raajnitik hadtaal ki sankhya bahut jyada thi. aur jahan tak putla phukane ka sawal hai to, ye to loktantra me birodh ka ek jariya maatr hai.

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  5. हड़तालियों ने जब चाहा हड़ताल कर दी , पर उसका असर किन किन लोगों पर पड़ेगा , और उसका परिणाम क्या होगा ? नहीं जानते या जानबूझकर अनजान बनते हैं ,
    मई तो इतना जनता हूँ इन सब के बिच बिचारे गरीब मारे जाते है

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  6. गंभीर समस्या पर बहुत बेबाकी से लिखा है ! भविष्य के लिए शुभकामनायें !

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