Tuesday, October 12, 2010

झूंठा है तेरा वादा , झूंठी है तेरी कसमें ....>>> संजय कुमार

आपने राजेश खन्ना पर फिल्माया यह गीत जरूर सुना होगा जो फिल्म " दुश्मन " का है ! " झूंठा है तेरा वादा , वादा तेरा वादा , वादे पे तेरे मारा गया बंदा मैं सीधा-साधा , " झूंठा है तेरा वादा " इस गीत में हीरो अपनी महबूबा को उसका वादा याद दिलाता है ! जो शायद वह भूल गयी हो , खैर जाने देते हैं , ये तो फ़िल्मी वादे हैं , इनका क्या ! यहाँ ना तो किसी ने मुझसे कोई वादा किया है , और ना ही तोड़ा है , और ना यहाँ कोई लैला-मंजनू , सोहनी-महिवाल , हीर-राँझा की बात हो रही है ! यह तो बो लोग हैं जिन्होंने एक-दूसरे को किये वादे को पूरा किया , चाहे फिर एक साथ अपनी जान देने का वादा ही क्यों ना हो ! वादा तो प्रभु श्रीराम ने किया था अपने पिता दशरथ से जो उन्होंने पूरा किया ! वादा तो राजा हरिशचंद्र ने भी किया था , जिसके लिए उन्होंने अपना सब कुछ ऋषि विश्वामित्र को सौंप दिया ! और वादे के लिए खुद को बेच दिया ! खैर ये सब तो हमारा इतिहास है ! जहाँ " प्राण जाय , पर वचन ना जाय " जैसे वादे किये जाते थे और पूरे भी होते थे ! यह तो कलियुग है और आज तो कोई कहावत ही नहीं है ! आज तो सिर्फ झूंठ, धोखा, फरेब, वादाखिलाफी जैसे शब्द सुनाई देते हैं !

हम बात करते हैं आज की , आज के इन्सान की , या यूँ कह सकते हैं , कलियुग के इन्सान की , हम सब अपने जीवन में एक-दो नहीं हजारों वादे करते हैं , देश से, देश की जनता से , अपनों से, अपने आप से , दूसरों से , अपने कर्म के प्रति ईमानदार होने का , अपने फर्ज को पूरा करने के लिए , वादा करते हैं हर हाल में कर्तव्य को पूरा करने का ! किन्तु वादा पूरा नहीं कर पाते ! आज तक हम अपने द्वारा किये हुए एक भी वादे पर कितना खरा उतरे हैं , हम सब यह बात जानते हैं ! जब हम वादा पूरा नहीं कर पाते तो हम उसे पूरा ना कर पाने का सिर्फ बहाना ही ढूँढ़ते हैं ! वादा पूरा करने की कोशिश भी नहीं करते ! आज इन्सान स्वयं के प्रति ईमानदार नहीं है , और जो अपने प्रति , कर्म के प्रति , धर्म के प्रति ईमानदार नहीं है , वह अपना वादा कभी पूरा नहीं कर सकता ! आज बच्चे अपने माँ-बाप से वादा तो करते हैं कि उन्हें भविष्य में उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे अपने कर्तव्य को पूरी तरह निभाएंगे ! आज कितने बच्चे माँ-बाप से किया वादा पूरा कर रहे हैं ? नेता भूल गया जनता से किया हुआ वादा , साधू-संत भूल गए वह वादा जो उन्होंने इश्वर के समक्ष इन्सान को सही मार्ग पर ले जाने के लिए किया था ! और स्वयं अपने पथ से भटक गए ! आज जिसे देखो अपना किया वादा अपने द्वारा ही तोड़ रहा है ! देश के सभी नेता , मंत्री-संत्री , अधिकारी , डॉक्टर , पुलिस सभी अपना वादा भूल गए ! जो वादा उन्होंने आम जनता के साथ आम जनता कि भलाई के लिए किया था ! ऐसी कसमें खायीं ऐसे ऐसे वादे किये कि , हर हाल में हम आम जनता का भला करेंगे ! अपने फर्ज के साथ कभी धोखा या बेईमानी नहीं करेंगे ! आज तक यह अपने वादे को कभी पूरा नहीं कर पाए ! गांधी जयंती पर हम सबने वादा किया , कि हम अहिंसा का मार्ग अपनाएंगे , सदा सत्य बोलेंगे , चोरी नहीं करेंगे , और भी बहुत कुछ , किन्तु यह सिर्फ वादा है , एक मामूली सी बात , कह दिया और बस खत्म ! और अगले ही दिन हम सब अपने वादे से ऐसे मुकर जाते हैं ! जैसे हमने कभी कोई वादा किया ही नहीं ! और लग जाते बही भ्रष्टाचार फ़ैलाने जो वर्षों से करते आये ! शिक्षक दिवस पर शिक्षक यह वादा करता है कि , वह अपने फर्ज को पूरी ईमानदारी के साथ निभाएगा , जैसे ही यह दिन निकलता है , शिक्षक भूल जाता है अपना किया हुआ वादा ! और उसका परिणाम हमारे सामने हैं ! देश में कितने ही बच्चे आज शिक्षा से महरूम हैं ! अगर शिक्षक अपना किया वादा पूरा करें तो इस देश का भविष्य सुधर सकता है ! इस देश का हर नागरिक बड़े बड़े वादे तो करता है ! किन्तु उन पर कभी भी अमल नहीं करता ! देश कि आन- बान -शान और राष्ट्र के प्रति ईमानदार और राष्ट्र के हित का वादा हम लोग करते तो हैं , लेकिन उसे शायद ही कोई पूरा करता हो ! जो इन्सान हमेशा अपने वादे पर खरा उतरता हैं उसे ही " देश का सर्वोच्य नागरिक " का खिताब देना चाहिए ! मुझे नहीं लगता कि आज देश में एक भी ऐसा इन्सान है जो अपने हर वादे पर खरा उतरा हो ! वैसे तो आज इन्सान , इन्सान ही नहीं रहा , इन्सान आज जितना मतलबी और स्वार्थी हो गया है , जिसे देखकर सुनकर यही लगता है !

" झूंठा है तेरा वादा " " वादा तेरा वादा "

धन्यवाद

8 comments:

  1. मुझे नहीं लगता कि आज देश में एक भी ऐसा इन्सान है जो अपने हर वादे पर खरा उतरा हो ! वैसे तो आज इन्सान , इन्सान ही नहीं रहा , इन्सान आज जितना मतलबी और स्वार्थी हो गया है , जिसे देखकर सुनकर यही लगता है !


    संजय कुमार चौरसिया जी..
    .............आपसे बिलकुल सहमत हूँ |

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  2. यह गाना आज के नेताओं के ऊपर फिट है .... इनके कोई वादे तो कभी सच्चे साबित नहीं होते हैं ....

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  3. सार्थक और सराहनीय प्रस्तुती...लेकिन आज भी ऐसे एक-दो प्रतिशत इन्सान हैं जो हर संभव अपने कथनी और करनी में समानता रखने का प्रयास करते हैं तथा देश और समाज हित में ईमानदारी से कार्यरत हैं ...लेकिन उनके राह में आने वाली बाधाओं को हटाने का प्रयास इस देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री द्वारा भी नहीं किया जाता है जिससे ऐसे लोग चिंतनीय अवस्था में पहुँचते जा रहें हैं ......

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  4. लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

    मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

    भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

    थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

    http://umraquaidi.blogspot.com/

    उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
    “उम्र कैदी”

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  5. उम्दा सोच और लेखन संजय जी..

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