Saturday, February 18, 2012

जरूरतें बड़ी .......>>>> संजय कुमार

सपने मत देखिये 
जिंदगी एक हकीकत है 
स्वप्न नहीं !
ख्वाब मत बुनिये
बुनियादी जरूरतें इतनी हैं कि
ख्वाबों के लिए जगह नहीं !
जो मिल जाये 
उसमें खुश हो लीजिये 
क्योंकि 
खो जाता है इतना कुछ कि 
मिलने का उल्लास नहीं !
अगर जीवन के किसी पड़ाव पर 
आराम करने का है इरादा 
तो इरादा त्याग दीजिये 
क्योंकि कोई 
कितना भी थका हो 
मौत ही नसीब होती है 
आराम नहीं !
पुराने समय को छोडो 
बात ये आज की है 
आज भागमभाग है 
" जीवन की आपाधापी " है 
वक़्त छोटा होता जा रहा है 
जरूरतें बड़ी !

प्रिय पत्नी गार्गी की कलम से 

धन्यवाद 

10 comments:

  1. मेरा मानना है की स्वप्न तो बुनने चाहिए ... भले ही वो हकीकत बने या नहीं ...

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  2. baat to sahi hain ki ham bastbikta ko jaane aur sapno me na jiye.
    per ye baat bhi sahi hain ki sapne dekhan bhi jaruri hain kyoki sapne bhi unhi ke pure hote hain jo sapne dekte.Baise bahut achi lines likhi hain jo ydarth se paricit karati hain.

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  3. बड़ा सच है, पर सपने देखने की बीमारी पुरानी है।

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  4. बहुत बेहतरीन....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    कल शाम से नेट की समस्या से जूझ रहा था। इसलिए कहीं कमेंट करने भी नहीं जा सका। अब नेट चला है तो आपके ब्लॉग पर पहुँचा हूँ!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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  6. appreciable creation sundar hai shukriya ji /

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  7. बहुत सुन्दर सृजन , बधाई.

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  8. ये संसार इक सपनो कि नगरी हें |
    जिसमे हर इक इन्सान ने एक सपना देखा हें ||
    जिसने इसे साकार किया बह हकीकत हें |
    जो सपनो में ही जी रहा बह धोखा हें ||

    आपके द्वारा लिखी पंती हकीकत को दरसाती हें |
    और इन्सान को इन्सान कि जरूरतें खा जाती हें ||

    प्रेषक -शंकर

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  9. सुंदर भावनाओं की अर्थपूर्ण अभिव्यक्ति...

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