Tuesday, February 7, 2012

आँख वाले अंधों से जरा बचके चलिए ......क्योंकि ......" जान है तो जहान है " ....>>>> संजय कुमार

कहा जाता है इंसान का जीवन तो अनमोल है जिसका कोई मोल नहीं होता ! किन्तु आज किसी की भी जान लेना कुछ लोगों के लिए मानो जैसे कोई खेल हो ! इंसान , इंसान नहीं जैसे कोई कीड़े - मकोड़े हों ! आज दूसरों की लापरवाही से कई परिवार तबाह और बर्बाद हो गए हैं ! उदाहरण तो कई हैं ! कभी कोई बिजनेस मैन का बेटा शराब पीकर लापरवाही से गाडी चलाकर फुटपाथ पर सोये हुए, अपनी जिंदगी से लाचार और मजबूर इंसानों की जान ले लेता है ! तो कभी कोई अभिनेता अपने अभिमान में मदमस्त होकर ऐसे ही लोगों की जान पर बन आने वाले कारनामे कर देता है ! कुछ दिनों पहले हमारे पास के एक शहर में एक घटना घटित हुई ! बीच बाज़ार दो लोग आपस में लड़ रहे थे अचानक उनमें से एक ने पिस्टल निकाल कर दुसरे पर फायर झोंक दिया ,( गोली , मरने वाले का पता नहीं पूंछती ) गोली उस राह से गुजर रहे एक निर्दोष को जा लगी और देखते ही देखते उसने बीच सड़क पर दम तोड़ दिया ! बिना बात बिना कसूर एक निर्दोष मारा गया ! आज एक आम आदमी अपने घर से हंसी-ख़ुशी बाहर निकलता है और बिना बात मारा जाता है ! अभी पिछले हफ्ते एक महानगर में एक सिरफिरा एक बस को लापरवाही से चलाकर कई लोगों की जान ले लेता है और कईयों को बुरी तरह जख्मी कर देता है ! आज एक आम आदमी का तो सड़क पर पैदल चलना बहुत मुश्किल हो गया है ! कभी कोई ट्रक या बस किसी के मकान में घुस जाती है तो कभी दो लड़ते हुए लोगों के बीच समझौता कराने गए भले मानुष की जान चली जाति है ! कभी कभी इंसान " आ बैल मुझे मार " वाली कहावत में भी अपने प्राण गँवा देता है ! आज छोटे बड़े सभी शहरों में ट्राफिक इतना बड़ गया है कि इंसान के लिए पैर रखने की जगह तक नहीं है ! चारों ओर बेतरतीब दौड़ते वाहन ही वाहन ऐसा लगता है जैसे इंसानों का शहर नहीं लोहे से बने भूतों का शहर हो ! किन्तु सत्य तो ये है इस प्रथ्वी पर जिसने भी जन्म लिया है उसकी मृत्यु तो निश्चित है ! जरुरी नहीं आपकी किसी से दुश्मनी हो या ना हो ! भले ही आप अत्यधिक शराब का सेवन करते हों या ना करते हों ! भले ही आप पूर्ण रूप से स्वस्थ्य हो , आपको कोई भी बीमारी ना हो ! आपकी उम्र भले ही १० साल हो या ७० साल ! मौत तो कभी भी , कहीं भी , कैसे भी , किसी भी रूप में आ सकती है ! क्योंकि वो तो अटल है ! किन्तु किसी दुसरे की लापरवाही और बेफिक्री का भुगतान किसी को अपनी जान देकर चुकाना पड़े तो दिल को तकलीफ होती है और बहुत तकलीफ होती है ! क्योंकि किसी की लापरवाही से एक जिंदगी तो जाती ही है किन्तु उसके साथ कई जिंदगियां भी बर्बाद हो जाती हैं !
भले ही हम राह देखकर चलते हों , भले ही हमारी दोनों आँखें सही सलामत हों , अगर सामने वाला सही आँखें होते हुए भी अंधों की तरह चल रहा है तो ऐसे आँख वाले अंधों से बचके चलिए क्योंकि
............." जान है तो जहान है "

धन्यवाद

8 comments:

  1. सावधानी तो रखनी ही होगी..

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    1. " जान है तो जहान है "
      Bilkul sahee kaha aapne!
      Kshama karen....comment reply me de rahee hun kyonki comment box nahee khul raha.

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!

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  3. एकदम सटीक शिर्षक-----

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  4. सटीक बात...करे कोई भरे कोई|

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  5. bahut sahi baat likhi aap ne,aphli baar yhaan aana hua,acha likhte hai aap

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  6. सर ,
    आपके कहें अनुसार यह सच हें कि आंख बाले अन्धो से बचना बहुत जरुरी हें क्यों कि कुछ लोग जिन्दगी को खेल समझते हें और ऐसे जीवन यापन करना चाहते हें जेसे कि मोंत कभी आयेगी ही नहीं | और उनके कारण कई लोगों को समय से पहले सब कुछ खोना पड़ता हें क्यों कि जान हें तो जहान हें |

    प्रेषक -शंकर

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  7. अगर सामने वाला सही आँखें होते हुए भी अंधों की तरह चल रहा है तो ऐसे आँख वाले अंधों से बचके चलिए क्योंकि ............." जान है तो जहान है "
    .....सटीक बात...इन पंक्तियों का सच ..बहुत ही गहरे उतर गया

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