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Tuesday, February 1, 2011

सूत्र ........( जीवन के ) .......>>> संजय कुमार

सिखलाया गया था हमें , कि लड़ना है बुरी बात ,
माना हमने भी कि हाँ लड़ना है बुरी बात
पर ? जीना है अगर , तो है यही अच्छी बात
जूझने की अगर तुममें हो अधिक से अधिक क्षमता
तो है यही सबसे अच्छी बात
जिंदगी आसान नहीं इतनी अब
जितनी हुआ करती थी कभी
अब वो वक़्त नहीं
सूत्र भी वदल गए हैं ! वक़्त और हालात के साथ
बुरा था कल जो ,
आज बही अच्छा है ,
अपने थे कल सब यहाँ ,
खुद ही खुद के नहीं आज हम यहाँ ,
जूझ नहीं पाते अगर हम , तो खुद को मिटा लेते
रहते हैं अगर हम शांत
तो , लोग हमें रौन्धते हुए कुचल कर चले जाते हैं
दिए थे कुरुक्षेत्र में अर्जुन को , जो उपदेश श्रीकृष्ण ने
अपनाना पढ़ते हैं अब उन्हें जिंदगी के कुरुक्षेत्र में !
लागू होता अगर एक ही सूत्र
हर वक़्त हर जगह , तो --
अवतरित ना होते राम सतयुग के
द्वापर युग में कृष्ण रूप में
इसलिए खुद के आचरण पर
है अगर आंतरिक संतुष्टि तुम्हें
तो इस बात को जाने देना
कि लोग हैं क्या कहते !

( प्रिये पत्नी की कलम से )

धन्यवाद