मैं हूँ आपका करीबी दोस्त या कहें उससे भी बढकर ! मैं हमेशा रहता हूँ आपके दिल से चिपककर फिर चाहें उसका परिणाम अच्छा हो या बुरा अच्छा तो कुछ नहीं लेकिन दूरगामी परिणाम बुरे हैं ! खैर वाद में बात करते हैं ! अभी मैं अपने बारे में अपनी ताक़त के बारे में आपको बता रहा हूँ ! आज किसी छोटे मोटे देश की जनसँख्या उतनी नहीं है जीतनी संख्या में " मैं " हूँ ! मैं ना तो जात पात देखता हूँ , ना अमीर और गरीब का फर्क , ना दोस्त और ना दुश्मन ! मैं हूँ आपका मोबाइल और टेलीफोन ! इस आधुनिक दुनिया में पैसे के बाद सबसे ज्यादा अहमियत मेरी ही है ! एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को जितना प्यार नहीं करता होगा उससे कहीं ज्यादा वो मुझे प्रेम करता है ( कृपया , प्रेमी - प्रेमिकाएं नाराज ना हों ) आज एक छोटे से छोटा काम हो या कोई बड़ा हर काम मेरे बिना अधूरा है ! मैं बहुत खुश होता हूँ जब मैं दूर बैठे इंसानों की आपस में बात कराता हूँ और मैं चिट्ठी भी भेजता हूँ ! मुझ पर विडियो , फ़िल्में, गाने और भी मनोरंजन के साधन उपलव्ध हैं ! अब में " २ जी " " ३ जी " भी हो गया हूँ ! जब मेरा उपयोग अच्छे काम के लिए होता है, अच्छे सन्देश पहुँचाने के लिए होता है , जब मेरे द्वारा किसी के व्यवसाय में तरक्की होती है तो मन को बहुत ख़ुशी होती है ! और मैं अपने आप के होने पर गर्व भी महसूस करता हूँ , कि जैसे देश को जितनी जरूरत प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की हैं उतनी ही जरुरत मेरी भी , आज मैं बहुत खुश हूँ ........
पर ये क्या हो रहा है मेरे साथ , किन्तु मेरा उपयोग कम दुरूपयोग ज्यादा हो रहा है ! अरे इंसानों मेरा उपयोग तो सही से करो , आप लोग तो कभी - कभी अपनी जान की भी परवाह नहीं करते ! आप मेरा उपयोग करते समय कुछ तो ध्यान रखा करो क्योंकि जब आप गाड़ी चलाते हैं तो बिलकुल लापरवाह हो जाते हैं , ऐसा क्यों करते हो भाई क्या अपनी जान की भी परवाह नहीं ! कुछ तो शर्म करो, क्यों अपनी मौत का जिम्मेदार मुझे ठहराते हो , सरकार कितना आपको नियम कानून बताती है , पर आप लोग नहीं सुधरते और ना कभी सुधरेंगे ! गलती आप लोग करते हैं और भुगतना आपके परिवार को पड़ता है ! अरे भाई ऐसा ना करे ! मुझे तो उस वक़्त बहुत शर्म आती है जब आप लोग मुझे अपने घर के टायलेट और बाथरूम तक ले जाते हैं , ऐसा क्यों करते हो भाई ऐसा भी क्या ? कम से कम वहां तो चैन से जाइये ... ( निवेदन ) कृपया वहां पर मुझे ना ले जाएँ ! मुझे बहुत शर्म आती है , जब आप लोग मुझे किसी की शमशान यात्रा में ले जाते हैं , और वहां पर भी मेरा मुंह बंद नहीं करते , हद तब होती है जब " राम नाम सत्य है " की जगह " शीला - मुन्नी - पप्पू कांट डांस साला " बज जाता है ! उस जगह जो शर्मिंदगी मुझे होती है वो थोड़ी सी आप भी किया करो ! आज मुझे सबसे ज्यादा बदनाम होना पड़ा एक मंत्रीजी के कारण " विधानसभा " भवन जिसे हम मंदिर कहते हैं वहां बैठकर इतना घटिया काम ... इससे अच्छा होता मेरा उपयोग ही बंद हो जाए .......
वर्ना " मैं मोबाइल " हर बार ऐसे ही शर्मिंदा होता रहूँगा और ..... इन्सान बेशर्म का बेशर्म ...... मुझे तो बहुत शर्म आती है, और आप लोगों को .......... तो थोडा सा सोचिये ...
धन्यवाद