Wednesday, August 14, 2013

आजादी का जश्न मनाने से पहले , चलो मन से आजाद हो लें ( स्वतंत्रता दिवस ) ……>>>> संजय कुमार

हमारा देश अपनी आजादी के ६६ साल पूरे कर रहा है ! लेकिन आज़ादी के ६६  साल बाद भी हम आज़ाद होते  हुए भी कहीं ना कहीं गुलामी की मानसिकता में जकड़े हुए हैं ! आज भी ढेर सारी रूढ़ीवादी परमपराओं से हमारा देश उबर नहीं पाया है !  आज भी आज़ादी को लेकर हमारे मन में प्रश्न उठता है कि .... क्या हम आज़ाद हैं .....? जबाब हाँ भी है और ना  भी जो लोग हाँ में जबाब देते हैं उनका कहना है .... हमारे देश को आजाद हुए ६६  बर्ष पूरे हो चुके हैं  इन ६६  बर्षों में हम भारतवासियों  ने सही मायने में  आजादी का मतलब समझा और जाना है ! एक आजाद इंसान वो सब कुछ कर सकता है जो एक आम आदमी गुलाम होकर नहीं कर सकता हमारे देश ने  इन ६६  बर्षों में  बहुत तरक्की की है और आज भी विकास की ओर अग्रसर है ! आज भारत का नाम विश्व स्तर पर छाया हुआ है जिसे देख कर आज हर भारतीय अपने आप पर गर्व महसूस करता है ! पहले हमारी गिनती गुलाम और पिछड़े हुए देशों में आती थी किन्तु आज़ादी के बाद आज ऐसा नहीं है ! आज हमारा वर्चस्व हर क्षेत्र में है ! आज हमारा लोहा विश्व के कई देशों ने माना है ! हम हर क्षेत्र में उपलब्धियां हांसिल कर रहे हैं  ! विज्ञानं , खेल , तकनीकी , शिक्षा आदि में भारतियों ने सफलता के झंडे गाड़े हैं !
सच कहूँ तो हम कहने को तो आजाद हैं , किन्तु मन से आजाद नहीं हैं ! कहीं ना कहीं हम आज भी गुलाम हैं ! कुछ हालात से मजबूर , कुछ गरीबी से , कुछ पुरानी रूढ़िवादी प्रथाओं की जंजीरों में जकड़े हुए हैं ! आज देश के जो हालात हैं यहाँ जीवन यापन करने वाले लाखों - करोड़ों लोगों की जो हालत है उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि, ये लोग  तो आज तक आजाद ही नहीं हुए हैं और  इनकी हालत तो आज  गुलामों से भी बदतर है ! इससे तो ऐसे लोग अंग्रेजों की गुलामी में ज्यादा अच्छे थे , कम से कम एक बात तो अच्छी थी कि।  हमारे पैरों में गुलामी की बेड़ियाँ किसी दुश्मन ने डाल रखीं थीं , हम आशांवित थे कि , इस गुलामी से कभी ना कभी आजादी तो मिलेगी , किन्तु आज दुश्मन से ज्यादा बुरा सुलूक तो हमारे अपने हम से कर रहे हैं ! किन्तु हमें इन अपनों से  आजादी कौन दिलाएगा ! आज भारत में आजादी के इतने बर्षों बाद भी लाखों मजदूर गुलामों से भी बदतर ( बंधुआ मजदूर ) सा जीवन व्यतीत कर रहे हैं ! साहूकारी , खाप - पंचायत , ऊँच -नीच का भाव , जातिवाद , दहेज़ , विकृत मानसिकता जैसी कुरीतियाँ जिनसे  हम अभी तक आजाद नहीं हो पाए हैं ! आखिर हमें इनसे  कब मिलेगी आजादी ? हम कुछ जरुरत से ज्यादा आजाद हो गए और आजाद होकर हमने आजादी का गलत फायदा उठाया , फिर  चाहे वो हमारी बिगड़ी हुई लापरवाह और  लक्ष्य से भटकी हुई , अपने घटिया कारनामों से माँ - बाप का और इंसानियत का सिर शर्म से झुकाने वाली युवा पीढ़ी हो , फिर  चाहे देश के नामी- गिरामी राजनीतिज्ञ हों , आला अधिकारी हों , साधू -संत हों जिन्होंने आजाद देश को पूरी आज़ादी के साथ दुश्मनों की तरह लूटा ! सिर्फ अंग्रेजों की गुलामी से आजाद होना ही असली आज़ादी नहीं हैं ! आज देश के बुरे हालातों से हम सब बुरी तरह घिरे हुए हैं आखिर उनसे आज़ादी कब  मिलेगी ? दिन -  प्रतिदिन बढ़ती हुई महंगाई से कब मिलेगी आज़ादी ?  दिन-प्रतिदिन बढ़ते पाप-अत्याचार , जुल्मों-सितम से कब मिलेगी आज़ादी ? पूरा देश बेईमानों , घूसखोरों , घोटालेबाजों , भ्रष्टाचारियों के चंगुल में फंसा हुआ है .. कब मिलेगी इनसे आज़ादी ? अजन्मी बच्चियों , निर्दोष मासूमों , दहेज़ के लिए जलाई गयी बेटियों के कातिलों से कब मिलेगी आज़ादी  ?  मासूम बच्चों को मिड डे -मील जैसे हादसों से कब मिलेगी आजादी ? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका जबाब शायद हम सभी के पास है और जबाब शायद ना में है ! फिर भी हम पूरी तरह से आजाद हैं अपनी बात रखने के लिए ! अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए ! अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए ! आजादी का सही मतलब क्या है ? ये हमें जानना होगा ! एक दिन का जश्न मनाने से कुछ नहीं होगा ! हमें अपने मन से भी आजाद होना होगा ! जो इंसानियत , भाईचारे , प्रेम - एकता से भरा हुआ हो ! 

आप सभी साथियों एवं समस्त देशवासियों को " स्वतंत्रता दिवस " की ढेर सारी बधाइयाँ और शुभ-कामनाएं देता हूँ ! 
आइये हम सब अपने मन में उठने वाले नकारात्मक विचारों से आजाद होकर इस पर्व को ख़ुशी- ख़ुशी  मनाएं !

जय हिन्द …… वन्दे मातरम् ……… ……  इन्कलाब जिन्दाबाद …… जय हिन्द 

धन्यवाद   


9 comments:

  1. सच है , मन से स्वत्रंत्र होना अब भी बाकी है ...

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  2. आपने सही कहा बहुत से अनुत्तरित सवाल है,

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  3. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,

    RECENT POST: आज़ादी की वर्षगांठ.

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  4. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,

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  5. खुबसूरत अभिवयक्ति...... आपको भी स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक मंगलकामनाएँ....

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  6. सुंदर सटीक सार्थक लेखन |
    “अजेय-असीम"

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