Saturday, February 2, 2013

" गाँधी जी " के प्रति हमारा नजरिया .......>>> संजय कुमार

हर इंसान के जीवन  जीने के अपने अपने सिद्धांत होते हैं ! कुछ लोग जीवन के लिए बनाये गए लाभप्रद सिद्धांत और नियमों का पालन करते हैं तो  कुछ लोग उनका उलंघन भी करते हैं ! हर इंसान का सोचने समझने का नजरिया अलग- अलग होता है ! एक इंसान किसी के लिए अच्छा तो किसी के लिए बुरा होता है ! यहाँ हम " श्री राम " का अनुशरण भी करते हैं तो कई लोग " रावण "को भी अच्छा मानते हैं ! हम यहाँ ...  " रानी लक्ष्मीबाई " भगत सिंह " को भी पूजते हैं और " महात्मा गाँधी जी " को भी ....... आज हम युवाओं से  " भगत सिंह " जैसा देशभक्त बनने की उम्मीद रखते हैं  तो दूसरी ओर " गांधीजी " के अहिंसात्मक गुण को अपनाने की सलाह भी देते हैं ..... फिर भी  लोग क्या चुनते हैं ये उनका अपना - अपना नजरिया होता है ! " गांधीजी " के प्रति आज का इंसान क्या सोचता है , उनको किस तरह देखता है, उनके द्वारा किये गए कार्यों से क्या शिक्षा लेता है , उस पर मैं भी अपने कुछ विचार व्यक्त करना चाहता हूँ ! हर व्यक्ति " गांधीजी " को अपने - अपने नजरिये से देखता है ! कोई उन्हें अपना आदर्श मानता है और उन पर चलने की कोशिश भी करता है , कोई उन्हें चौराहे के बीच में खड़ी सिर्फ एक मूर्ति के रूप में देखता है ,  कई सरकारी अधिकारीयों के लिए " गाँधी जी " के प्रति उनकी सोच और उनका नजरिया उनके ऑफिस में टंगी एक बेजुबान तस्वीर के रूप में , गरीबों के लिए कोई नई योजना और नई  स्कीम के रूप में , अमीरों को " गांधीजी " सिर्फ नोट ( भारतीय मुद्रा ) में नजर आते हैं ! स्कूल के बच्चों के लिए सिर्फ उनकी कोर्स की किताबों में ...... कुछ लोग उन्हें सिर्फ 2 अक्टूबर को याद करते हैं ..... उस  दिन कुछ लोग खुश होते हैं ( आज छुट्टी का दिन है , आराम का दिन है ) ..... कुछ लोग दुखी भी होते हैं ( क्योंकि देश की सभी मधुशालाएँ बंद होती हैं ).... सभी का अपना अपना नजरिया है ! कुछ ग्रामीण इस लिए खुश होते हैं क्योंकि उनके गाँव में बनने वाली सड़क का नाम " गांधीजी " के नाम पर रखा जाता है ! लगभग हर बड़े शहर में आपको M G Road भी मिल जायेगा !  
समझ नहीं आता की " अहिंसा " के पुजारी का चित्र भारतीय मुद्रा पर क्यों छापा जाता है ....? क्योंकि आज हिंसा का कारण ये रुपया-पैसा ही है ! जहाँ आज भाई , भाई का गला काट रहा है ..... जहाँ चंद रुपयों के लिए एक पिता अपनी ही बेटी का सौदा कर बेच देता है .... जहाँ चारों ओर रूपये पैसे के लिए रक्तपात मच हुआ है ! तो क्या इस मुद्रा के लिए होते रक्त पात और हिंसा से  " गांधीजी " की आत्मा को शांति मिलती होगी ....? गांधीजी ने तीन बंदरों को लेते हुए अपना सन्देश आम जन तक पहुँचाया था कि , " बुरा मत देखो " बुरा मत बोलो " बुरा मत सुनो " ....... इस सन्देश पर भी  आज के हालातों को देखते हुए कई लोगों का अपना अपना नजरिया है , और ये आज हो भी रहा है ...... " अगर किसी के साथ बुरा हो रहा हो तो , आप अपनी आँखें बंद कर लीजिये " यदि आपके साथ कुछ गलत हो रहा हो तो , आप उसका विरोध करने के लिए अपना मुंह मत खोलिए "  अपने मन की आवाज कभी ना सुने " .... ये सभी बातें आज का कड़वा सच हैं !   
अभी दो दिन पूर्व " गांधीजी " की पुण्यतिथि पर हमारे " फेसबुक " मित्रों ने अपनी अपनी तरह से उन्हें याद किया ...... कुछ ने लिखा .. " मुझे गांधीजी के पास जाना है , रिजर्वेशन नहीं मिल रहा , उस पर किसी ने जबाब दिया " नाथूराम गोडसे से संपर्क करें " ... किसी ने लिखा " रघुपति राघव राजा राम - देश बचा गए नाथूराम " 
आज देश की स्थिति बहुत ख़राब है ..... चूँकि हमने आजाद भारत में जन्म लिया इसलिए हमारे पूर्वजों द्वारा किये गए कार्यों  पर हम सिर्फ अपना नजरिया ही पेश कर सकते हैं ! क्या सही है , क्या गलत है , ये बात हम जानते ही नहीं ..... फिर हम हर बात पर अपना नजरिया ..... अपनी राय देते रहते हैं ! 
( आपका क्या नजरिया है ....... आप क्या कहते हैं )

धन्यवाद 


6 comments:

  1. बहुत ही रुचिकर और सुन्दर शब्द प्रवाह के साथ बहता चला गया क्या खूब नजरिया पेश किया है,आज तो ऐसा है की गाँधी जी के सिद्धांत कहें या उनके बन्दर दुनिया से नजरें मिलाने लायक नहीं रह गए क्योंकि अगर उन बंदरो की सुने तो खड़े चौराहे दिन दहाड़े लूट जायेंगे आप!हर इंसान के साथ बहुत सारे गुणों के साथ अवगुणों का उसके अन्दर समावेश भी हो जाता है पर फर्क तब काफी पड़ता है जब देश प्रभावित हो! बहुत खूब , शुभकामनाएं!

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  2. agar aaj gandhi G hote unke bandaro ki sankhya 4 hoti. 4th bandar apne dono hatho ko apne ling ko dhaka rakhta(uska arth hota bura mat karo).kadwa sach hai ye. lakin gandhi G ke charo bandaro se perna lo to aaj bhi sansar swarg se sunder ho jayega.........na ki gandhi G se.......kisi ki bhawnawo ko thes pahunchi ho to apna chota bhai samajh kar maf kar dena. bharat me vicharo ki abhivyakti ki swatantrta hai.

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  3. हमें तो सब अच्छे लगते हैं, किसी को उनमें भेद लगता हो तो वही अच्छा नहीं लगता है..

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  4. गांधी जी हमारे देश के आदर्श पुरुष है,,,फिर जाकी रही भावना जैसी ,,,,,,

    RECENT POST शहीदों की याद में,

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  5. भारत में लक्ष्‍मी को सात्विक रूप में ही देखा जाता है, इसलिए गांधीजी का चित्र हमारे रूपए पर है। वो अलग बात है कि अब हमारा नजरिया बदल गया है और हम धन को भी कालाधन मानने लगे हैं।

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  6. कई विचार अपने समयकाल में ठीक रहते हैं

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