Wednesday, February 24, 2010

मैंने देखा है सब कुछ

मैंने देखा है सब कुछ
मैंने देखा है, खिलखिलाता बचपन
डगमगाता यौवन, और कांपता बुढ़ापा
मैंने देखा है सब कुछ

मैंने देखी है बहती नदियाँ , और ऊंचे पहाड़
मैंने देखी है जमीं और आसमान
बारिस की बूँदें और तपता गगन
मैंने देखीं हैं खिलती कलियाँ और खिलते सुमन
मैंने देखा है सब कुछ

मैंने देखी है दिवाली , और होली के रंग
मैंने देखी है ईद , और भाईचारे का रंग
मैंने देखे मुस्कुराते चेहरे और उदासीन मन

मैंने देखा लोगों का बहशीपन और कायरता
मैंने देखा है साहश और देखी है वीरता
मैंने देखा इन्सान को इन्सान से लड़ते हुए
भाई का खून बहते हुए , और बहनों का दामन फटते हुए
मैंने देखा है माँ का अपमान, और पिता का तिरस्कार
मैंने देखा है सब कुछ
मैं कभी हुआ शर्म से गीला, तो कभी फक्र से
कभी जीवन की खुशियों से, तो कभी दुखों से
मैंने देखा प्रेमिका का रूठना , और प्रेमी का मनाना
मैंने देखा है सब कुछ

मैंने देखा लोगों द्वारा फैलाया जातिवाद और आतंकवाद
मैंने देखी इमानदारी और चारों और फैला भ्रष्टाचार
मैंने देखा झूंठ और सच्चाई
इंसानों के बीच बढती हुई नफरत की खाई
मैंने देखा है सब कुछ

मैंने देखे बनते इतिहास और बिगड़ता भविष्य
टूटतीं उम्मीदें और संवरता वर्तमान
मैंने देखा है सब कुछ

मैंने देखा है सब कुछ अपनी इन आँखों से
ये आँखें नहीं सच का आईना हैं
और आईना कभी झूंठ नहीं बोलता
हाँ मैंने देखा है ये सब कुछ .............................
सधन्यवाद

9 comments:

  1. ब्लागजगत में आपका शुभागमन!
    स्वागतम! स्वागतम!
    रचना भी सुन्दर है!
    word verification hata den.
    comment karne men dikkat hoti hai.
    bar-bar language badalni padati hai.

    ReplyDelete
  2. shastree jee se mai sahmat hoo . rachana acchee lagee .Shubhkamnae..aur swagat ise dharatee par blogwood kee......

    ReplyDelete
  3. ब्लागजगत मे आपका स्वागत है। और फिर दीपक जब खुद अच्छा लिखता है तो जरूर जिसका परिचय करवा रहा है वो अच्छा ही लिखता होगा बहुत पसंद आयी आपकी रचना
    मैंने देखे बनते इतिहास और बिगड़ता भविष्य
    टूटतीं उम्मीदें और संवरता वर्तमान
    मैंने देखा है सब कुछ
    एक स्च्चाई आपने ब्यान की है आज के हालात को देख कर मन मे यही तो आता है
    बहुत बहुत शुभकामनायें

    ReplyDelete
  4. स्वागत है जी आप का ब्लांग जगत मै, आप की यह रचना बहुत सुंदर लगी .
    मैंने देखा है सब कुछ अपनी इन आँखों से
    ये आँखें नहीं सच का आईना हैं
    और आईना कभी झूंठ नहीं बोलता
    हाँ मैंने देखा है ये सब कुछ .
    बहुत खुब , लेकिन भाई इसे हटा दो Word verification यह बहुत तंग करता है
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  5. Blogjagat mein aap ka swaagat hai ..aap achchaa likhate hain

    ReplyDelete
  6. aap sabhi ka main
    tahe dil se dhanyabad karta hoon,
    aap sabhi ko mera ye prayas achha laga
    aap sabhi logon ke asirvad se, mai aage aur achha likne ka pryas karoonga

    sadhanyabad
    sanjay kumar

    ReplyDelete
  7. Sanjay ji.. ye aapke qalam ki taqat hogi jo logon ko ye blog padhne par majboor kar degi.. :)

    ReplyDelete
  8. मैंने देखा है सब कुछ
    मैंने देखा है, खिलखिलाता बचपन
    डगमगाता यौवन, और कांपता बुढ़ापा
    मैंने देखा है सब कुछ
    Sundar rachana!
    Holi mubarak ho!

    ReplyDelete
  9. बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
    आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन

    Sanjay kumar
    HARYANA
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    ReplyDelete