Sunday, May 29, 2011

आज गरीबी , निगल रही है पूरा परिवार ......>>> संजय कुमार



वैसे तो हिंदुस्तान " अमीर लोगों का गरीब देश " है ! इस देश के चंद अमीर ही इस देश को और देश की आम जनता को चला रहे हैं ! अगर आप चारों तरफ नजरें दौड़ाकर देखते है तो हालात कई जगह वद से वद्तर हैं ! इस देश में आज सबसे ज्यादा दुखी और त्रस्त कौन है ? गरीब , मजबूर, लाचार , बेरोजगार वैसे ये सब गरीब की ही श्रेणी में आते हैं ! सच कहा जाए तो गरीब का ना तो कोई अपना होता है और ना ही उसका भगवान होता है , वो तो पैदा होता है सिर्फ जीवन भर तिल - तिल मरने के लिए , एक अभिशप्त की जिंदगी जीने के लिए ! आज मैं आपको एक ऐसी घटना बता रहा हूँ जो कि, गरीबी से पीड़ित परिवार की है ! घटना मेरे शहर " शिवपुरी " की है ! कल एक विधवा औरत ने गरीबी से तंग आकर आत्महत्या कर ली , और अपने पीछे छोड़ गयी छ : मासूम बच्चे और छ : मासूम बच्चों में दो बच्चे बिकलांग ( कोड़ में खाज वाली कहावत ) आज ये सभी बच्चे अनाथ हो गए ! अब क्या होगा इन बच्चों का ? कौन इन बच्चों का पालन - पोषण करेगा ? कौन उनको रोटी देगा ? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जबाब शायद ही किसी के पास हो ! जवान होती बेटी की शादी की चिंता , छोटे बच्चों का भरण-पोषण करने में नाकाम इस महिला ने गरीबी से अति त्रस्त होकर मजबूरी में यह कदम उठाया था ! हम लोग हमेशा कहते हैं आत्महत्या करना पाप है ! आत्महत्या कायर और कमजोर लोग करते हैं ! किन्तु यहाँ जिस तरह की स्थिती थी उस हालात में कोई क्या कर सकता था ! अगर देखा जाए तो गरीब कमजोर और कायर ही होता है क्योंकि उसको ऐसा हमारा सभ्य समाज ही बनाता है ! गरीब की मदद करने वाले कम और गरीब का उसकी गरीबी का मजाक उड़ाने वाले और कोई नहीं उसके अपने और हमारा सभ्य समाज ही होता है ! ये इस देश की कोई अकेली घटना नहीं है ! इस घटना में तो सिर्फ एक जान गयी है जबकि कई घटनाओं ने तो पूरा का पूरा परिवार ही नष्ट कर दिया ! कुछ दिनों पहले एक ऐसी घटना को पढ़ा जिसे पढकर दिल सिहर गया ! दिल को एक धक्का सा लगा, इस तरह की ख़बरें सुनकर , ये क्या हो गया आज के इन्सान को ? आज का कलियुगी इंसान कहें या गरीबी का शिकार , जो अपनों के खून से अपनी प्यास बुझा रहा है ! खबर यह थी कि एक पिता ने अपनी पांच मासूम बेटियों की कुल्हाड़ी से काटकर निर्मम हत्या कर दी ! घटना मध्य-प्रदेश के सीहोर की थी ! घटना का मुख्य कारण उसकी गरीबी और गरीबी में उसका पागल हो जाना , दिमाग काम न करना बताया गया था ! क्या ऐसा भी कहीं हो सकता है ? एक पिता एक साथ अपनी पांच-पांच मासूम बेटियों की हत्या कर सकता है ! उसने जिन्हें जन्म दिया ! वही पिता एक दिन उनका कातिल बन जाएगा ! क्या आज गरीबी इतनी अभिशापित हो गयी जो इस तरह के हादसे अब आये दिन होने लगे हैं ! यह भी कोई अकेली घटना नहीं थी ! इस तरह के और तथा इससे भी ज्यादा दिल को दहला देने वाली घटनाएं अब रोज-रोज सुनने को मिल जाती हैं ! आज गरीबी उस अजगर के समान हो गयी हैं जो अपने शिकार को एक ही बार में पूरा का पूरा निगल लेता है और जब तक उसके शिकार के प्राण नहीं निकल जाते तब तक नहीं छोड़ता ! आज यह गरीबी पूरा का पूरा परिवार निगल रही हैं ! जब तक गरीब इस गरीबी से तंग आकर सब कुछ खत्म नहीं कर देता तब तक वह चैन से नहीं बैठता ! आज गरीबी सब कुछ तबाह कर रही है और ले रही है कई मासूम और निर्दोष इंसानों की जान ! आज इन दिन- प्रतिदिन होने वाली मौतों का कौन जिम्मेदार है ? गरीबी, सरकार , सहकारी संस्थाएं , नेता या फिर बड़े-बड़े अधिकारी ! क्या इनमे से कोई भी इसकी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेगा ! किन्तु इन सब के पीछे यही सब लोग जिम्मेदार हैं ! हम जिम्मेदार जिम्मेदार ठहराते हैं गरीबी को ! इस गरीबी का असली कारण तो यही लोग हैं ! सरकार ने गरीबों के लिए हज़ार तरह की लाभ योजनायें चला रक्खी हैं ! जिससे यह गरीबी दूर हो जाए ! मसलन उनको बराबर काम मिले , उनके काम की सही कीमत , छोटे-छोटे लघु उद्योग , कुटीर उद्योग ! लेकिन गरीबी दूर होना तो दूर की बात है यहाँ तो गरीब को तो पता ही नहीं चलता की सरकार ने हम गरीबों के लिए कोई योजना भी बनायी है ! आज हर कोई गरीब का हक खाने को बैठा है ! आज के नेता नहीं चाहते की इस देश से गरीबी दूर हो क्योंकि , उनकी उनकी कुर्सी बनाने में इन गरीबों का बहुत बड़ा योगदान जो होता है ! सरकारी संस्थाओं की जो जिम्मेदारी होती है किन्तु वह ठीक ढंग से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं करते और गरीबों को उनके हक और अधिकारों के बारे में सही सही और पूर्ण जानकरी नहीं देते ! बड़े बड़े अधिकारियों के पास इन गरीबों की समस्याएं सुनने के लिए समय ही नहीं होता ! ( आज हर अधिकारी कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार में लिप्त है ) तो कहाँ से और कैसे जान पायेगा गरीब अपने हक और अधिकार ! इन सब से तंग आकर वह उठाता है इस तरह के दिल दहला देने वाले कदम ! आज इस गरीबी ने ना जाने कितने घरों को बर्बाद कर दिया है ! ना जाने कितने घरों को आगे बर्बाद करेगी ! इस गरीबी से निबटने का कोई रास्ता अब समझ नहीं आता ! कब बंद होगा यूँ परिवारों का बिखरना ?


धन्यवाद

12 comments:

  1. गरीबी से बड़ा कोई अभिशाप नहीं है,
    कोई गरीब रहे,
    राजा के लिये उससे बढ़कर पाप नहीं है।

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  2. आज देश के कुछ चंद लोगों को छोड़ कर सभी गरीबी/मंहगाई की इसी समस्या से झूझ रहे हैं

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  3. har tarah se gareeb hi to maara jaata hai...
    samvensheel chintansheel prastuti ke liye aabhar!

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  4. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (30-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  5. दुखद स्थिति ...........चिताजनक , विचारणीय लेख


    खड़ी गरीबी गाँव निगलती , धरे भयंकर वेश |

    कैसे अपना गाँव बचे अब कैसे अपना देश |

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  6. गरीबी किसको दिखाई देती है, हम देखते हैं की बहुत सी संस्थाएं है गरीबों के लिए कुछ कर रही है लेकिन क्या वे सचमुच सही व्यक्ति से लिए सहायता पहुँचाने का प्रयास कर पा रही हैं, शायद नहीं . कुछ गरीब तो ऐसे भी हैं की जिनके पास काम चाहने किए बाद भी काम नहीं है और वे हर कर आत्महत्या कर लेते हैं. हमारे राजाओं के पास समय कहाँ है? अपने तिजोरी भर जाए गरीब मरे तो मरे.

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  7. गरीबी एक अभिशाप है हमारे आज के विकसित समाज के लिए एक तरफ हजारों करोड़ खा के डकार भी न लेना और दूसरी ओर भुखमरी और कर्ज से मरना -ये सरकार भी निकम्मी है हमारे समाज के साथ -सुन्दर ये लेख -बधाई हों निम्न बहुत अच्छी पंक्तियाँ

    गरीब की मदद करने वाले कम और गरीब का उसकी गरीबी का मजाक उड़ाने वाले और कोई नहीं उसके अपने और हमारा सभ्य समाज ही होता है !
    शुक्ल भ्रमर 5

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  8. अच्छा विश्लेण किया है आपने... हार्दिक बधाई।

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  9. सरकार ही ऐसी हो तो क्या कोई खाए और क्या कोई न खाए ! अच्छा पोस्ट है जी !मेरे ब्लॉग पर जरुर आए ! आपका दिन शुब हो !
    Download Free Music + Lyrics - BollyWood Blaast
    Shayari Dil Se

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  10. हमारे भारत में गरीब लोग इस तरह के फ़ालतू बच्चे पैदा कर गरीबी को बढावा दे रहे है,
    ये लोग सोचते है कि ज्यादा बच्चों से ज्यादा कमाई होगी, लेकिन उस समय ये भूल जाते है कि इन्हे कमाने खाने बनाने लायक बनाना पडेगा,
    हमारे देश का ज्यादातर धन मात्र दस प्रतिशत लोगों के पास है,

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  11. संजय ! इस पोस्ट में जो कुछ लिखा है वो दुखद तो है ही ,एक परिवार का अनाथ हो जाना बहुत ही मार्मिक घटना है किन्तु उसका ज़िक्र कर देना मात्र ही तो आप जैसे संवेदनशील व्यक्ति के लिए पर्याप्त नही न्? हम कोशिश करे तो इन बच्चो को अच्छे परिवारों में गोद दे सकते हैं.मैं ऐसे कई परिवारों को जानती हूँ जो एक बच्चे के लिए तरस रहे हैं.
    रिश्तेदारों के साथ इन बच्चो का जीवन कैसा होगा हम सोच सकते हैं.
    जरा सी हिम्मत करो. इश्वर सब देख रहा है

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