Friday, February 18, 2011

खेलें हम जी जान से ... World-Cup --- 2011 ( दीजिये शुभ-कामनायें ) .... >>> संजय कुमार

कुछ दिनों पहले " आशुतोष गोवारीकर " की एक फिल्म आई थी जिसका नाम था " खेलें हम जी जान से " अभिषेक बच्चन , दीपिका पादुकोण अभिनीत ! यह फिल्म कब आई कब चली गयी किसी को पता तक ही नहीं चला ! फिल्म आधारित थी क्रांतिकारी प्रष्ट-भूमि पर ! भले ही इस फिल्म के क्रांतिकारी ना चले हों , किन्तु इस फिल्म के टाइटल से मुझे अपनी भारतीय क्रिकेट टीम का अचानक ध्यान आ गया ! अगर हमारी टीम वाकई जी जान से खेल गयी तो इस बार वर्ल्ड-कप भारत की झोली में आने से कोई रोक नहीं सकता ! इस बार फिर उम्मीदें जागी हैं , इस बार फिर तैयार है हम टेलीविजन से चिपकने के लिए ! पूरे देश की निगाहें इस बार भारतीय टीम पर हैं ! एक भारतीय होने पर हम गर्व करते हैं ! गर्व करते हैं अपनी टीम पर ! इस बार ऐसा " दे घुमाके " छूट जाएँ विरोधी टीमों के छक्के " सब खेलो " जी जान से "

गुजारिश है भारतीय टीम से ...........
१. सचिन तेंदुलकर ( जो सपना १० बर्ष की उम्र में देखा था , अब तो उस सपने को पूरा कर लो )
२. वीरेंदर सहवाग ( आतंकवादी विस्फोटों से जिस तरह भारत दहल गया , उसी तरह दहला दो विरोधियों को ये " मुल्तान के सुलतान " )
३. महेंद्र सिंह धोनी ( जो कपिल ने १९८३ में किया , अब वो तुम्हें करना है " माही " )
४. गौतम गंभीर ( अब है असली परीक्षा , अब देश के लिए हो जाओ " गंभीर " )
५. युवराज सिंह ( छक्कों के सिकंदर , माफ़ करना क्रिकेट में, अपनी शक्ति को याद करो हे" युवराज " )
६. विराट कोहली ( अभी तक जो किया वो कुछ नहीं था ! अब अपना विराट रूप दिखाना होगा )
७. सुरेश रैना ( अगर नहीं चले तो टीम में नहीं " रैना " )
8. युशुफ पठान ( तुम्हारा जो रौद्र रूप कुछ दिनों पहले देखा , अब बार - बार दिखाना होगा )
9. हरभजन सिंह ( हे भज्जी अब इस्तेमाल करना होगा अपने " दूसरा " का वर्ना अगली बार तुम्हारी जगह कोई दूसरा )
10. ज़हीर खान ( अपनी गेंदबाजी में लाओ हवा का बबंडर , ना रहे कोई टिका तुम्हारे सामने )
11. आशीष नेहरा ( जो वर्ल्ड- कप २००३ में किया , अब बही इस बार करना होगा , वर्ना समझ लो )
12. एस. श्रीसंथ ( बिल्ली के भाग से छींका टूटा , अब इस कहावत को चरितार्थ करो , जगह मिली प्रवीण की )
13. पियूष चावला ( अगर मौका मिला तो बता देना , " हम किसी से कम नहीं " )
१४. मुनफ पटेल ( कुछ ऐसा करो कि तुम्हें भी लोग जानने लगें )
१५. आर. अश्विन ( दुआ करो तुम्हें भी मौका मिले )

" गुजारिश " करो प्रार्थना , करो दुआ , दीजिये शुभ-कामनायें , अब सपना पूरा हो हम भरतीयों का , दिखादें अपने शेर अपनी बहादुरी क्रिकेट के मैदान में ......... आइये मिलकर दे शुभ-कामनायें अपनी क्रिकेट टीम को

धन्यवाद

Tuesday, February 15, 2011

क्या आपके पास वक़्त है ? क्या आपके पास खुशियाँ हैं ? ( सोचिये ) ..... >>>> संजय कुमार

आज हम सब जिस युग में जी रहे हैं उस युग को आधुनिक युग कहते हैं ! भागमभाग भरी जिंदगी , चारों और शोरगुल , चौबीसों घंटे जागने बाला इंसान , अपनों से दूर , अपनेपन से दूर , ना परिवार का साथ ना बच्चों के सिर पर हाँथ ! अगर कुछ है तो काम का बोझ , अशांत मन और सब कुछ अस्त-व्यस्त ! आज हम सब वक़्त के साथ - साथ चल रहे हैं या साथ चलना चाहते हैं ! अच्छी बात है क्योंकि वक़्त गया सो सब गया ! जो वक़्त के साथ नहीं चल रहे हैं उनकी दुनिया आम इंसानों से थोडा अलग - थलग होती है ! अगर इन लोगों ने वक़्त के साथ चलना नहीं सीखा तो वक़्त की मार सब कुछ अपने आप सिखा देगी ! वक़्त के साथ साथ चलते -चलते आज हम इतना आगे निकल आये हैं , कि ठहर कर लगता है जैसे सब कुछ पीछे छुट गया हो ! जब हम सब आधुनिक हो गए हैं, तो आधुनिकता का अच्छा और बुरा परिणाम भी हम लोगों को भुगतना होगा ! इस आधुनिकता के जितने फायदे हैं उतने ही नुक्सान ! आधुनिकता से देश एवं समाज जितना प्रगति कर रहा है ! विश्व पटल पर हमारा देश अपनी तरक्की का परचम लहरा रहा है ! चारों तरफ खुशनुमा माहौल ! सब कुछ इंसान के कड़े परिश्रम का फल ! इस तरक्की में इंसान अपना असली जीवन जीना भूल गया , और वो जीवन है चैन और सुकून , खुशियों भरे पल का ! सुकून इंसान के जीवन का वह पल है जिसके के लिए इंसान अपनी पूरी जिंदगी निकाल देता है ! फिर भी इन्सान पूरी उम्र तरसता रहता हैं बस उस एक पल के सुकून के लिए जो सुकून होता है सिर्फ क्षणिक भर का और कुछ पलों का ! और यह पल इंसान के जीवन में कब आते हैं और कब यह पल निकल जाते हैं इसका अंदाजा तो इंसान कभी लगा ही नहीं पाता ! जब इंसान हर तरफ से निराश और हताश जो जाता है तब फिर तैयार हो जाता है वह सब कुछ करने के लिए जो उसे एक पल का ही सही पर सुकून अवश्य दे ! इंसान को सुकून कब मिलता है ? क्या कोई है जिसने इस दुनिया में सुकून पाया हो ! मैं जब ढूँढने निकला तो मुझे एक भी नहीं मिला ! आज की भागदौड़ में हम अपने जीवन में कितना भी कर लें , कुछ भी कर लें पर सुकून तो जैसे हमसे इतनी दूर है कि लगता है हमारा पूरा जीवन ही निकल जायेगा ! इस एक पल के सुकून को हांसिल करने में !

" जीवन की आपाधापी " में इंसान आज इतना उलझा हुआ हैं जहाँ दिन प्रतिदिन बढ़ती समस्याएं , उस पर मंहगाई की मार पारिवारिक वातावरण में अपनेपन का अभाव ! आस -पास का प्रदूषित माहौल सब कुछ इंसान से उसकी खुशियाँ छीन रहा है ! जीवन में ढेर सारी उलझनें जिनसे निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा लगता है ! आज इंसान ने अपने आप को इतना व्यस्त कर लिया है कि, वह सुकून और ख़ुशी को महसूस ही नहीं कर पाता और जब महसूस करने का वक़्त आता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है ! जब इंसान अच्छे पलों को फायदा नहीं उठाता उन्हें खुशनुमा नहीं बनाता तब तक उसकी खुशियाँ उससे बहुत दूर हैं ! जब इंसान अपनी और परिवार की खुशियों में शामिल नहीं होता तब बह वह धीरे - धीरे दूर होता जाता है , अपनों से, अपने समाज से ! जब बह अपना ध्यान तक नहीं रखता फिर किसी और का का ध्यान कैसे रखेगा ! इंसान आज लगा हुआ है मशीनों कि तरह काम करने के लिए बह भी कभी ना रुकने बाले घोड़ों कि तरह !जब इंसान कभी ना खत्म होने बाले जीवन के कार्यों में जुट जाता है तो खुशियाँ और सुकून उससे कोसों दूर हो जाते हैं ! आज इन्सान ने अपनी जरूरतें इतनी पैदा कर ली हैं जिन्हें पूरा करते करते इंसान पर बुढ़ापा तक आ जाता है फिर भी जरूरतें कभी पूरी नहीं होती अपितु जरूरतें समय के साथ- साथ और बढ़ती जाती हैं ! एक समय था जब इंसान अपने जीवन में सुख और सुकून का अनुभव करता था ! तब इंसान आज की तरह आधुनिक नहीं था और ना ही उसकी जरूरतें ज्यादा थी ! उस वक़्त इंसान को चाहिए था रोटी -कपडा -मकान जो उसके पास होता भी था ! क्योंकि उस वक़्त इंसान थोड़े में ही सब्र कर लेता था ! उसका सबसे बड़ा हथियार सब्र था जो उसे हमेशा सुकून और सुख का अनुभव कराता था फिर वह पल, पल भर का ही क्यों ना हो ! तभी तो आज के कई बुजुर्ग यह कहते हैं कि, समय तो हमारा था जिसमें इंसान के पास सब कुछ था जो हमें चैन और सुकून देता था ! जितनी चादर उतना ही पैर फैलाता था और उठाता था जीवन में सुख और सुकून का आनंद ! लेकिन आज के चकाचौंध और भागमभाग माहौल में उसे यह सब कुछ देखने को नहीं मिलता !अगर जीवन में पाना है सुकून और सुख की अनुभूति ! तो जुड़े रहिये अपने परिवार के साथ, जुड़े रहिये अपने समाज के साथ अपने मित्रों के साथ समझें उन्हें और उनके महत्व को ! ना दौड़ें अंधों की तरह आधुनिकता और सब कुछ पाने के लिए ! आज इन्सान के शौक इतने हो गए हैं की जीवन भर वह उन्हें पूरा नहीं कर सकता !

इंसानी इक्षाएं तो अन्नंत हैं ..........जिनका कोई अंत नहीं ............ और सुकून होता है पल भर का ........तो उस पल को महसूस करें.............जीवन का आनंद उठायें ..............

धन्यवाद

Saturday, February 12, 2011

ये है तीन का तड़का ......>>>> संजय कुमार

जब हम छोटे थे तो स्कूल में या अपने यार दोस्तों के बीच एक शब्द कई बार सुनते थे कि, " तीन तिगाड़ा ,काम बिगाड़ा " इसका मतलब हुआ कि आप अपना  कोई भी काम औने -पौने में ना करें ! बड़े हुए तो देखा घर में " माँ " कभी भी थाली में तीन रोटियां नहीं रखती थी , रखती थीं दो या चार ! आज भी शायद यही स्थिती है हम सब  के घरों में ! ये कोई शगुन है या अपशगुन आज तक समझ नहीं आया !  मेरी नजर में चाहे एक हो या दो या हों तीन या चार सबका अपना -अपना अलग महत्त्व होता है ! आप जानते हैं  भगवान् शिव को " त्रिनेत्र  " कहा जाता है ! इंसान के जीवन में तीन का भी बहुत महत्त्व है ! महत्व तो बहुत सी चीजों का होता है बस फर्क सिर्फ इतना है कि हम उन्हें कितना महत्त्व देते हैं !  इंसान के जीवन से जुड़े " तीन " को हमें कभी नहीं भूलना चाहिए !  इंसान के जीवन से जुडी कुछ चीजें यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ ! ( कुछ अंश एक एस  एम्  एस से लिए गए हैं )

इंसान के जीवन तीन चीजें ऐसी हैं जो उसे सिर्फ एक बार मिलती हैं 
१. माता-पिता  ( इंसान की उत्पत्ति इन्हीं से होती है , ईश्वर से बढकर है ये )
२. जवानी        (  इंसान के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय , जीत सको तो जग जीत लो )
३. हुस्न           ( जवानी के साथ हुस्न भी अनमोल है , हुस्न गया सब गया, हुस्न के लाखों रंग - कौनसा रंग देखोगे  )

तीन चीजें इंसान को बहुत सोच समझकर उठानी चाहिए !
१. कदम         ( आपका उठाया गया एक गलत कदम आपका जीवन नष्ट एवं बर्वाद कर सकता है )
२. कसम        ( वादा करो तो ऐसा की " प्राण जाए पर वचन ना जाये " )   
३. कलम        ( कलम की ताकत को हम सब अच्छी तरह से जानते हैं , उठाओ सच्चाई के लिए ना की झूंठ के लिए ) 
तीन चीजें इंसान को बहुत सोच समझ का करना चाहिए , एक गलती जीवन भर भुगतान 
१. मोहब्बत    ( आज-कल मोहब्बत अंधी होती है , अब इसके बारे में क्या कहूं ? )
२. बात           ( अब बात कम बतंगड़ ज्यादा होता है वो भी गाली-गलौच और अशिष्ट )
३. फैंसला       ( आजकल सब्र पूरी तरह खत्म हो चुका है , फैंसला " ON THE SPOT "  )

इंसान के जीवन में तीन चीजें कभी इन्तजार नहीं करती  
१. मौत           ( रोज -रोज होते सड़क हादसों से लें सबक )
२. वक़्त         (  लोहा जब गर्म हो तो हतौड़ा मार देना चाहिए , वर्ना " पछतावे होत का जब चिड़िया चुग गयीं खेत " )
३. उम्र          ( उम्र कभी किसी का इन्तजार नहीं करती , जाग वन्दे अब ना जागेगा तो कब जागेगा )

इंसान को इन तीन चीजों को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए 
१. कर्ज       ( किसान का पूरा जीवन कर्ज में ही निकल जाता है )
२. फर्ज      ( फर्ज पर कुर्बान देश भक्तों को सलाम )
३. मर्ज़      ( एक चींटी हांथी पर भारी पड़ जाती है ) 

इंसान को दर्द होता है इन तीन चीजों से 
१. धोखा    ( आज पल -पल पर धोखा खाता इंसान , धोखा अब इंसानी फितरत बन गया है )
२. बेबसी  ( उफ्फफ्फ्फ़ ये बेबसी कब दूर होगी )
३. बेवफा  ( तेरी बेवफाई में ऐ सनम दिल दिया दर्द लिया )

तीन लोग इंसान को हमेशा खुश रखेंगी 
१. भगवान्  ( आज भी हम हर मुश्किल वक़्त में इन्हीं को  याद करते है )
२. दोस्त     ( सच्चे दोस्त पर सब कुछ कुर्बान )
३. मेरा ब्लॉग  (  जो नए नए व्यंग्य , सन्देश और विचारों से भरा होगा ) 

ये सब सच है ! कैसा लगा आपको ये तीन का तड़का , जरुर बताएं

धन्यवाद

Wednesday, February 9, 2011

क्या आपको कभी कोई पछतावा हुआ ? क्रोध एवं आवेश में उठाये गए कदम का .....>>>> संजय कुमार

कहा जाता है क्षण भर का आवेश और  क्रोध इंसान के जीवन-भर को कड़वाहट और दुखों से भर देता है ! शायद ही इस प्रथ्वी पर कोई हो जिसे कभी गुस्सा या क्रोध ना आया हो , इंसान तो क्या भगवान् भी इससे नहीं बच पाए !  क्या  कभी आपने सोचा है  आपका जरा सा क्रोध किसी की जान भी ले सकता है ! आप अपने क्रोध पर काबू ना पाकर , कई लोगों की जिंदगी में जहर घोल देते हैं ! इतना ही नहीं इस जहर से आप स्वयं भी नहीं बच पाते ! इसीलिए कहा जाता है इंसान के जीवन में सब्र एक महत्वपूर्ण गुण होता है ! जिन लोगों में सब्र की कमी है, जिन्हें जरा - जरा सी बात पर गुस्सा आ जाता है वे कभी  अपनी ऊंची मनोकामनाओं को पूरा नहीं कर सकते ! एक प्रतिभाशाली व्यक्ति भी अपने  गुस्से के कारण  कभी -कभी अपने उद्देश्य से पिछड़ जाता है ! हम लोग आये दिन ऐसी घटनाएं सुनते रहते है या अब ऐसी घटनाएं सुनने की आदत सी हो गयी है ! कहीं कोई किसी की हत्या कर देता है , कोई चोरी कर लेता है , तो कोई किसी को घायल कर देता है ! या फिर पूरा का पूरा परिवार ही खत्म कर देता है ! सिर्फ और सिर्फ आवेश या क्रोध में आकर ! इसका पछतावा इंसान को जब होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है ! जब एक साधारण इंसान सिर्फ अपने गुस्से के कारण अपराधी बनता है या ऐसा कोई अपराध करता है जिसकी सजा उसे पूरी जिंदगी कैद में रहकर गुजारनी पड़ती है तब जाकर उसे अपनी गलती का अहसास होता है ! किन्तु उसे अपने क्रोध की सजा के रूप में अपनी आजादी , अपना सुख -आनंद एवं शांति तक खोनी पड़ती है ! बहुत से लोग आज अपने क्रोध की सजा काट रहे हैं ! क्रोध में आकर पति, पत्नि पर  हाँथ उठा देता है और पत्नि , पति पर हाँथ उठा देती है ! पति-पत्नि  में इस तरह कि नौबत पूरे जीवन भर नहीं आणि चाहिए अगर इस तरह कि घटना कहीं हुई है तो उसे भूल जाना ही बेहतर होगा , वर्ना इस बात का गुस्सा या क्रोध जीवन भर एक दोसरे को अन्दर ही अन्दर दीमक कि तरह खता रहेगा ! कभी कभी इन दोनों के क्रोध की सजा बच्चों को भुगतनी पड़ती है ! कई घटनाएँ ऐसी देखि और सुनी कि , पति-पत्नि के झगडे में बच्चों को अपनी जान  से हाँथ धोना पड़ा , वो भी सिर्फ क्षणिक गुस्से के कारण !   क्रोध एवं आवेश का  सीधा असर आज वैवाहिक जीवन पर पड़ रहा है !  कभी - कभी बात इतनी बड़  जाती है की नौबत तलाक तक आ जाती है ! ऐसे  कई मामले हमने देखे हैं जहाँ छोटी सी बात पर सब कुछ तबाह हो गया ! आज हम लोग व्यर्थ का गुस्सा कर अपना जीवन तबाह कर रहे हैं ! हम लोग क्रोध में आकर  अपनों को अपमानित करने से भी नहीं चूकते , क्या ये सही है ? ऐसा नहीं है की  गुस्सा सिर्फ अनपढ़ और नासमझ को ही आता है बल्कि पढ़ा -लिखा और समझदार इंसान भी अपने  गुस्से  और क्रोध पर नियंत्रण नहीं रख पाता ! आज कल बड़े बड़े ऑफिस - कार्यालयों में काम करने बाले ऊंचे पदों पर वैठे अधिकारी और कर्मचारी भी गलतियाँ करते हैं ! कई बार एक बड़े अधिकारी को अपने गुस्से के कारण अपना पद तक छोड़ना पड़ा ! कई बार बड़े बड़े दूकानदार भी अपने विचार औरों पर थोपने के कारण अपना धंधा तक चौपट कर बैठते हैं ! कभी- कभी बात इतनी बड़  जाती है की गालियाँ और मारपीट तक हो जाती है ! उसके बाद क्या होता है ? यह बात हम सब अच्छी तरह जानते हैं और यह बात जानता है क्रोध करने बाला भी,  फिर भी क्रोध करता है ! कभी - कभी  ईर्ष्या , द्वेष  एवं प्रतिशोध की भावनाएं भी क्रोध का एक बहुत बड़ा कारण होती हैं ! आज तक बड़ी-बड़ी लड़ाईयां , झगडे , दुर्घटनाओं का कारण इंसान का क्रोध ही रहा है ! 
यह एक सच है जिसे हम जानते हैं पर मानते नहीं कि , क्रोध इंसान को चाट जाता है अन्दर तक खोखला कर जाता है ! आज इंसानों को होने बाली बड़ी-बड़ी बीमारी का कारण कहीं ना कहीं क्रोध और गुस्सा है ! आज के युग में स्वार्थ भी क्रोध का एक बड़ा कारण है !  एक बार गुस्सा होने पर एवं क्रोध दिखाकर हमारा मन बहुत समय तक अशांत एवं व्यथित रहता है ! 
आज इंसान, इंसान ना होकर एक मशीन बन गया है जिस तरह मशीन के दिल और भावनाएं नहीं होती ठीक उसी प्रकार आज का  इंसान भी अन्दर से खोखला और बेजान हो गया ! सब्र का दूर - दूर तक नामोनिशान नहीं ! अपनत्व कि कमी भाईचारा क्या होता है ? कब का भूल गए ," जीवन कि आपाधापी " में  ऐसे लगे हैं,  चौबीस घंटे काम और सिर्फ काम अब  ना दिन की खबर ना  रात का पता ! एक तो परिवार के लिए समय नहीं उस पर काम का बोझ , ऑफिस का तनाव फिर क्रोध और गुस्सा , आखिर इंसान करे तो क्या करे .........सिर्फ गुस्सा ही कर सकता है ! 
क्या  आपने भी कभी अपने जीवन में क्रोध एवं गुस्सा किया है , या कभी कोई ऐसा काम किया जिस पर आपको कोई पछतावा हुआ हो ........ यदि है तो बताएं ...... यदि नहीं , तो  अपने जीवन में पूरी कोशिश करें या अपने आप से वादा करें कि , कभी भी क्रोध एवं गुस्से में आकर कोई गलत कदम नहीं उठाएंगे .........


धन्यवाद 

Sunday, February 6, 2011

प्रभु का होना ....>>>> संजय कुमार

जो व्रत धरा वो व्यर्थ गया

पवित्र रहना सजा हो गया

जो तुमने सिखलाया था " माँ " मुझको

वो चरित्र भीड़ को गवारा ना हुआ

क्योंकि है, यह ज़माना कलियुग का

सतयुग कब का चला गया !

" अंत भला सो सब भला "

यह मुहावरा " अपवाद " हो चला

क्षणिक सुख की समझदारी --

जिसने यह समझ लिया

बही जमाने को भला लगा !

पर मेरा धीर अब टूट रहा

क्यों ? तुमने " माँ " मुझमें ये रमा दिया

कि,

" इंसान बही भाये जिसे सिर्फ  प्रभु का होना "




( प्रिये पत्नी गार्गी चौरसिया की कलम से )

धन्यवाद

Thursday, February 3, 2011

" मुंगेरीलाल " का हसीन सपना ..... ( व्यंग्य ) ....>>> संजय कुमार

आज बहुत दिनों बाद हमारे प्यारे " मुंगेरीलाल जी " ने एक सपना देखा है ! हालांकि सपने तो वो रोज देखते हैं ! किन्तु इस इस बार " मुंगेरीलाल " ने एक हसीन सपना देखा है ! वो भी दिन में , अक्सर कहा जाता है दिन में देखे गये सपने अधिकतर सच होते हैं ! उन्होंने अपने सपने में देखा, उनके चारों ओर पैसा ही पैसा है अब वह गरीब नहीं है !( ये सपना तो हर कोई देख रहा है ) उनके साथ -साथ अब कोई गरीब नहीं है ! महगाई भी अब (-) में आ गई है ! जिस तरह दिन-प्रतिदिन " संवेदी-सूचकांक " नीचे आ रहा है ! अब लोगों को १ किलो आलू खरीदने के साथ ५ किलो प्याज मुफ्त मिल रही है ! ( अच्छा ख़ासा मजाक है ) पट्रोल भी अब बहुत सस्ता हो गया है ! पेट्रोल अब पानी की तरह मिल रहा है वह भी बाल्टी भर-भर कर , इतना सस्ता की गरीब पानी की जगह पेट्रोल मांग रहा है ! फिर भले ही इस देश में " पानी मंहगा सस्ता खून " हो ! आज का युवा अब बेरोजगार नहीं है ! उसके पास ढेर सारा काम है ! आज का युवा नशे से कोसों दूर और संस्कारों से सरावोर है ! अब राजनीति और नेता भ्रष्ट नहीं है !अब राजनीति में जातिवाद और भाई-भतीजावाद नहीं है सभी को समान द्रष्टि से देखा जा रहा है ! अब ना ही आरक्षण है और ना ही आरक्षण का मुद्दा ! अब गरीब को दर-दर की ठोकर नहीं खाना पड़ती और ना ही ठण्ड में अपने प्राण गंवाने पड़ते हैं ! अब सबके सिर पर छत है ! अब देश में चारों ओर हरियाली और खुशहाली का वातावरण है ! अब देश में सोने की चिड़िया फिर से चहचहाने लगीं है ! आतंकवाद का तो दूर-दूर तक नाम नहीं हैं ! हिदू-मुस्लिम-सिख -ईसाई , सब भाई-भाई , अब यह सिर्फ एक जुमला नहीं बल्कि सच है ! " मुंगेरीलाल " एक ऐसी दुनिया में जा चुका था जहाँ सिर्फ अच्छा ही अच्छा था ! हर कोई अपनी मस्ती में चूर , गम का दूर दूर तक कोई नामोनिशान ना था ! अब कहीं लफड़े -झगडे नहीं , चोरी -चकारी , लूट खसोट नहीं ! अब प्रेमी-प्रेमिकाओं का प्रेम परवान चढ़ रहा है ! अब लैला - मंजनू , हीर -रांझा जुदा नहीं होते ! आज ना रावण है और ना कंस हर तरफ राम और श्याम हैं !

जब "मुंगेरीलाल " ने मुझे अपने इस सपने के बारे में बताया तो मुझे समझ नहीं आया की मैं उसे क्या जबाब दूं इस तरह का सपना सुनकर मैं दंग रह गया ! कुछ सोचविचार कर मैंने कहा " अरे मुंगेरीलाल तुम किस दुनिया में खोये हुए हो जागो जागो अब ज़माना बदल गया है ! अब इस तरह के सपने देखना छोड़ दो ! क्या कभी किसी के सपने पूरे हुए हैं आज तक जो तुम्हारा सपना पूरा होगा ! " अरे भाई सपने तो सपने होते हैं फिर सपने चाहे दिन में देखो या रात में वो पूरे नहीं होते ! अगर सपने पूरे होते तो आज "आडवानीजी " देश के प्रधानमंत्री होते ! आज बिहार में लालू की लालटेन भी जल गयी होती ! "सौरभ दादा " IPL में चुने गए होते ! कश्मीर पाकिस्तान का हो गया होता ! आज सलमान और विवेक की " ऐश " होती ! अरे कहाँ इन ख्यालों में खोये हुए हो ! इस तरह के सपने देखना अब आम जनता के लिए दंडनीय अपराध घोषित कर दिए जायेंगे ! तुम तो जानते हो हम आम इंसानों को पहले बड़े-बड़े सपने दिखाए जाते हैं, और फिर प्यार से उन्हें तोड़ दिया जाता है, या फिर उनके पूरे होने के कोई चांस नहीं होते ! जहाँ सरकार और मंत्री , चुनाव के पहले आम जनता से बड़े-बड़े वादे करते हैं सुनहरे सपने दिखाते हैं और फिर बही हमारे सपनों को तोड़कर चकनाचूर कर देते हैं ! माना कुछ लोग अपने सपने पूरे कर लेते हैं " रतन टाटा " ने नैनो के रूप में अपना सपना साकार किया लेकिन सरकार ने पेट्रोल के दाम बढ़ाकर गरीब का सपना तोड़ दिया ! अब गरीब कार तो क्या मोटर सायकल भी नहीं चला पा रहा ! माना सचिन ने २०० का सपना देखा और पूरा कर लिया , अरे भाई " " WORLD-CUP " तो अभी सपना ही है ! ( काश इस बार ये सपना सच हो जाए , सचिन के साथ पूरा देश इस सपने को देख रहा है ) अब सपने कहाँ पूरे होते हैं ! खासकर आम जनता जिसमें गरीब ,बेरोजगार , मजदूर को तो आज सपना देखने का भी हक नहीं है !

सपने भी कई तरह के होते हैं ! जो सपने देखते हैं उनके पूरे नहीं होते जो नहीं देखते उनके पूरे भी हो जाते हैं ! उदाहरण तो कई है , जिन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा उनको सब कुछ बिना सपना देखे मिल गया ! " प्रधानमंत्री " की कुर्सी , बिन मांगे " ऐश " सोएब को सानिया " ओबामा को व्हाइट हॉउस और भी लम्बी फेहरिस्त है !

अगर आपका भी कोई सपना पूरा हुआ हो तो अवश्य बताएं ..........

धन्यवाद


Tuesday, February 1, 2011

सूत्र ........( जीवन के ) .......>>> संजय कुमार

सिखलाया गया था हमें , कि लड़ना है बुरी बात ,
माना हमने भी कि हाँ लड़ना है बुरी बात
पर ? जीना है अगर , तो है यही अच्छी बात
जूझने की अगर तुममें हो अधिक से अधिक क्षमता
तो है यही सबसे अच्छी बात
जिंदगी आसान नहीं इतनी अब
जितनी हुआ करती थी कभी
अब वो वक़्त नहीं
सूत्र भी वदल गए हैं ! वक़्त और हालात के साथ
बुरा था कल जो ,
आज बही अच्छा है ,
अपने थे कल सब यहाँ ,
खुद ही खुद के नहीं आज हम यहाँ ,
जूझ नहीं पाते अगर हम , तो खुद को मिटा लेते
रहते हैं अगर हम शांत
तो , लोग हमें रौन्धते हुए कुचल कर चले जाते हैं
दिए थे कुरुक्षेत्र में अर्जुन को , जो उपदेश श्रीकृष्ण ने
अपनाना पढ़ते हैं अब उन्हें जिंदगी के कुरुक्षेत्र में !
लागू होता अगर एक ही सूत्र
हर वक़्त हर जगह , तो --
अवतरित ना होते राम सतयुग के
द्वापर युग में कृष्ण रूप में
इसलिए खुद के आचरण पर
है अगर आंतरिक संतुष्टि तुम्हें
तो इस बात को जाने देना
कि लोग हैं क्या कहते !

( प्रिये पत्नी की कलम से )

धन्यवाद