Monday, August 1, 2011
भगवान ने भगवान को पीछे छोड़ा ........>>> संजय कुमार
अब हमें भी इन्तजार है उस भगवान का जो इन भगवानों को पीछे छोड़ दे ! ( एक छोटी सी बात )
धन्यवाद
Friday, July 29, 2011
स्वार्थ की पैंजनियां ....... >>>> संजय कुमार
और अकुलाहट , मन वे आधार है
स्वार्थ तख़्त पर पैर पसारे
लेटा हर मानव आज है
स्थूल आत्मा कितनों की ही है
ऐसा लगता मुझको आज है
वर्ना गीता के उपदेशों के कागज़ पर
नहीं बेचता कोई चांट आज है
राम नाम का जोक बनाता
नैतिकता बेकार बताता
कमजोरों पर रौब जमाता ,
जहाँ ना गलती दिखती दाल
कुत्तों सी वहां दूम हिलाता
प्यार बेचता , ईमान बेचता
दया और चतुराई बेचता
इज्जत की बह खाल उधेड़ता
अपने स्वार्थ - तन को ढकने को
वस्त्रहीन हो बह आज नाचता
स्वार्थ की पैंजनिया बाँध
( प्रिये पत्नि गार्गी की कलम से )
धन्यवाद
Tuesday, July 26, 2011
इसे चेतावनी नहीं सच समझें ..... ( जरा संभल जाईये ) .......>>> संजय कुमार
चेतावनी.... वैसे होती तो है हम लोगों को सतर्क और सावधान रहने के लिए , दुर्घटना होने से बचाने के लिए , हमारी जान-माल की रक्षा के लिए ......... किन्तु होता क्या है ? क्या हम कहीं भी लिखी हुई चेतावनी , सन्देश , नियम का पालन करते हैं ? जबाब हमेशा ना में ही होगा ! बरसात का मौसम आते ही हमारे देश में पिकनिक , पार्टियाँ , सैर - सपाटा , युवाओं का टोलियों में घूमना - फिरना लगभग हर राज्य हर शहर और गांवों में बड़ी संख्या में देखा जा सकता है ! खासकर बहते पानी , उफनते नदी ,तालाब के आसपास जैसे बड़ी-बड़ी नदियाँ , कुण्ड, ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से गिरते हुए झरने , बाँध आदि स्थानों पर इस मौसम में जरुरत से ज्यादा ही भीड़-भाड़ देखी जाती है ! हम लोग भी ऐसे मौसम का लुत्फ़ उठाने के लिए अपने यार- दोस्तों , परिवार , पत्नि , और बच्चों के साथ अच्छे दिन की कामना और मन में सुहाने पलों को सजाते हुए निकल पड़ते हैं अपने आस-पास के " पिकनिक स्पौट " पर ! हमारे देश में सेंकड़ों ऐसी जगह हैं जो प्रकृति का बेजोड़ नमूना हैं और अपने आप में बेमिसाल हैं ! " कश्मीर से कन्याकुमारी " तक सेंकड़ों प्रकृति के नज़ारे हैं ! किन्तु कभी - कभी हम लोग " सैर - सपाटे " और मनोरंजन में इतना व्यस्त और लापरवाह हो जाते हैं कि , अकस्मात आये हुए खतरों और मुसीबतों से अपने आपको ना तो संभाल पाते हैं और ना अपने आपको बचा पाते हैं ! और इसका कारण होता है हमारी लापरवाही और किसी भी चेतावनी को हल्के में लेने के कारण ! अभी कुछ दिनों पहले " इंदौर " के " पातालपानी " में हुई ह्रदय विदारक घटना जिसमे एक हँसता खेलता परिवार कुछ सेकेंडों में बिखर गया ! क्यों ............? सिर्फ हमारी लापरवाही के कारण ...... लिखी हुई चेतावनी को नजरअंदाज कर , ऐसा हमेशा होता है , कहीं भी लिखी हुई किसी भी चेतावनी को हम एक साधारण बात समझकर अपनी मस्ती में मस्त हो जाते हैं और एक मौत की लहर जब सब कुछ खत्म कर आगे निकल जाती है तो हमारे पास रह जाता है पछतावा सिर्फ पछतावा जीवन भर , अपनी गलतियों का ! अक्सर हम लोगों ने कई बार सड़क पर चलते हुए , ट्रकों और बसों पर लिखा देखा है ! वाहन गति ४०/ किलोमीटर , जगह मिलने पर साईड दी जाएगी , आदि ..... क्या मायने रखते हैं इस तरह की चेतावनी या लिखी हुई कोई बात ! मत भूलिए इस तरह की चेतावनी या सन्देश हमारे जीवन को बचाने के लिए होते हैं पर हम उन पर बिलकुल भी ध्यान नहीं देते और सड़कों पर अपने वाहन इस तरह दौडाते हैं जैसे कोई रेश प्रतियोगिता हो रही हो और हम भूल जाते हैं वह सब कुछ जो हम दिनरात देखते और पढ़ते रहते हैं ! हम बार - बार गलतियाँ करते हैं और उसका खामियाजा हम लोगों को कभी - कभी अपनी या अपनों की जान देकर चुकाना पड़ता है !
सरकार ने ऐसे सभी पर्यटन स्थलों पर चेतावनियाँ लिखवा रखी हैं जहाँ जान ( मरने ) जाने की सम्भावना अधिक है या किसी भी तरह का खतरा ज्यादा है ! सरकार तो हमारे जीवन के प्रति सचेत है या नहीं ये तो हम सब अच्छे से जानते हैं ! हमारा जीवन तो अमूल्य है ! किसी भी लिखी हुई चेतावनी , सन्देश , या नियम - कानून को आप सिर्फ लिखा हुआ ना समझें ! क्योंकि हर लिखी हुई बात का कुछ ना कुछ मतलब जरुर होता है और जो जीवन से जुडी हुई हो उन पर जरा ज्यादा ही गौर कीजिए ! कहीं ऐसा न हो हमारे जीवन को हमारी ही बुरी नजर लग जाये !
धन्यवाद
Friday, July 22, 2011
दौर ..........>>>>> संजय कुमार
कि अपनों की वह
पुरानी छाप मिट गयी
एक भयानक तस्बीर खिंच गयी ,
वह सुखद हालात ,
वह चैन ,
जो कुछ था सब मिट गया
अब तो गर्म रेत रह गयी
लोग ना बदले ,
रिश्ते ना बदले ,
पर छाप बदल गयी ,
और फिर सोच बदलनी पड़ी !
( प्रिये पत्नि गार्गी की कलम से )
धन्यवाद
Wednesday, July 20, 2011
तेरी गोद में .....>>>> संजय कुमार
भारत " माँ " आप तो हैं महान ,
तेरी मिटटी को अनगिनत प्रणाम ,
पर तेरी गोद में
अब जो खेल रही संतान ,
कर रही तुझको वदनाम ,
राम-कृष्ण को अपना आदर्श माने ,
पर ये क्या ? खुद अन्दर रावण धारे ,
रावण को सिर्फ दशानन कहते ,
पर अबकी संतान के तो अनगिनत चेहरे
( प्रिये पत्नि गार्गी की कलम से )
धन्यवाद
Sunday, July 17, 2011
जीवन की भागमभाग से फुर्सत मिले तो .... अपनी कुछ यादें ताजा कर लीजिये .........>>>> संजय कुमार
1. घर , जहाँ हमने सबसे पहले अपनी आँखें खोली , जहाँ हमारा जन्म हुआ ! जन्म भूमि से हर किसी को प्रेम होता है ! किन्तु आज लगभग इन्सान का जन्म अपने घर की जगह किसी सरकारी अस्पताल या किसी नर्सिंग होम में होता है ! और इन्सान इन जगहों पर बार बार जाना नहीं चाहता !
2. हमारे घर का आँगन जहाँ हम अपने पैरों पर पहली बार खड़े हुए , और जहाँ हम अपने भाई-बहनों के साथ दौड़ लगाया करते थे ! किन्तु आज इन्सान के बीच इतना मतभेद हो गया , और हमारे घरों से यह आँगन कब कोठरियों में बदल गए नहीं मालूम ! आज-कल बड़े शहरों में तो सिर्फ फ़्लैट होते हैं , वहां पलने बाले बच्चे नहीं जानते आँगन का मतलब ! और भविष्य में जब हमारे बच्चे हम से पूंछेंगे की ये आंगन क्या होता है ? शायद हम जबाब ना दे पायें !
3. घर के वह कमरे जहाँ हमने बैठकर , जागकर , सोकर , उधम मचाकर अपनी पढाई की , और अपने भविष्य के सपने बुने ! जहाँ इस बात को लेकर हम कई बार अपने भाई-बहनों से लड़ाई करते थे कि , यह जगह मेरी है और बो जगह तेरी हैं ! शायद आज भी कई घरों में यह स्थिति होती होगी ! बचपन के सबसे प्यारे क्षण जो हमेशा याद रहते हैं और जहाँ पर तैयार होता है भाई-बहनों के सच्चे प्रेम का निर्माण , जो जीवन पर्यंत चलता है ! ( किन्तु आज का युवा अपने आप में ही मस्त है, उसे शायद अपनों की चिंता ही नहीं है )
4. घर का वह कमरा जिसे हम शयनकक्ष कहते हैं जहाँ हम जीवन भर अपने जीवनसाथी के साथ रहते हैं ! जहाँ पर जुडी होती हैं कई यादें, और अपने भविष्य को बनाने की योजना, और बहुत कुछ ! सब कुछ इसी कक्ष में , लेकिन यह कमरा आपको तभी मिलेगा जब आप शादी कर लेंगे और उस कक्ष में आपके जीवन साथी का स्वामित्व हो जाएगा तभी इस कक्ष का महत्त्व है ! इस कक्ष में इन्सान एक लम्बे समय तक रहता है ! यह कमरा हर किसी के पास होता है , फिर चाहे शहर का फ़्लैट हो या गाँव की झोपड़ी !
5. घर का बरामदा जहाँ पर हमने उधम मचाते हुए कई बार अपने माता-पिता, दादा-दादी के द्वारा डांट खायी और कई बार सजा के हक़दार बने , किन्तु अब इन बरामदों में आपको हमारे माता-पिता या दादा-दादी कम ही देखने को मिलेंगे क्योंकि आज का इन्सान अब अलग और अकेला रहना चाहता है , और अब धीरे-धीरे संयुक्त परिवार वाली परम्परा समाप्त हो रही है ! और आज के बहुत से बच्चे अपने दादा-दादी की डांट नहीं सुन पाते जो हर किसी के जीवन में बहुत उपयोगी होती हैं क्योंकि इनके पास होता है , जीवन का सच्चा अनुभव !
6. घर की छत जहाँ हमने आसमान में उड़ने वाले पक्षियों को देखकर आसमान में उड़ने और आसमानी बुलंदी को पाने की सच्ची कोशिश सीखी ! और नीला आकाश, चंद्रमा की शीतलता , सूर्य का तेज और टिमटिमाते तारे , उमड़ते-घुमड़ते बादल सब कुछ यही से देखा ! बड़े - बड़े फ़्लैट में रहने बालों को छत नसीब नहीं होती !
7. घर की रसोई जहाँ से हमने पहली बार किसी स्वाद को चखा , और आज इन्सान के सारे काम यहीं से शुरू होते है सुबह सुबह चाय नाश्ता हमको यहीं से मिलता है तभी हम अपने घर से अपने कार्य क्षेत्र को जाते हैं ! जहाँ माँ कामधेनु निवास करती हैं !
8. घर में भगवान का छोटा सा कमरा या छोटी सी अलमारी जहाँ विश्व की सबसे बड़ी शक्ति विराजमान होती है ! जहाँ से हम अपने सुख समृद्धि की कामना करते हैं , और जहाँ से हम अपने धर्म और ईश्वर के प्रति श्रधा का भाव सीखते हैं ! और सीखते हैं , आदर , अपनापन और जानते हैं ईश्वरीय शक्ति के बारे में ! किन्तु आज इश्वर में ध्यान कितने लोग लगाते हैं , यह कहना बहुत मुश्किल हैं ! आज इन्सान के पास अपने परिवार को देने के लिए समय नहीं है तो फिर भगवान् को पूंछता कौन है ! भगवान् को सिर्फ बुरे और विपत्ति समय में ही याद किया जाता है ! आज भगवान् भी तरसता हैं ऐसे इंसानों के लिए जो वाकई उसमे विश्वास रखता हो और सच्ची भक्ति रखता हो ! आज के आदर्श सलमान , कटरीना , सचिन , आमिर हैं !
9. घर का बाथरूम जहाँ पर हम यूँ ही गुनगुनाते हुए बाथरूम सिंगर से एक अच्छा कलाकार बन गए और अच्छा नाम कमा लिया !घर का आईना जिसे देखकर हमने कई बार अपने आपको निहार कर जीवन में कभी मूक अभिनय कर बहुत कुछ सीखा , और एक कलाकार बन गए ! क्योंकि आईना कभी झूंठ नहीं बोलता !
इंसान के जीवन में अगर अपने घर का सुख नहीं हैं तो उसके पास कुछ भी नहीं हैं ! किसी भी इंसान का अस्तित्व एक घर से जुड़ा हुआ होता है ! अगर घर हैं तो इन्सान हैं अगर घर नहीं तो कुछ भी नहीं है ! इनके अलावा भी एक घर में बहुत सी चीजें होती हैं , बहुत सी जगह होती हैं जिनसे इन्सान का लगाव बहुत होता है ! क्या आपके पास है ऐसा घर ? क्या आपके पास हैं घर से जुडी हुई कुछ यादें ? अवश्य बताएं !
क्योंकि हर घर बहुत नहीं बहुत बहुत कुछ कहता है !
धन्यवाद
Thursday, July 14, 2011
हमारे देश के दुश्मन बहुत भाग्यशाली हैं .... >>> संजय कुमार
धन्यवाद