Sunday, September 5, 2010

अब रंग भी हुए बदनाम ....( १००बी पोस्ट ) >>. संजय कुमार

कहा जाता है हर रंग की अपनी एक पहचान होती है उनका अपना एक महत्व होता है ! जैसे सफ़ेद रंग शांति का प्रतीक, हरा रंग बिखेरता हरियाली, पीला रंग खुशहाली, लाल रंग देता उमंग, गुलाबी बिखेरे गुलाबी छटा और नीला बिखेरे आसमानी घटा ! यह सभी रंग इन्सान के जीवन से जुड़े होते हैं ! इन्सान की जिंदगी में रंग बहुत मायने रखते हैं ! बात करते हैं ऐसे रंग की जो इन सभी रंगों से जुदा है ! यह रंग अगर किसी रंग में मिल जाए तो वह रंग अपनी पहचान खो देता है, किन्तु उस पर कोई और रंग अपना असर नहीं छोड़ पाता ! यह रंग है काला रंग ! काले रंग को हम सब विरोध का रंग, के रूप में जानते हैं ! जब भी कोई इन्सान किसी चीज का विरोध करता है तो इसी रंग के साए में ! इन्सान ने ना जाने कितनी बड़ी बड़ी समस्यायों में इसी रंग का प्रयोग कर इन समस्याओं का समाधान किया ! इसलिए इस रंग का अपना एक विशेष महत्व है ! किन्तु इन्सान ने इन रंगों को भी नहीं छोड़ा ! इन रंगों को भी बदनाम कर दिया ! काले रंग को मनहूस रंग की उपाधि भी दे डाली ! इसे बुराई का रंग, नाम दे डाला ! आज इस रंग के साए में लोग बुरे काम करने से भी नहीं चूकते ! अभी कुछ दिनों पहले की बात है ! एक ५० वर्षीया बुजुर्ग ने एक राह चलती लड़की का अपहरण कर अपनी गाड़ी में उसका बलात्कार कर डाला ! इस घटना को कोई इसलिए नहीं रोक पाया क्योंकि जिस गाड़ी में यह सब हुआ उस गाड़ी पर काले रंग के शीशे चढ़े हुए थे ! यहाँ भी काले रंग को बदनाम कर दिया ! अगर किसी गरीब के घर आज कोई लड़की जन्म लेती है तो आज बह उसके लिए एक अभिशाप है ! उस पर यदि उस लड़की का रंग काला हो तो " कोढ़ में खाज " बाली कहावत चरितार्थ होती है ! उस लड़की के साथ उसके काले रंग को जीवन भर कोसा जाता है ! यह बिडम्बना है इस काले रंग की ! शायद काले रंग को बदनाम करने के पीछे हम इन्सान ही हैं ! एक बार राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को भी एक अंग्रेज ने " Black-Indian " कहकर संबोधित किया था ! और ट्रेन से बाहर कर दिया था ! दक्षिण अफ्रीका में काले गोरे की रंगभेद नीति को खत्म करने के लिए " नेल्सन मंडेला " को वर्षो संघर्ष करना पड़ा और वर्षों अपना जीवन जेल की चारदीवारी में गुजारना पड़ा ! और कड़े संघर्ष के बाद उन्होंने सफलता हांसिल की और एक दिन दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे ! अगर काले रंग को इतनी बुरी नजर से ना देखा जाता तो !

जिस तरह किसी सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी तरह इस रंग के भी दो पहलु हैं ! जहाँ इस रंग में इतनी बुराई हैं वहीँ कुछ अच्छाई भी है ! आसमान में काले रंग के बादल देख किसानों के चेहरे खिलना, यह काले रंग के बादल किसानों के लिए सुख समृधि लाते हैं ! हिन्दू धर्म में काले रंग को बुरी नजर से बचाने बाला रंग भी माना जाता है ! जहाँ लोग अपने घरों पर काले रंग की चप्पल और ना जाने कितनी तरह की चीजें टांगते हैं वहीँ महिलाएं अपने बच्चों को बुरी नजर से बचाने ले लिए काले रंग का टीका लगाती हैं ! काला रंग कभी फक्र महसूस करता है तो कभी शर्मिंदगी ! सभी रंगों को हम इंसानों ने ही परिभाषित किया है ! उनकी अच्छे बुरे की पहचान हमने ही दी है ! उन्हें नाम और बदनाम हमने ही किया है !

क्या मायने रखता है काला रंग आपके लिए ?

धन्यवाद

Wednesday, September 1, 2010

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभ-कामनाएं ...>> संजय कुमार


भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम का अवतार माना जाता है ! उन्होंने इस दुनिया को प्रेम का सच्चा पाठ पढ़ाया ! जब-जब भी असुरों के अत्याचार बढ़े हैं और धर्म का पतन हुआ है तब-तब भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लेकर सत्य और धर्म की स्थापना की है। इसी कड़ी में भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में भगवान कृष्ण ने अवतार लिया। चूँकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अतः इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी अथवा जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इस दिन स्त्री-पुरुष रात्रि बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झाँकियाँ सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। प्रेम के प्रतीक भगवान् के जन्मदिन को सच्ची लगन एवं प्रेम भावना के साथ अपने पूरे परिवार के साथ मनाएं !
जय श्रीकृष्ण ........ जय श्रीकृष्ण.........जय श्रीकृष्ण........जय श्रीकृष्ण

मुश्कान चुराकर जिसने खाया
बंशी बजाकर जिसने नचाया
खुशियाँ मनाओ उस कान्हा के जन्मदिन की
जिसने इस विश्व को "प्रेम का पाठ पढ़ाया"


श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आप सभी ब्लोगर बंधुओं को एवं परिवार के सभी सदस्यों को
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभ-कामनाएं

धन्यवाद

Sunday, August 29, 2010

भगवाधारी या खादीधारी ...>>> संजय कुमार

आज इस देश में दो लोग चल रहे हैं, या यूँ कह सकते हैं आज देश यही चला रहे हैं ! जब इस देश के बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ, मंत्री-संत्री, और नेतागण आज के महान और पहुंचे हुए भगवाधारियों के श्री चरणों में नतमस्तक होते हैं तो वह अपने आपको बड़ा धन्य सा महसूस करते हैं , जिससे भगवाधारियों की महानता और बढ जाती है ! लेकिन राजनीति में सब कुछ हो सकता है, सब कुछ जायज है ! फिर चाहे देश के गृहमंत्री श्री चिदंबरम साहब देश के भगवाधारियों को आतंकवादी ही क्यों ना कह दें देश में भगवा आतंकवाद अपना सर उठा रहा है ! भगवाधारी, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होकर देश के साथ दगा कर रहे हैं ! अब आप लोग ही बताएं कि कौन है जिम्मेदार इस देश में आतंकवादी घटनाओं का !आज इस देश को भगवाधारी और खादीधारी दोनों मिलकर लूट रहे हैं !...इस देश के नेता और भगवाधारी इस देश को एक दिन पूरी तरह खोखला कर देंगे ! और इस देश में रह जायेगी सिर्फ गरीब जनता लुटी-पिटी और बदतर हालात में जीती हुई !

आज देश में होने वाली हर आतंकवादी घटना के पीछे हमारे देश की राजनीति है ! देश में नक्सलवाद की समस्या के पीछे खादीधारी हैं, देश में बड़े-बड़े घोटाले, भ्रष्टाचार इन सबके पीछे खादीधारी, देश में गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, कुपोषण, लूट-पाट इन सबके पीछे खादीधारी है , इन खादीधारियों की बदौलत ना जाने कितने युवा आज आतंकवादी बनने को तैयार हैं ! कितने ही ईमानदार अफसर इन लोगों की वजह से बेईमानी करने पर मजबूर होते हैं ! एक साफ़ स्वच्छ छवि का व्यक्ति भी इनकी सोहबत में रहकर दागदार बन जाता हैं ! देश व्यापी आतंकवाद के पीछे सिर्फ और सिर्फ देश का खादीधारी ही जिम्मेदार है ! असली आतंकवादी यही हैं , और इस बात को पूरा देश मानता है !

माना जाता है कि एक भगवाधारी को अपने जीवन में किसी भी सांसारिक चीज का मोह नहीं होता ! ऐशोआराम, रूपए-पैसे का लालच कभी नहीं आता ! ( यह बात सतयुग में सच लगती थी किन्तु कलियुग में नहीं ) उसका काम भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखाना होता है ! जहाँ देश व्यापी स्तर पर खादीधारी देश को लूट रहे हैं , वहीँ आज सामाजिक स्तर पर यह भगवाधारी लूट रहे हैं ! आज देश में आम जनता की कड़ी मेहनत का पैसा इन भगवाधारियों की तिजोरियां भर रहा हैं ! कभी धर्म के नाम पर, आपस में भाइयों को लड़वाकर ! अब तो यह भगवाधारी जिस्मफरोशी के धंधे में उतर गए है ! और समाज को गन्दा और बर्बाद कर रहे हैं ! कई युवाओं को राह से भटकाकर इस धंधे में उतार रहे हैं ! समाज के सबसे बड़े आतंकवादी तो यही हैं ! जो घर- घर में आतंकवाद फैला रहे हैं ! यही भगवाधारी कहते हैं कि आज की राजनीति बहुत गन्दी और भ्रष्ट हैं ! लेकिन स्वयं के कितने गंदे विचार और भ्रष्ट हो चुके हैं ! यह नहीं बताएँगे ! चाहे खादीधारी हो या भगवाधारी , दोनों अपने अपने तरीके से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं ! देश के सबसे बड़े आतंकवादी यही हैं ..............

एक आतंकवादी जब कहीं विस्फोट करता है तो एक बार में ही इन्सान की जान ले लेता है ! किन्तु देश के भगवाधारियों और खादीधारियों द्वारा फैलाये आतंकवाद से आज का
इन्सान रोज मरता है !

धन्यवाद


Thursday, August 26, 2010

आंकड़ों में उलझती जिंदगी, और कमजोर होती याददाश्त .....>>> संजय कुमार

क्या आपको कभी शर्मिंदगी उठानी पड़ी ? जब किसी ने आपसे आपका मोबाईल नंबर माँगा हो और आप अपना ही मोबाईल नंबर भूल गए हों ! आज कल अक्सर ऐसा देखा जाता हैं ! जब से आधुनिकता का रंग हमारे ऊपर चढ़ा तब से हम किसी काम के नहीं रहे, उस पर हम सब के ऊपर फैला आंकड़ों का ऐसा जाल जिसमें इन्सान उलझ कर रह गया ! एक इन्सान के पास आज इतने नंबर होते हैं, कि उसे यह भी ध्यान नहीं होता कि किस का नंबर क्या है ! बस यह कह देता है कि, मुझे तो अपना नंबर तक याद नहीं मेरे पास तो इतने नंबर और E-mail ID हैं जिनके पासवर्ड तक में याद नहीं रख पाता ! मैं क्या करूँ लगता है मैं अब सब कुछ भूलने लगा हूँ ! अगर मैं यह सब कहीं डायरी में लिखकर न रखूँ तो पता नहीं क्या होगा ? यह आम बात नहीं यह तो आदत बन गयी है अब ! कई बार ऐसा होता है आपका चश्मा आपकी आँखों पर चढ़ा होता है , और आप उसे यहाँ-वहां ढूंढते रहते है ! आज बात कर रहा हूँ इन्सान के आस-पास बेतरतीब से फ़ैले हुए नंबरों के जाल की जिसमें इन्सान की जिन्दगी उलझ के रह गयी है ! आज इन्सान कितनी भी कोशिश करे इनके जाल में फंस कर ही रहता है ! एक इन्सान क्या क्या याद रखे उसे खुद को पता नहीं होता ! ना जाने कितने ही मोबाईल नंबर, खाता नंबर , जन्म-दिन, शादी की सालगिरह, ATM PASSWORD, E-MAIL ID और पासवर्ड, इतना बड़ा नंबरों का जाल हैं ! जिसे याद रखना आजकल बहुत ही मुश्किल काम हैं ! सब कुछ याद रखना असंभव है !

यहाँ मैं अपनी बात नहीं कर रहा हूँ ! ईश्वर के आशीर्वाद से मेरी याददाश्त अभी तक अच्छी है और आगे भी रहे ऐसी मैं कोशिश करता हूँ ! क्या करूँ ये सब तो मेरे जीवन का हिस्सा हैं ! मैं बात कर रहा हूँ आज के उन सभी लोगों की जो भूलने की आदत से मजबूर हैं और याद नहीं रख पाते या निर्भर हैं दूसरों पर ! एक समय था जब इन्सान के पास आज के आधुनिक साधन या उपकरण नहीं थे ! क्या उस समय इन्सान ज्यादा सुखी था ? या आज के आधुनिक समय में जहाँ इन्सान की जरूरत से कहीं ज्यादा आधुनिक साधन उपलब्ध हैं! जिन पर इन्सान जरूरत से ज्यादा निर्भर हैं ! इस बात का अनुमान हम आज के इन्सान को देखकर ही लगा सकते हैं ! आज जिसे देखो हर समय अपने आप में गुमसुम, बेचैन, हैरान- परेशान और अनेकों बीमारियों से ग्रसित, कभी हार्ट-अटैक कभी ब्लड प्रेशर , कभी ये कभी वो , आज का इन्सान बन कर रह गया बस बीमारियों का पुतला ! आज का इन्सान जरूरत से ज्यादा तनावग्रस्त है ! इसलिए इन बीमारियों का कब्ज़ा इन्सान के ऊपर जल्द हो जाता है ! इन सब से ज्यादा बड़ी एक बीमारी है और वह है भूलने की ! अब यह बीमारी इन्सान की एक आदत बन गयी है ! इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण तो इन्सान स्वयं ही है ! आज इन्सान ने ही इस बीमारी को जन्म दिया है ! ऐसा नहीं कि पहले के लोग इस बीमारी से परेशान नहीं थे ! लेकिन यह आदत बहुत कम लोगों में पाई जाती थी ! कारण था उस समय इन्सान सिर्फ अपने ऊपर निर्भर था, जो इन्सान अपने ऊपर निर्भर रहता है वह जीवन में कम परेशान रहता है ! किन्तु आज का इन्सान अपने ऊपर बिल्कुल भी निर्भर नहीं हैं, अगर निर्भर है तो आज के आधुनिक साधनों पर, जो इन्सान को अन्दर से बहुत कमजोर कर रहे हैं ! क्या आप कमजोर तो नहीं हैं ?

क्या आप सबकुछ याद रखते हैं ? क्या आपको भूलने की आदत तो नहीं ?

धन्यवाद

Friday, August 20, 2010

हिंसक होता हमारा भविष्य.................एक विचारणीय मुद्दा .......>> संजय कुमार

कहा जाता है ---हमारे बच्चे और आज का युवा इस देश का भविष्य हैं आज की यही युवा पीढ़ी देश के स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करेगी , क्योकि युवा जोश से भरा होता है ... यह कितना सच है - कहना बहुत मुश्किल है ! क्योंकि आज हमारा भविष्य कहाँ है, आज हमारा भविष्य क्या कर रहा है ? यह बात किसी से छुपी नहीं है ! , आज का युवा अपने लक्ष्य से पूरी तरह भटका हुआ है, और इस भटकाव के कारण हिंसक प्रवृति का होता जा रहा है ! और यही हिंसा उसे गलत राश्ते पर ले जा रही है ! आज हमारा युवा किस ओर जा रहा है--यह बहुत ही विचारणीय मुद्दा है !आज के हिंसक युवा ना तो रिश्ते नातों को मानते हैं और ना हीं उनके महत्व को ! आज देश में जितनी भी हिंसात्मक घटनाएं हो रही हैं उनमें ज्यादातर हिस्सेदारी हमारे युवाओं की होती है ! आज बहुत सी ऐसी घटनाएँ सुनने में आ रही है, जो यह बताती है कि आज का युवा दिन-प्रतिदिन हिंसक होता जा रहा है ! किसी कॉलेज में अपने ही सहपाठियों पर एक छात्र द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी, किसी स्कूल में बात बात पर एक छोटे से बच्चे द्वारा दूसरे बच्चे पर बन्दूक चला देना ! इस तरह की घटनाएं अब आम हो गयी हैं !

उत्तर-प्रदेश, मध्य-प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और बड़े बड़े महानगरों में, छोटे बड़े अपराध करने वालों में आज देश का युवा बढ-चढ़कर हिस्सा ले रहा है ! देश के असामाजिक तत्व हिंसक घटनाओं में, भटके हुए युवाओं का पूरी तरह इस्तेमाल कर रहे हैं , टेलीविजन पर बढ़ते हिंसक सीरियल , और हिंसक फ़िल्में देखकर भी युवाओं में हिंसक मनोवृति जन्म ले रही है ! आज ज़रा सी बात पर हिंसक होते युवा, सारे रिश्ते-नाते ताक पर रख अपनों का खून बहा रहे हैं ! माँ-बाप, भाई-बहन उनके लिए आज कोई मायने नहीं रखते (ऑनर-किलिंग ) जैसे मामलों में अक्सर यह देखा गया है --- हिंसा पर उतारू भाई ने ले ली अपनी ही बहन की जान !बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, घूसखोरी जैसे और भी बहुत से कारण हैं जो आज के युवा को हिंसक बना रहे हैं ! आज के दूषित वातावरण में कई युवा ऐसे हैं जिन्हें घुटन महसूस होती हैं ! आज के माहौल को देखकर युवा जल्द ही अपना सब्र खो देता है और कभी कभी हिंसा करने पर मजबूर हो जाता है ! आज महात्मा गाँधी के आदर्शों को मानने वालों की कमी है ! आज का युवा --- थप्पड़ का जबाव थप्पड़, खून के बदले खून, इस तरह के आदर्श अपने मन में बनाये बैठा है !

आज देश में जो अफरा-तफरी का माहौल है उसे देखकर नहीं लगता कि आज के युवा उन आदर्शों पर चलेंगे जहाँ हर समस्या का समाधान हिंसा नहीं है ! अहिंसा से भी समस्या का समाधान हो सकता है ! अगर आज युवाओं ने नहीं सोचा तो हम सबका भविष्य हिंसा से भरा होगा ,एक चिंताजनक और भयावह स्थिति ..................... हिंसक होता हमारा भविष्य .........

धन्यवाद

Monday, August 16, 2010

खेल खेल में, पैसों का खेल ....>>> संजय कुमार

भारत देश एक खेल प्रधान देश है ! यहाँ पर अनेक तरह के खेल, खेले जाते हैं ! क्रिकेट, हॉकी, फुटबाल, टेनिस और भारतीय परम्परावादी खेल जैसे खो-खो और कबड्डी ! भारतीय परम्परावादी खेलों का तो आज जैसे अस्तित्व ही खत्म हो गया ! क्योंकि, एक तो इनको लोकप्रियता नहीं मिली और ना ही बढ़ावा ! और आज रह गए बही खेल जिन्दा जहाँ सिर्फ पैसे की भरमार होती है ! पैसा भी जो खेल खेलने पर मिलता है और ना खेलने पर भी ! अरे भई .... आज हर जगह पैसे का बोलबाला है ! जब से खेलों में राजनीति का हस्तक्षेप हुआ तभी से खेलों का बंटाधार हो गया ! क्योंकि आज राजनीति पैसा कमाने का सबसे सरल और आसान तरीका बन गया है ! फिर चाहे खेल संघ के उच्च पदों पर बैठे हुए लोगों को २०-२५ साल हो गए हों ! मजाल है किसी की जो उनको उनके पदों से हटा सके ! इतने सालों के लम्बे अनुभव का आज पूरी तरह फायदा जो उठा रहे हैं ! इन खेलों के जरिये पैसों का खेल जो खेल रहे हैं !

आज देश में ऐसा कोई खेल नहीं बचा जिसमे पैसों का खेल ना खेला जाता हो ! क्रिकेट में तो पैसा पानी की तरह बरसता है ! इस खेल में तो खेलने बाला और खिलाने ( आयोजक ) बाला, दोनों जमकर पैसा कमाते हैं ! आज तरह तरह के आयोजन (IPL) करके सिर्फ पैसों का खेल चल रहा है ! अब इस खेल में भी भ्रष्टाचार अपनी पकड़ बना रहा है ! आज खेल एक बड़ा व्यापार बनकर हम सबके सामने उभरकर आया है ! जहाँ ज्यादा पैसा बही खेल सबसे ज्यादा ऊपर ! आज विश्व के सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड में भारत का नाम अब्बल नम्बर पर है ! भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी आज भी इंतजार कर रहा है अपने देश में बह मुकाम पाने, जो अन्य खेलों का है, खासकर क्रिकेट का ! इसके पीछे भी पैसे का खेल चल रहा है ! इस हॉकी संघ के अध्यक्ष को पिछले १ दशक से भी ज्यादा हो गए इस पद पर डटे हुए ! लम्बे समय तक ऐसे पदों पर बैठा होता है बह ऐसे खेलों में पैसे का खेल, खेलने में माहिर हो जाता है ! और खेल खेलने बाले खिलाडी पीछे और सिर्फ पीछे ...........

जब किसी देश में कोई अंतर्राष्ट्रीय खेलों का आयोजन होता हैं ! तो उस देश के लिए यह बड़े गर्व की बात होती है ! बह देश अपने आप को धन्य समझता है ! वहां का हर नागरिक अपने आपको गौरवान्वित मससूस करता है ! आज हमारे देश में भी राष्ट्र को गौरवान्वित करने बाला आयोजन हो रहा हैं ! किन्तु इस आयोजन के होने से आज देश का हर नागरिक अपने आप में शर्म महसूस कर रहा है ! क्योंकि इसके आयोजन कर्ताओं ने इस आयोजन को पूरी तरह से पैसे का खेल बना दिया हैं ! आज इस खेल को अब तक का सबसे भ्रष्ट आयोजन का, खेल के रूप में जाना जायेगा ! जिसमे आम जनता का विश्वास इन खेलों का आयोजन कराने बालों से पूरी तरह उठ गया है ! क्योंकि आज देश में खेलों के नाम पर चल रहा है तो सिर्फ पैसों का खेल .............. और पैसों के खेल में आज खेल और खिलाडी अपना असली खेल, खेलना भूल गए .......................

बंद करो यह पैसों का खेल वर्ना......... भविष्य में चलेगा सिर्फ पैसा......... नहीं चलेगा कोई खेल और खिलाडी

धन्यवाद

Friday, August 13, 2010

आजाद हैं पूरी तरह , सब कुछ करने को .....>>> संजय कुमार

कहते हैं जबसे हमारा देश आजाद हुआ है, और हम अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुए हैं तब से इस देश के लोगों ने आजादी का सही मतलब जाना ! और सही भी है एक आजाद इन्सान बह सब कुछ कर सकता है, जो गुलाम होकर नहीं कर सकता था ! उसे अपनी बात सबके सामने रखने की आजादी होती है ! कहीं भी कुछ भी कर सकता है वह भी पूरी आजादी के साथ ! जब से हमें अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली है तब से एक बात हर आम इन्सान की जेहन में रहती हैं कि हम सब आजाद हैं पूरी तरह सब कुछ करने को ! बिना रोक-टोक, अच्छे -बुरे का परिणाम सोचे बिना......

पिछले ६० वर्षों से भी अधिक समय हो गया हमको आजाद हुए ! आज हर कोई आजाद है सब कुछ कहने को किसी की जुबान पर आज कोई ताला नहीं है ! जिसको जो बकना है बक रहा है पूरी आजादी के साथ बंधनमुक्त होकर ! आज जिसे देखो सब कुछ खुल्लम- खुल्ला कर रहा है पूरी आजादी के साथ ! देश में ढोंगी साधू-महात्मा धर्म के नाम पर, आध्यात्म के नाम पर भगवान् को बेच रहे हैं ! बेच रहे हैं अबलाओं की इज्जत, खा रहे हैं इन्सानी चमड़ी ( जिश्म्फरोशी ) की कमाई सब कुछ पूरी आजादी के साथ ! देश के बड़े बड़े राजनीतिज्ञ, मंत्री आजाद हैं, सब कुछ करने को, आजादी के साथ बेच रहे ईमान बेच रहे देश, फैला रहे भ्रष्टाचार, घूसखोरी, और रिश्वतखोरी , कर रहे सौदा इंसानों का, उनको खरीदने और बेचने का, पूरी आजादी के साथ ! कभी खेल के नाम पर, कभी मनोरंजन और रियलिटी शो के नाम पर ! बेच रहे हैं सब कुछ पूरी आजादी के साथ ! आज हम आजाद हैं .... वह सब कुछ करने को जिसे रोकने -टोकने हिम्मत किसी में भी नहीं है ! आज पश्चिमी सभ्यता आजाद है हमारे देश में अपने पैर पूरी तरह फ़ैलाने को, आज हम आजाद हैं जिस्म दिखाऊ सभ्यता को अपनाने के लिए , विदेशी ताकतें आजाद हैं फिर से गुलाम बनाने के लिए ! आज हमारे बच्चे आजाद हैं पूरी तरह अपने माँ-बाप का अपमान करने के लिए, आजाद हैं नसे की दुनिया में जाने के लिए, आजाद हैं अपना भविष्य बनाने और बिगड़ने के लिए ! आज आतंकवाद आजाद है पूरी तरह अपने पैर पसारने के लिए ! आज पूरी तरह आजाद हैं अनेकों बीमारिया इन्सान को अपनी गिरफ्त में लेने के लिए ! आज देश में बह सब लोग पूरी तरह से आजाद हैं , जो इंसानियत, समाज, और राष्ट्र को डुबोने के लिए पूरी तरह हमेशा तैयार रहते हैं ! असलियत में आजादी का असली रूप तो ऐसे ही लोग जानते हैं ! यही लोग आज पूरी तरह से आजाद हैं ! हम सब तो कहीं ना कहीं गुलाम और कैद हैं अपनी परिस्थितियों और हालातों से .......

आज देश में आम इन्सान आजाद नहीं हैं ! आम इन्सान कैद है अपनी समस्याओं में ! गुलाम है दकियानूसी प्रथा और रीति -रिवाजों का ! आज तक आजाद नहीं हुआ उस विकृत मानसिकता का जो इंसानियत पर एक बदनुमा दाग लगाती हैं ! आज भी आजाद नहीं है वह औरतें जो दहेज़ लोभी घरों में कैद हैं, सिर्फ किसी के लालच के कारण ! आम आदमी आजाद नहीं है, आज के दूषित वातावरण में ! आम इन्सान भूल गया अपनी असली आजादी का मतलब !

क्या आप आजाद हैं ? सब कुछ करने को

स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई एवं शुभ-कामनाएं

धन्यवाद