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Thursday, April 5, 2012

किरदार .........>>>> संजय कुमार

पाते तो पुष्प " हैं 
रंग , खुशबु , पराग ,
ईश्वर  के चरण ,
सुन्दरता को बड़ाने की शोभा !
" पात " का क्या 
वो तो देता है 
पेड़ को ऑक्सीजन, 
खोता है वक़्त के साथ रंग ,
और अंत में आधार भी -
पेड़ से होकर निराधार ,
भटकता है ,
धुल में मिल जाता है 
किसी को " वह " नहीं भाता 
उसका " कर्म " किसी को 
नजर नहीं आता ,
नियति के स्टेज पर 
यही उसका " किरदार " है 
फिर भी " फूल " ही सबको भाता है !
यही प्रभु का रचा संसार है !
कोई फूल , तो कोई पात है !

( प्रिये पत्नी गार्गी की कलम से )

धन्यवाद