" तीन तिगाड़ा - काम बिगाड़ा " इसका मतलब हुआ कि आप अपना कोई भी काम औने -पौने में ना करें ! ये कोई शगुन है या अपशगुन आज तक समझ नहीं आया ! मेरी नजर में चाहे एक हो या दो या हों तीन या चार सबका अपना -अपना अलग महत्त्व होता है ! हम जानते हैं भगवान् शिव को " त्रिनेत्र " क्यों कहा जाता है ! इंसान के जीवन में तीन का भी बहुत महत्त्व है ! महत्व तो बहुत सी चीजों का होता है बस फर्क सिर्फ इतना है कि हम उन्हें कितना महत्त्व देते हैं ! बदलते वक़्त के साथ बहुत कुछ बदला है ! इंसान बदला , उसकी सोच बदली साथ -साथ महत्व भी बदल गया ! ये पोस्ट मैंने आज से दो साल पहले लिखी थी जिसमें इंसान से जुड़ी कुछ चीजें का उल्लेख किया था और उन पर मैंने अपनी राय दी थी , पिछले दो सालों में बहुत कुछ बदल गया ! इस बदलते वक़्त के साथ मेरी राय भी बदल गयी ! तो थोडा सा गौर फरमाइये !
कैसा लगा आपको ये तीन का तड़का , सच कहा या झूंठ ...... जरुर बताएं
धन्यवाद
इंसान के जीवन तीन चीजें ऐसी हैं जो उसे सिर्फ एक बार मिलती हैं
१. माता-पिता ( इंसान की उत्पत्ति इन्हीं से होती है , ईश्वर से बढकर है ये ) ---->
( बदलते वक्त ने इस ईश्वर को भी ठोकरें खाने को मजबूर कर दिया है )
( बदलते वक्त ने इस ईश्वर को भी ठोकरें खाने को मजबूर कर दिया है )
२. जवानी ( इंसान के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय , जीत सको तो जग जीत लो )
( बदला वक़्त और जवानी चल पड़ी नशा, जिस्मफरोशी के बाजार में )
३. हुस्न ( जवानी के साथ हुस्न भी अनमोल है , हुस्न गया सब गया, हुस्न के लाखों रंग - कौनसा रंग देखोगे )
( बदला वक़्त .... आज हुस्न को हवस भरी निगाहों से घिरा पाओगे )
तीन चीजें इंसान को बहुत सोच समझकर उठानी चाहिए !
१. कदम ( आपका उठाया गया एक गलत कदम आपका जीवन नष्ट एवं बर्वाद कर सकता है )
( देश का माहौल ख़राब है .... घर से कदम निकालने में भी डर लगता है )
२. कसम ( वादा करो तो ऐसा की " प्राण जाए पर वचन ना जाये " )
( बदलते वक़्त के साथ झूंठी कसमें -झूंठे वादे " वचन जाए पर ना जाएँ प्राण "
३. कलम ( कलम की ताकत को हम सब अच्छी तरह से जानते हैं , उठाओ सच्चाई के लिए ना की झूंठ के लिए )
( बदलते वक़्त के साथ कलम भी बिक गयी )
तीन चीजें इंसान को बहुत सोच समझ का करना चाहिए , एक गलती जीवन भर भुगतान
१. मोहब्बत ( आज-कल मोहब्बत अंधी होती है , अब इसके बारे में क्या कहूं ? )
( मुहब्बत के हो रहे सौदे लुट रही इज्जत ..... सावधान )
२. बात ( अब बात कम बतंगड़ ज्यादा होता है वो भी गाली-गलौच और अशिष्ट )
( अब भ्रष्ट नेताओं की बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी _
३. फैंसला ( आजकल सब्र पूरी तरह खत्म हो चुका है , फैंसला " ON THE SPOT " )
( फैंसला होते होते सब कुछ खत्म हो जाता है )
इंसान के जीवन में तीन चीजें कभी इन्तजार नहीं करती
१. मौत ( रोज -रोज होते सड़क हादसों से लें सबक )
( मौत से किसकी यारी है ... कभी भी इसके आगोस में जा सकते हैं ( हम इन्सान नहीं कीड़े-मकौड़े हैं )
२. वक़्त ( लोहा जब गर्म हो तो हतौड़ा मार देना चाहिए , वर्ना " पछतावे होत का जब चिड़िया चुग गयीं खेत " )
( आज वक़्त हमारे साथ नहीं ....... वर्ना ... खैर जो गुजरा वो वापस नहीं आएगा )
३. उम्र ( उम्र कभी किसी का इन्तजार नहीं करती , जाग वन्दे अब ना जागेगा तो कब जागेगा )
( बदलते वक़्त के साथ ... अब तो उम्र का पता ही नहीं चलता )
इंसान को इन तीन चीजों को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए
१. कर्ज ( किसान का पूरा जीवन कर्ज में ही निकल जाता है )
( हम तो कर्ज में पैदा हुए है और मर जायेगे , पूरा देश कर्ज में है )
२. फर्ज ( फर्ज पर कुर्बान देश भक्तों को सलाम )
( अब हम सभी को अपना फर्ज निभाने की जिम्मेदारी लेनी होगी )
३. मर्ज़ ( एक चींटी हांथी पर भारी पड़ जाती है )
( कब सरकार जनता का मर्ज समझेगी )
इंसान को दर्द होता है इन तीन चीजों से
१. धोखा ( आज पल -पल पर धोखा खाता इंसान , धोखा अब इंसानी फितरत बन गया है )
( हम सब धोखा खाते हैं ... हम सब धोखा देते हैं ... क्यों सच कहा ना ? )
२. बेबसी ( उफ्फफ्फ्फ़ ये बेबसी कब दूर होगी )
( मरते दम तक नहीं दूर होगी )
३. बेवफा ( तेरी बेवफाई में ऐ सनम दिल दिया दर्द लिया )
( अब तो अपने ही बेवफाई पर उतर आये हैं ...... कौन बचाएगा ? )
तीन लोग इंसान को हमेशा खुश रखेंगे
१. भगवान् ( आज भी हम हर मुश्किल वक़्त में इन्हीं को याद करते है )
( बदलते वक़्त के साथ वेचारा भगवान भी लाचार हो गया है वो क्या - क्या करेगा )
२. दोस्त ( सच्चे दोस्त पर सब कुछ कुर्बान )
( अब तो दोस्त बनकर लूटना , अपने दोस्त की जान लेना चलन बन गया है )
३. मेरा ब्लॉग ( जो नए नए व्यंग्य , सन्देश और विचारों से भरा होगा )
( अब लोगों को ब्लॉग कम फेसबुक ज्यादा पसंद आता है ( चमचमाते चेहरे जो मिलते हैं ) धन्यवाद