Showing posts with label डोली. Show all posts
Showing posts with label डोली. Show all posts

Sunday, January 16, 2011

कब तक अर्थी में ? .... >>> संजय कुमार

डोली में बैठ , जाने बाली

कब तक अर्थी में निकलेंगी

माँ तेरे दिए संस्कारों को हम

कब तक गले का फंदा बन पहनेंगी !

इन्सान कम , सामान अधिक

समझे जाते हैं , हम यहाँ

शालीनता हमारी बेवकूफी

हक मांगे तो बद्तमीजी

चुप रहें तो गलत कहलाते हैं

कुछ कहें तो उद्दंड बतलाये जाते हैं !

छोड़कर अपना सब कुछ

हम आये यहाँ

फिर भी पराये माने जाते हैं !

मायका कहता , घर ससुराल तुम्हारा है !

ससुराल कहे , मायका घर तुम्हारा है !

देकर रिश्ते , वारिस

और करके त्याग हम

उम्र भर

एक घर भी नहीं जुटा पाते हम !



( प्रिये पत्नी की कलम से )


धन्यवाद