आजकल दाद , खाज , खुजली मिटाने वाली कंपनी का एक विज्ञापन मेरी आँखों के सामने बार-बार आ रहा है , विज्ञापन की एक बात बार-बार मेरा ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है , और वो है उसका प्रस्तुतीकरण " पहले मजा फिर सजा " ये मुख्य लाईन है इस विज्ञापन की ! समझने वाला कुछ भी समझ सकता है , ( समझना क्या है ,खुजली हो तो मल्हम लगाओ ) जैसा की विज्ञापन है , पहले खुजली को खुजलाकर बड़ा ही आनंद लिया जाता है , किन्तु बाद में जो होता है वो हम सब जानते हैं , जख्म , जलन और दाग ........ शायद यही होता है ! हर बार इस विज्ञापन को देखकर मैं कुछ और ही सोचता हूँ ! इस विज्ञापन में , मैं कभी भटकते हुए आज के युवाओं को देखता हूँ , तो कभी " कानून " के सिकंजे में फंसे उन गुनाहगारों को, जो आज अपने किये गलत काम पर पछता रहे हैं और अब उनका पश्चाताप करना चाहते हैं ! क्योंकि इन लोगों ने बही किया ! जानबूझकर अपने भविष्य से खिलवाड़ , ( वर्तमान में किये गलत काम ) यह बात उन लोगों पर सटीक बैठती है जिन्होंने पल भर का सुकून पाने के लिए गलत काम किया ! हमारे बड़े बुजुर्ग कह गए हैं कि , हमें अपने जीवन में बही काम करना चाहिए जिनके परिणाम भविष्य में अच्छे हों , हमें उन कामों से या उन बुराइयों से दूर रहना चाहिए जिनके परिणाम बुरे या दुखद हों, किन्तु आज हम जाने-अनजाने ऐसे काम कर रहे हैं जो शुरुआत में अच्छे तो लगते हैं किन्तु भविष्य में हमारे सामने उसके भयावह और बुरे परिणाम आते हैं ! आज हमारे आसपास का जैसा माहौल है , हम जिस वातावरण में जीवन - यापन कर रहे हैं , जहाँ आदर्श , संस्कार , सिद्धांत दूर - दूर तक नजर नहीं आते , आज लोगों का सोचना ये है कि , " खाओ पियो ऐश करो , जो होगा देखा जायेगा " ( यह बात सभी पर लागू नहीं होती , ये उन लोगों का सोचना हो सकता है जिनमें संस्कारों की कमी है और पैसा ही उनके लिए सब कुछ है ) आज देश में भटके हुए युवा क्या कर रहे हैं ? उन्होंने अपने जीवन का उपयोगी समय मनोरंजन और आधुनिक चमक-धमक में खोकर निकाल दिया और अब जब वक़्त उनके हाँथ से निकल गया तो अब पछता रहे हैं और अब उस वक़्त के साथ चलने की बेकार कोशिश कर रहे हैं ! हम सभी ने भी अपने जीवन में कभी ना कभी ऐसा अवश्य किया होगा जिस पर हमें पछतावा हुआ होगा ! हमारे बुजुर्ग जो पहले कुछ सिद्धांत बना गए वो आज भी उतनी ही मजबूती के साथ खड़े हुए हैं ! " पहले सजा - फिर मजा " इसका मतलब ये नहीं कि, पहले मार फिर प्यार , इसका मतलब है हमें अपने बिगड़े बच्चों को सुधारना होगा , प्यार से , संस्कारों से अच्छे बुरे का ज्ञान देकर , बताना होगा कि , वक़्त के साथ चल कर , अपने लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें आगे बढ़ना होगा , यदि वो आज सही राह पर चले गए और भटकने से बच गए तो उनका भविष्य उज्जवल और प्रगतिशील होगा ! इसलिए बच्चों को डांटना भी आवश्यक है ! जिसने मन लगाकर अपना काम पूर्ण ईमानदारी के साथ सही समय पर कर लिया , समझो वो सफल हुआ ......... जो सिर्फ मनोरंजन करते रहेंगे, समय बर्बाद करते रहेंगे समय के महत्व को नहीं समझेंगे वो जीवन में सफलता हांसिल करेंगे या नहीं ये तो सिर्फ वक़्त ही बताएगा ! इसलिए गलत कामों का मजा लेने से पहले अपने भविष्य के बारे में जरा अच्छे से सोचिये ..............
आप किस सिद्धांत को सही मानते हैं ......" पहले मजा फिर सजा "....... या फिर " पहले सजा - फिर मजा "