Thursday, November 15, 2012

वो शादी का घोड़ा है ... और ये गिरगिट .........>>> संजय कुमार

हमारे देश की विपक्षी पार्टी के जानेमाने , बड़बोले नेताजी ने अपने एक भाषण के दौरान केंद्र सरकार चलाने वाले युवराज को " शादी का अड़ियल घोड़ा " तक कह दिया , अब विवाद तो होना ही है ! अगर विवाद नहीं होगा तो फिर विपक्ष की ताक़त तो खत्म समझो ... खैर ये तो हमारे और देश के लिए अब  रोज की बात है ! एक दिन ऐसा आएगा जब कोई नेता किसी दुसरे नेता को सुअर और कुत्ता तक कह देगा .... अरे भई ये आज की गन्दी राजनीति जो है इसमें सब कुछ जायज है ! मैं कहता हूँ कि , सूअर तो ठीक  है लेकिन कुत्ता तो नहीं हो सकता , क्योंकि कुत्ता तो एक " वफादार " जानवर कहलाता है और  आज के भ्रष्ट नेता तो वफादार नहीं हो सकते ... अगर ऐसा हुआ तो ये कुत्ता बिरादरी उनकी वफ़ादारी का अपमान है और ये बात कुत्ते जरा भी बर्दाश्त नहीं करेंगे ! हम इंसानों की जानवरों से तुलना कोई आज की नयी बात तो है नहीं , ये तो हम जब से पैदा हुए तब से ही सुनते आ रहे हैं ...... मुझे भी कई बार जानवर , पक्षी और पता नहीं क्या - क्या  कहा गया या फिर उनसे तुलना की गयी , हो सकता है आपके साथ भी हुआ हो , अगर नहीं हुआ तो आप असली इंसान कहलाने का हक रखते हैं ! जब बच्चा पैदा होता है तब हम उसकी तुलना " चाँद " से करते हैं फिर भले ही चाँद पर सेंकड़ों दाग धब्बे हों ...... स्कूल में कई बार " मुर्गा " बनाया जाता है , पढ़ाई में कमजोर होने पर टीचर और माँ-बाप " गधा " कहते हैं ज्यादा देर रात तक पढ़ने पर " उल्लू " कहा जाता है ! ज्यादा खा - खाकर मोटा हो गया तो " हांथी " कहा जाता है ........ किसी के काम ना आ सका तो " धोबी का कुत्ता " ........ देश के नेताओं को " गिरगिट " कहा जाता है ......अरबों - खरबों का घोटाला कर अपने आप को पाक-साफ़ बताने वाले नेताओं को  कहा जाता है " सौ सौ चूहे खाके बिल्ली हज को चली " ........... किसी भी स्तर तक गिरने वाले को " सूअर " कहा जाता है ...... तेज दिमाग चलाने वाले को " लोमड़ी " कहा जाता है ! हुडदंग मचाने वाले को " बन्दर " अच्छा गाने वाले को " कोयल " बुरा गाने वाले को कौवा ........ चुस्त , फुर्तीले खिलाड़ियों की तुलना " चीते " से बहादुरों की तुलना " शेर " से की जाती है ! " माँ " की तुलना गौ-माता से की जाती है ...... कभी हम अपनी आस्तीनों में " सांप " पाला करते हैं तो कभी किसी स्त्री को " नागिन " कहते हैं ! आज एक आम आदमी दिन रात गधे-घोड़ों की तरह काम करता है तो कभी मशीन की तरह ! 
हमारे पास ऐसे हजारों उदाहरण हैं जहाँ इंसानों की तुलना जानवरों और पक्षियों से की जाती है ...... ये बात बिलकुल सही है क्योंकि सभी जानवरों , पशु-पक्षियों के गुण हमारे अन्दर विध्यमान हैं ! सच तो ये है कि , हमारे अन्दर का " इंसान " कुछ लोगों में पूरी तरह तो कुछ में आधा खत्म हो चुका  है ! हमारी प्रवत्ति तो जानवरों से भी वद्तर हो गयी है , जब हमारी तुलना जानवरों या अन्य से की जाती है तो ये हमारा अपमान नहीं जानवरों और पशु-पक्षियों का अपमान है ! पिछले कई बर्षों में हम इंसान से जानवर बन गए है , तभी तो आज चारों ओर इंसानियत और मानवता को शर्मसार करने वाले घ्रणित कार्य हो रहे हैं ! जानवरों में कई गुण ऐसे होते हैं जो इंसान के पास है ही नहीं .. और इंसान में इंसानों वाले गुणों का आभाव है !
अब चाहे कोई किसी को शादी का अड़ियल घोड़ा कहे या फिर धोबी का कुत्ता ........ हमें कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हम इंसान कम जानवरों की खूबियों से पूर्ण इंसान है !   आप क्या सोचते हैं .......? 

धन्यवाद 

Monday, November 12, 2012

दीपावली की हार्दिक शुभ-कामनाएं ........>>> संजय कुमार




आप सभी साथियों को , परिवार के सभी सदस्यों को पावन पर्व दीपावली की हार्दिक शुभ-कामनाएं ! यह पर्व आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लाये ! आप सभी , परिवार सहित हर्ष-उल्लास के साथ यह पर्व मनाएं ! यह पर्व आपके जीवन में प्रकाश लाये , आप सपरिवार सहित स्वस्थ्य रहें , मस्त रहें ! धन की देवी " माँ लक्ष्मी " आप पर सदा मेहरबान रहें ! देवी " माँ सरस्वती " की असीम कृपा आप पर बनी रहे ! " श्री गजानन " आपको बल बुद्धि प्रदान करें ! आपका अपने परिवार के साथ असीम प्रेम और स्नेह का भाव जीवन पर्यंत बना रहे !

दीपावली की बहुत बहुत  हार्दिक शुभ-कामनाएं ............

शुभ-कामनाओं सहित


संजय कुमार चौरसिया 
गार्गी चौरसिया 
देव चौरसिया 
कुणाल चौरसिया 

धन्यवाद 

Friday, November 9, 2012

कहीं दीप जले कहीं दिल ........>>> संजय कुमार

जहाँ सुख है वहां दुःख भी है , जहाँ हंसी है वहां गम भी है , गरीबी है तो अमीरी है , धूप है तो छाँव भी है आखिर ये सभी प्रकृति के नियम है , ये प्रकृति का एक ऐसा चक्र है जो समय के अनुसार बदलता रहता है ! ये बात अलग है कि , कुछ लोगों के जीवन में सुख का पलड़ा अधिक तो कुछ के जीवन में दुःख का पलड़ा अधिक होता है , सच तो ये है कि , ज्यादातर दुःख का ही पलड़ा भारी रहता है , क्योंकि .... छोड़ो जाने देते है , हम तो अपमे मुद्दे पर आते हैं ! हमारे आस-पास का माहौल अब पूरी तरह बदल गया है , आज हम अपने दुःख से ज्यादा कहीं पड़ौसी के सुखी होने से ज्यादा दुखी है , अगर हम ऐसा करते हैं तो हमारे लिए बहुत ही दुःख की बात है .. क्योंकि आज के समय में सुख हांसिल करना बहुत मुश्किल काम है , अच्छे-अच्छों का जीवन निकल जाता है एक पल के सुख के लिए ! हमारा गुस्सा तब जायज है जब कोई , हमें मिलने वाली खुशियों को हमसे छीनकर हमें दुःख देकर खुद खुशियों का हिस्सा बने ! मैं एक आम आदमी हूँ , एक आम  इन्सान हूँ ! आप भी मेरी तरह अपने आस-पास होने वाली कई घटनाओं से चिंतित और दुखी होंगे , क्योंकि उसका असर प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष रूप से हम सभी के ऊपर पड़ता है ! हम यहाँ बात देश के हालातों पर, सरकारी नीतियों पर कर रहे हैं , आँख होते हुए भी अंधों की तरह सब कुछ देखने के बारे में बात कर रहे हैं , निर्धन, गरीब, भूखों की, कुपोषण के शिकार मासूम बच्चों की बात कर रहे हैं , अपने हक के एक-एक पैसे के लिए भटकते जरुरतमंदों की , अपनों द्वारा ठुकराए बुजुर्गों की , दर दर की ठोकर खाते आत्महत्या के लिए प्रेरित कई किसानों की , मौज करते सरकारी बाबुओं और अधिकारीयों की , देश को लूटते भ्रष्ट और घोटालेबाज मंत्रियों की बात कर रहे हैं जो देश को अब खुलकर लूट रहे हैं ! आज देश की आम जनता त्राहि-त्राहि कर रही हैं और हमारी सरकार घोड़े बेचकर सो रही है माफ़ कीजिये सो नहीं रही बल्कि वो तो मृत है और मृत किसी काम का नहीं होता ! इस देश में कोई भूख और कुपोषण से मर रहा है तो कोई पानी के लिए एक-दूसरे की जान का दुश्मन बन जाता हैं , कोई नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है तो कोई न्याय पाने के लिए अपनी एड़ियां घिस रहा है , सच तो ये है की स्थिती जस की तस है ! एक आम आदमी सुबह से लेकर शाम तक कड़ी मेहनत करता है तब कहीं जाकर वह अपने और अपने परिवार के लिए इस भीषण मेंहगाई के दौर में सिर्फ भोजन की व्यवस्था कर पाता हैं शायद कुछ को ये भी नसीब नहीं है ! एक आम आदमी अपना पूरा जीवन रोटी, कपड़ा और मकान के चक्कर में निकाल देता है ! वहीँ हमारी सरकार की लापरवाही जगजाहिर है इसके एक नहीं हजारों उदाहरण हैं जिन पर हम भी एक बार नहीं हजारों बार चर्चा कर चुके हैं ! लापरवाही के कारण हजारों लाखों टन अनाज सड़ जाता है और बर्बाद हो जाता है ! यह सब देखकर एक आम आदमी का दिल बहुत रोता है ! एक भिखारी सुबह से लेकर शाम तक भीख मांगकर दो मुट्ठी अनाज की दरकार में पूरा जीवन यूँ ही निकाल देता हैं ! देश में हर साल हजारों मौतें सिर्फ भूंख के कारण होती हैं ! कई राज्यों में आज भी, पोषित भोजन ना मिल पाने के कारण कई मासूम कुपोषण का शिकार हो रहे हैं ! ( ताजा आंकड़ों के अनुसार पूरे विश्व में 10 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार हैं , और इसमें भारत की भी बड़ी भूमिका है )  इन सब पर हमारे सरकारी विभाग चैन से सो रहे हैं ! वहीँ देश की सरकार के झूठे वादे हमेशा की तरह कि, देश में सब कुछ ठीक हैं ! इस देश में करोड़ों परिवार ऐसे हैं जो एक एक रूपए इकठ्ठा करने में ही अपना पूरा जीवन निकाल देते हैं , सरकार उन पर टैक्स लगाकर सरकार का खजाना भारती हैं और बाद में वही खजाना सरकार की तिजोरियों से बाहर निकलकर देश से बाहर स्विस बैंकों में पहुँचता हैं ! देश में मंहगाई बढ़ गई  हैं जिससे आम जनता का जीना मुश्किल हो रहा हैं ! अरबों-खरबों का काला धन देश के बाहर पड़ा है और यहाँ आम जनता की जेब कट रही है ! 

गरीबों के राशन से अमीरों के गोदाम भरे पड़े हैं ...... 
सरकारी दुकानों पर आज भी बड़े - बड़े ताले पड़े हैं .....
सरकार के खजाने भी हैं भरे .......फिर भी    
गरीब वहीँ के वहीँ खड़े हैं ! 

इस दिवाली भी ऐसा होगा कि ,  कहीं  दीप जलेंगे तो , कहीं दिल 

धन्यवाद 

Thursday, November 1, 2012

एक मच्छर साला आदमी को ......? ? .........>>> संजय कुमार

एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है ......( क्या सोचकर बोला पता नहीं कैसे एक मच्छर  एक आदमी को ? ) अबे ओये मच्छर ...... मैं तुझे मच्छर की तरह मसल डालूँगा ..... तू मेरा क्या बिगाड़ लेगा बे मच्छर .! इस तरह के अनेकों  डायलाग हम अपनी फिल्मों में अक्सर सुनते रहते हैं , जहाँ फिल्म का विलेन हीरो को और हीरो विलेन को या उसके टुच्चे गुंडों को बोलता पाया जाता है ! इसका मतलब बिलकुल साफ़ है , हम अपने दुश्मन को अपने से कमजोर और लाचार समझ रहे हैं .... यानी हमारी नजर में एक मच्छर की कोई औकात नहीं है , वो हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता , हमें उससे डरने या घबराने की कोई जरुरत नहीं है , आखिर एक मच्छर ही तो है ..... बस यहीं हम भूल कर जाते है , विशालकाय हांथी को भी ये लगता है कि , अदनी सी रेंगने वाली चींटी उसका क्या बिगाड़ पायेगी ..... किन्तु जब ये चींटी हांथी की सूँड में घुस जाती है .. तब पता चलता है हांथी को कि, किसमें  कितना  दम है ! सच तो ये है कि , हमें कभी भी किसी को छोटा या कमजोर नहीं समझना चाहिए .... क्योंकि ? जिसे हम साधारण सा मच्छर समझ रहे हैं उसे हम दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी कहते हैं ! जो मलेरिया ,डेंगू  और टायफाईड  से दिन प्रतिदिन लोगों की जान ले रहा है और ना जाने दुनियाभर की कौन - कौन सी बीमारियाँ हमें आगे भी देता रहेगा !  हमारे देश के सरकारी अस्पतालों की हालत अगर आप देखेंगे तो मालूम चलेगा इसका आतंक ! इसके खिलाफ ना तो हम कुछ कर सकते हैं और सरकार से भी हम ज्यादा उम्मीद नहीं रखते क्योंकि सरकार तो अभी अपने आपको ही बचाने की जद्दोजहद में लगी हुई है ! भारत और अमेरिका की लिस्ट में जो आतंकवादी है उन्होंने तो आजतक सिर्फ बेक़सूर लोगों को ही मारा है किन्तु ये जब भी हमला करता है तो बड़ी ही ईमानदारी और समझदारी से करता है क्योंकि ये भ्रष्ट नहीं है और ना ही देश का गद्दार है क्योंकि ये किसी को भी नहीं छोड़ता ( आतंकवादियों के हमले में आज तक कोई भी बड़ी हस्ती नहीं मारी गयी ) इसके लिए सभी एक समान हैं !  छोटा - बड़ा , अमीर - गरीब , हिन्दू-मुस्लिम , ईमानदार - भ्रष्टाचारी , नेता - अभिनेता ( यशराज चौपड़ा जी को शायद इसी ने डसा था जिससे  उन्हें डेंगू हुआ था ) किसी को भी नहीं  छोड़ता आज तक हजारों लाखों बेक़सूर इंसानों को
निगल चुका है ! यह हमारा पारंपरिक आतंकवादी है और इसे हमें " ओसामा बिन लादेन " और अन्य खतरनाक आतंकवादियों से भी ज्यादा खतरनाक मानना चाहिए हमारी गलतियों से ही , आज
ये  खतरनाक रूप ले चुका है ! यह आपको हर जगह मिलेगा या यूँ भी कह सकते हैं कि , हिन्दुस्तान 
 के हर घर में मिलेगा घर के अन्दर बाहरआपके चारों ओर आप इसे कभी भी देख सकते हैं !सर्दी -गर्मी 
-बरसात हर मौसम में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करने वाला जीव हैं यह यह अकेला ही खतरनाक है  
यह झुण्ड में भी हमला करता है और कई इंसानों पर एक साथ यह अपने समस्त कुटुंब के साथ जैसे
नरमांदा एवं बच्चे सब मिलकर हमला करते हैं ! हम सब नित नए नए हथकंडे अपनाते हैं इसे खत्म 
करने के लिए फिर भी इंसान के वश के बाहर है इसे खत्म करना क्योंकि यह कभी - कभी नहीं
बल्कि प्रतिदिन हमला करता है एक बार नहीं कई बार करता है ! आप इससे कितना भी बचने की कोशिश
करें जीवन में एक ना एक बार या फिर कई बार आप इसका शिकार अवश्य हुए होंगे यदि नहीं तो आगे
हो सकते हैं ( सावधानी और सुरक्षा ही बचाव है ) और ये बात मैं पूरे विश्वास और यकीन के साथ कह
 सकता हूँ ! ये हम सब का रक्त पिपाशु है , इसके हथियार हैं इनके धारदार और नुकीले " डंक " जो एक 
बार  इंसान के शरीर में चुभा दें बस , फिर इंसान के साथ क्या -क्या होता है ये बात हम सब अच्छे से 
जानते हैं ! मच्छर महाराज " से सबसे ज्यादा पीड़ित निचले तबके के गरीब और मजबूर लोग ही होते
हैं ,क्योंकि इनके पास इस आतंकवादी से लड़ने के लिए कोई हथियार नहीं होता है ! हथियार है भी तो हर
कोई उनका उपयोग नहीं कर  पाता और जो उपयोग करते  भी हैं तब भी ये उन्हें नहीं छोड़ता , मतलब
साफ़ है हमें सचेत और सावधान रहना होगा ! ALL-OUT , MORTIN और " मच्छर भगाओ अगरबत्ती " 
इसके आगे सब कुछ बौना सा साबित होता है ! हमारे देश की सरकार और संगठन इस आतंकवादी को
एक बार जड़ से समाप्त करके बताये तब हम मान सकते हैं कि हमारी सरकार हर आतंकवादी का सफाया
कर सकती है ! वर्ना बड़े- बड़े वादे करने और उलूल - जुलूल बयानबाजी से कुछ नहीं होगा ! अन्दर की और
सच बात तो ये है कि , इसके खौफ से तो सरकार के आला अफसर तक डरे रहते हैं !


दोस्तों आप जरा बचके रहिये वर्ना ...... एक मच्छर साला आदमी को कहीं भी पहुंचा सकता है !

धन्यवाद  


Friday, October 26, 2012

बचपन और यादें ......... >>> गार्गी की कलम से

किसी आलौकिकता से 
कम नहीं होते 
बचपन छुटपन के दिन ,
बहुत ज्यादा तड़पा जाता है मुझे 
वर्तमान और बचपन की 
यादों का संगम 
" माँ " आपकी गोद सा सुकून 
ईश्वर की पूजा में भी नहीं है शायद 
अब जब भी आपकी याद आती है 
तो ईश्वर में आपका 
चेहरा , कर , कदम 
उकेरता है , ये मन
" भईया " अपने बड़े बेटे में 
आप दिखाई पड़ते हैं मुझे 
और छोटे में खुदकी सी 
नादानियाँ नजर आती हैं मुझे 
" माँ " आपका वो छोटा सा कमरा , जहाँ 
बरसात में हमें , गोद में लेकर 
बैठ जाया करती थी वहां 
आज उस कमरे के आगे 
सारा जहाँ छोटा नजर आता है मुझे !
मैं तो चाहती हूँ कि , 
बचपन भूल जाऊं तुझे 
पर हर वार तुझे भूलने में 
नाकाम हो जाती हूँ मैं !

( प्रिये पत्नी गार्गी की कलम से )

धन्यवाद 

Tuesday, October 23, 2012

विजयदशमी पर हम सभी को विजय चाहिए ... ( दशहरा पर्व ) ....... >>> संजय कुमार

आप सभी साथियों को विजयदशमी, दशहरा पर्व की हार्दिक शुभ-कामनाएं !
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जैसा की हम जानते हैं कि , विजयदशमी , दशहरा , रावण दहन पर्व हम विजय उत्सव के रूप में मनाते हैं ! असत्य पर सत्य की जीत , अधर्म पर धर्म की जीत, बुराई पर अच्छाई की जीत , नारी सम्मान की जीत , के रूप में कई बर्षों से मनाते आये हैं और आगे भी मनाते रहेंगे क्योंकि विजयदशमी का पर्व तो सिर्फ एक दिन मनाया जाता है ! क्या रावण का अंत करने के साथ ही झूंठ -बुराई , अधर्म और अत्याचार  का अंत हो गया ? क्या बुराई रुपी रावण ( पुतला ) का दहन करने से सब कुछ खत्म हो जायेगा ? जी नहीं कुछ भी खत्म नहीं होगा ! आज भी हमारे आस-पास सौ सिरों वाले अनेकों रावण उपस्थित है जो " रामायण " के रावण से कहीं अधिक ताकतवर और शक्तिशाली हैं ! रावण में शायद उतनी बुराइयाँ नहीं थीं जितनी कि आज के रावणों में है ! दशानन लंकेश तो अपनी शक्ति के मद में चूर था , उसे सच का ज्ञान था उसे पता था कि " श्रीराम " के हांथों उसका अंत होना है फिर भी उसने बुराई और अधर्म का सम्पूर्ण नाश करवाने के लिए ऐसा किया ! आज अगर हमें सही मायने में विजयदशमी का पर्व और उसकी उपयोगिता को समझना है तो हमें अपने आसपास व्याप्त झूंठ-फरेब , बुराई , असत्य , पाप-दुरचार, को मिटाना होगा ! हमें अपने आस-पास का माहौल अच्छा बनाने के लिए , अपनों की ख़ुशी के लिए , अपना जीवन सुखमय बिताने के लिए अपने अन्दर से अहम् , काम , क्रोध , लालच , मोह को पूरी तरह त्यागना होगा ! क्योंकि ये भी दशानन , रावण का ही एक रूप है ! जिस तरह प्रभु " श्रीराम " ने रावण का अंत कर इस दुनिया से असत्य , अधर्म और बुराई का अंत किया था ठीक उसी प्रकार अब हम सबको अपने जीवन में " राम " बनना होगा और इन समस्त बुराइयों का अंत करना होगा ! आज इस देश में ऐसे रावणों का बोलबाला है जिनके अंत के लिए कई राम प्रयासरत है किन्तु इनकी शक्ति देखकर तो ऐसा लगता है जैसे इन्होने " अमृतपान " किया हो , जैसे कभी इनका अंत ही नहीं होगा , हमें इन पर कभी विजय प्राप्त नहीं होगी ! ये आज रावण है जिसे हम " भ्रष्टाचार " के नाम से जानते हैं ! इस भ्रष्टाचार रुपी रावण से इसके अनेकों शीश उत्पन्न हुए है ....... गरीबी ,  बेरोजगारी , कुपोषण , घोटाले , बेईमानी , आतंकवाद , नक्सलवाद और सबसे बड़ा रावण मेंहगाई जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया ...... क्या इस विजयदशमी पर्व पर हमें इन रावणों पर विजय प्राप्त होगी ? यदि इनमें से हम किसी भी एक रावण पर विजय प्राप्त कर लें तभी कहलायेगा सही मायने में विजयदशमी , दशहरा पर्व !   
क्या आप रावण का दहन करने से पहले अपने अन्दर के रावण का दहन करेंगे ? क्या आप चहुँ ओर व्याप्त रावणों का अंत कर उन पर विजय प्राप्त करेंगे ?  यदि ऐसा करेंगे तो सच में आप कहलायेंगे विश्व विजेता 

आप  सभी को विजयदशमी की हार्दिक बधाइयाँ एवं ढेरों अनेकों शुभ-कामनाएं

जय श्रीराम ------ जय श्रीराम ----------- जय श्रीराम 



धन्यवाद

Saturday, October 20, 2012

सड़क छाप मंजनू ....... और .. और .. ...>>> संजय कुमार

हमारे यहाँ एक बहुत पुरानी कहावत है ..... " जो पकड़ा गया वो चोर है ....और जो ना पकड़ा वो .... पता नहीं .... शायद इसी तरह की कोई कहावत है ........ ये बात मैं इसलिए कह रहा हूँ कि , क्योंकि मैं यहाँ ऐसे प्रेमियों का जिक्र कर रहा हूँ ... जो लुक-छिप कर प्रेम करते है और इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि , कोई उन्हें ऐसा करते देख ना ले..... वर्ना ... वर्ना बहुत कुछ हो जाता है ...... जो नहीं पकड़े जाते या नहीं पकड़े गए वो प्रेमी और जो पकड़ा गया वो कहलाया मंजनू ..... अरे बही लैला का मंजनू ..... माफ़ कीजिये आजकल मंजनू - बंजनु  वाली बात कोई नहीं करता ... क्योनी आजकल प्रेम करने के तरीके जो  बदल गए हैं .. खैर हम मुद्दे की बात पर आते है ... आज का मुद्दा है हमारे देश के सड़क छाप मंजनू ..  
मंजनू , नाम सुनते ही किसी सड़क छाप आशिक का ख्याल हमारे मन  में आता है ! वह युवा (लड़का ) जो आपको सड़कों पर आवारागर्दी करते नजर आते हैं , बेलगाम , लापरवाह और माँ-बाप की बातों को अनसुना करने वाले अपनी मस्ती में मस्त लड़के ,  इन्ही में से ही ज्यादा संख्या में सड़क छाप मंजनू भी होते हैं ! हिन्दुस्तान में हजारों किस्से कहानियां भरे पड़े हैं  इन मजनुओं और इनकी प्रेम कहानी से उदहारण ... जैसे लैला-मंजनू , सोहनी-महिवाल , हीर-राँझा और भी बहुत हुए हैं , लेकिन हिंदुस्तान में तो यही ज्यादा  Famous हैं , और इन्ही को लेकर आज के कई युवाओं को ये मंजनू नाम दिया जाता  है ! ये मंजनू आपको हर देश में मिलेंगे , किन्तु भारत में इनकी संख्या लाखो-करोड़ों में है ! ये आपको कहीं भी , कभी भी  देखने को मिल जायेंगे , स्कूल, कॉलेज , पिकनिक स्थल , शादी-पार्टी , मेले , पार्क, ट्यूशन के अन्दर कोचिंग के बाहर, लगभग सभी जगह ! आजकल नवरात्र का त्यौहार चल रहा है तो इनकी संख्या वर्तमान में ज्यादा हो जाती है ! इस देश में कई स्पॉट तो ऐसे हैं जो  इन मंजनुओं के कारण ही प्रसिद्ध हैं ! लेकिन एक जगह और है जहाँ आजकल इनकी संख्या आम जगह से कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रही है , और वो जगह है " मंदिर " जी हाँ यह बात बिलकुल सही है , आज कल हमारे देश में " नवरात्री " गरबा "  का त्यौहार पूरे जोर-शोर से मनाया जा रहा है . और इन्ही मंदिरों की आड़ में आज इन मंजनुओं का प्रेम , परवान चढ़ रहा है ! क्योंकि ये तो वो  जगह है , जहाँ किसी के भी आने-जाने पर कभी कोई पावंदी और रोक-टोक नहीं होती ! मंदिरों पर जब ऐसे युवा  ( मंजनू- टाइप ) आते  है और सुबह - शाम  दोनों वक़्त आते हैं , तो  हमें लगता है कि , माता की भक्ति के लिए आया है , किन्तु आप अगर गौर से देखें तो आप महसूस करेंगे , की इनकी नजरें किसी ना किसी लैला की तलाश में होती हैं !  " काश यहाँ तो कोई हमें लाइन दे दे और हमारी भी फिल्मों के जैसे "लव-स्टोरी " बन जाये ( मन में इस तरह के ख्याल उमड़ना कोई नयी बात नहीं ... ये उम्र ही ऐसी है ) ! आजकल मंदिरों पर जरुरत से ज्यादा भीड़ होती है और इसी भीड़ में होते हैं मंजनू , पाकेटमार और भगवान् के सच्चे भक्त .... कुछ ऐसे भी युवा इन दिनों में  इन मंदिरों पर आते -जाते हैं , जिनका  ना तो ईश्वर भक्ति और मंदिरों से दूर दूर तक कोई लेना देना होता है ! कुछ ऐसे भी इन मंदिरों पर देखने को मिल जायेंगे जो शायद कहीं और मंजनू गिरी करने और अपनी प्रेमिकाओं से मिलने से घबराते हैं , किन्तु यहाँ पर बड़ी आसानी से मिल लेते हैं वो  भी बिना रोक-टोक और बिना किसी के शक किये हुए ! सभी मंजनुओं के लिए ये नवरात्र के नौ दिन बहुत मायने रखते हैं ! जितना इन्तजार इनको अपनी परीक्षाओं का नहीं रहता उससे कहीं ज्यादा इन्तजार इनको इन दिनों का रहता है ! ( विशेष शारदीय नवरात्र का )

मेरा ऐसा मानना है ... कुछ भी हो कम से कम हमारा आज का भटका हुआ युवा किसी बहाने से मंदिर तो जाता है ! भगवान् के सामने शीश तो झुकाता है ! वर्ना आज का युवा तो अपनी मस्ती में ही मस्त है ! आज का ज्यादातर युवा अपने आस-पास के माहौल और समाज की गतिविधियों से बहुत दूर हैं ! आज के युवा एक ऐसे दुनिया में जीते है जहाँ ना तो प्रेम - स्नेह, संस्कार और अपनेपन का कोई महत्त्व है क्योंकि आज देश में " रेव पार्टियाँ  " रेन डांस  " और " पव "कल्चर का चलन तेजी से बढ़ रहा है ! ऐसे  युवाओं ने ना तो अपने जीवन में कोई सिद्धांत बनाये हैं और ना ही कोई लक्ष्य ! बस चकाचौंध भरी दुनिया को ही अपना भविष्य समझ रहे हैं ! इस चकाचौंध भरी दुनिया में कई युवा अपना भविष्य भी बिगाड़ रहे हैं ! सिगरेट , शराब , शबाब , ड्रग्स और अन्य नशीली बस्तुएं आज इनके मुख्य शौक के रूप में हमारे सामने आ रहे हैं ! यह बात अब छोटे - छोटे गाँव , कस्बों , शहरों और महानगर में किसी संक्रामक बीमारी के जैसे फ़ैल रही है , या फ़ैल चुकी है ! 

हमें ध्यान देना होगा अपने बच्चों पर की आज वह क्या कर रहे हैं ? किस हालात में जी रहे हैं ? उन्हें क्या चाहिए ? और उन्हें हम क्या दे रहे हैं ? या उन्हें क्या मिल रहा है ? आज हम ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ सच्चा प्रेम कम ही देखने को मिलता है ! यदि आपके बच्चे किसी से सच्चा प्रेम करते हैं और यदि आपको लगता है कि , आपके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हांथों में है ! तो अंतिम निर्णय आपका होगा !

मेरी इस बात से कई सड़क छाप मंजनू मुझे गलियां भी देना चाह रहे होंगे , किन्तु में खुश हूँ , कि कभी हम भी उनकी तरह मदिरों पर किसी लैला की तलाश में गए थे ! वहां लैला तो नहीं मिली , परन्तु ईश्वर का आशीर्वाद जरूर मिला !

जय माता दी ............ जय माता दी .............जय माता दी ..........जय माता दी 

धन्यवाद
संजय कुमार